बिजनेस स्टैंडर्ड - जिला स्तर पर नोटबंदी के अध्ययन में सामने आई आर्थिक सुस्ती
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Wednesday, December 11, 2019 08:26 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम अर्थव्यवस्था खबर

जिला स्तर पर नोटबंदी के अध्ययन में सामने आई आर्थिक सुस्ती

अभिषेक वाघमारे / नई दिल्ली October 07, 2019

एक नए शोध से यह सामने आया है कि नोटबंदी की वजह से नौकरियों व आर्थिक गतिविधियोंं में 2 से 3 प्रतिशत अंक की कमी आई। साथ ही 8 नवंबर, 2016 को नोटबंदी की घोषणा के बाद सामान्य गतिविधियों की तुलना में बैंक कर्ज भी इतना ही प्रभावित हुआ है। नोटबंदी पर भारत में जिला स्तर पर कराए गए पहले शोध में राष्ट्रीय स्तर पर इसके असर का आकलन किया गया है। अर्थशास्त्रियों ने इस अध्ययन में पाया कि अब तक केवल राष्ट्रीय स्तर पर असर का अध्ययन किया गया, जिसमें असर कम नजर आया था।
 
इसमेंं कहा गया है, 'नोटबंदी के कारण नवंबर और दिसंबर 2016 के दौरान नकदी की कमी रही और इससे राष्ट्रीय आर्थिक गतिविधियां मोटे तौर पर 3 प्रतिशत अंक या ज्यादा सुस्त हुईं। इसका असर बैंक से लेने वाले कर्ज पर भी पड़ा और अक्टूबर-दिसंबर 2016 के दौरान यह 2 प्रतिशत या इससे ज्यादा कम हुआ।' इसमें पाया गया कि कम अवधि के हिसाब से नकदी की कमी का असर मांग पर पड़ा। अध्ययन में पाया गया है कि नोटबंदी के दौरान धन और आउटपुट के बीच मजबूत संबंध के  साक्ष्य मिले और इससे यह धारणा खारिज हुई है कि नोटबंदी का असर वास्तविक आर्थिक गतिविधियों पर नहीं पड़ा है। 
 
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) में मुख्य अर्थशास्त्री गीता गोपीनाथ, गोल्डमैन सैक्स (पूर्व में रिजर्व बैंक आफ इंडिया) की प्राची मिश्रा, हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के गैब्रियल चोडोरोव और रिजर्व बैंक के अभिनव नारायण ने यह शोधपत्र तैयार किया है, जो नैशनल ब्यूरो आफ इकनॉमिक रिसर्च, यूएसए में प्रकाशित हुआ है। पहली बार शोधकर्ताओं ने जिला स्तर के आंकड़ों का इस्तेमाल निम्नलिखित संकेतकों के आधार पर किया- नोटबंदी वाले पुराने नोटों का प्रसार और उनके स्थान पर नए नोट लाया जाना, रोजगार, जिला स्तर पर इसका असर, सकल घरेलू उत्पाद और बैंकों में इस दौरान जमा व निकासी। 
 
शोधकर्ताओं ने करीब 600 जिलों में प्वाइंट आफ सेल (पीओएस) टर्मिनल पर डेबिट या क्रेडिट कार्ड के इस्तेमाल से लेन देन और लोकप्रिय ई वालेट कंपनी से लेन देन के डेटाबेस का भी इस्तेमाल किया। नैशनल इंस्टीट्यूट आफ पब्लिक फाइनैंस ऐंड पॉलिसी में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर एन भानुमूर्ति ने कहा कि यह देश के विभिन्न इलाकों में नोटबंदी के विभिन्न तरह के असर को समझने के लिए नवोन्मेषी तरीका था।  उन्होंने कहा, 'शुरुआती शर्तें जैसे विभिन्न जिलों के क्षेत्रों में नकदी की उपलब्धता अहम हो जाती है, जब हम उन जिलों की अर्थव्यवस्था पर असर को देख रहे हों।' 
 
शोधपत्र में दिए गए नक्शे से पता चलता है कि राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, गुजरात के शहरी क्षेत्रों और महाराष्ट्र व दक्षिण भारत के द्वीपीय इलाकों पर नोटबंदी का सबसे ज्यादा बुरा असर पड़ा था। शोधपत्र में यह भी कहा गया हैकि 2016 के आखिर में नकदी की कमी की वजह से आर्थिक गतिविधियां पूरी तरह गिर गईं, जो आधिकारिक आंकड़ों में शामिल नहीं हो सकी हैं। हालांकि इसमें यह भी कहा गया है कि नोटबंदी का दीर्घकालिक असर हो सकता है और इससे कर संग्रह में सुधार, वित्तीय साधनों में बचत के तरीके में बदलाव और गैर नकदी भुगतान व्यवस्था जैसे लाभ हो सकते हैं। इंदिरा गांधी इंस्टीट्यूट आफ डेवलपमेंट रिसर्च के निदेशक एस महेंद्र देव ने कहा कि इस शोध से नोटबंदी केबाद दिखे असर की पुष्टि होती है। 
Keyword: demonetisation, economy, jobs, employment,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या राजकोषीय घाटे का लक्ष्य चूक जाएगी सरकार?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.