बिजनेस स्टैंडर्ड - आंध्र प्रदेश में अक्षय ऊर्जा की कम खरीद जारी
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आंध्र प्रदेश में अक्षय ऊर्जा की कम खरीद जारी

श्रेया जय / नई दिल्ली October 06, 2019

उच्च न्यायालय के दिशानिर्देशों को दरकिनार करते हुए आंध्र प्रदेश में अक्षय ऊर्जा की कम खरीद जारी है। करीब 7,500 मेगावॉट क्षमता के पवन और सौर ऊर्जा संयंत्र भुगतान में देरी और इस साल जुलाई महीने से आपूर्ति में कमी किए जाने के संकट से जूझ रहे हैं। उद्योग के अधिकारियों का कहना है कि ठीक इसी समय राज्य सरकार कम अवधि के बिजली बाजार से 5 रुपये प्रति यूनिट या इससे भी ज्यादा दाम पर बिजली खरीद रही है। एक पवन ऊर्जा कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि खरीद में कमी मौखिक रूप से की गई है और खासकर ऐसा पवन ऊर्जा संयंत्रों से सबसे ज्यादा उत्पादन होने वाले समय में किया जा रहा है। 
 
राज्य अपनी बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) के माध्यम से बिजली की आपूर्ति का निर्धारण रीजनल लोड डिस्पैच सेंटर (आरएलडीसी) में करते हैं। अगर किसी तरह की कटौती या कमी की जाती है तो इसके लिए पहले से लिखित आवेदन दिया जाता है। उद्योग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'राज्य की ओर से दक्षिणी आरएलडीसी या डेवलपरों को कोई औपचारिक नोटिस नहीं दिया गया है। राज्य ने परियोजना डेवलपरोंं को मौखिक रूप से कटौती के बारे में कहा है।'  बिजनेस स्टैंडर्ड के पास मौजूद आंकड़ों के मुताबिक ज्यादा आपूर्ति के घंटों के दौरान (1800-2100 घंटे) शाम के वक्त भी कम पवन बिजली ली जा रही है। सौर बिजली डेवलपरों ने कहा कि राज्य के सौर बिजली उत्पादन क्षमता के करीब 70 प्रतिशत खरीद घटा दी गई है, जबकि अक्षय ऊर्जा को निश्चित रूप से चलाने का दर्जा दिया गया है। 
 
इस समय आंध्र प्रदेश सरकार कम अवधि की बिजली खरीद करने में पिछले सप्ताह से करने में सक्रिय है। राज्य ने 2.8 से 5.5 रुपये प्रति यूनिट के भाव बिजली खरीदी है। राज्य में पवन ऊर्जा का औसत भाव 4.8 रुपये प्रति यूनिट और सोलर 4.5 रुपये प्रति यूनिट है। वाईएसआर कांग्रेस के नेतृत्व में बनी राज्य सरकार ने जुलाई में सभी अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं के शुल्क की समीक्षा करने का फैसला किया था, जो पूर्ववर्ती चंद्रबाबू नायडू सरकार के कार्यकाल में आवंटित हुई थीं। सरकार ने उच्च स्तरीय वार्ता समिति (एचएलएनसी) भी बनाई थी, जिसे पूर्ववर्ती सरकार द्वावा आवंटित सभी अक्षय ऊर्जा परियोजनाओंं के 'शुल्क की समीक्षा, उस पर बातचीत और शुल्क में कमी लाने' पर काम करना था। 
 
शुल्क में कमी लाने के पीछे सरकार ने डिस्कॉम की खराब वित्तीय स्थिति का हवाला किया था और अक्षय ऊर्जा की खरीद कम कर दी थी। उसके बाद अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं के डेवलपर आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय चले गए, जिसने कंपनियों के पक्ष में फैसला किया। न्यायालय ने 24 सितंबर को दिए गए आदेश में एलएलएनसी को भंग कर दिया, जिसका गठन अक्षय ऊर्जा खरीद की दरों की समीक्षा करने के लिए किया गया था। न्यायालय ने यह भी कहा, 'प्रतिवादी (राज्य सरकार) को निर्देश दिया जाता है कि वह उत्पादन में कमी, बिजली खरीद रोकने या इस तरह के कोई कदम न उठाए।' न्यायालय ने यह भी आदेश दिया था कि राज्य सरकार डेवलपरों के बकाये का भुगतान करे। केंद्रीय बिजली मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक आंध्र में अक्षय ऊर्जा उत्पादकों का बकाया जुलाई 2019 के अंत तक 2,500 करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया है। परियोजना डेवलपरों का कहना है कि उन्हें राज्य से अब तक कोई भुगतान नहीं मिला है। 
 
2019-20 के एवरेज रेवेन्यू रिक्वायरमेंट (एएआर) फाइलिंग में आंध्र की डिस्कॉम ने 9,415 करोड़ रुपये का घाटा दिखाया था। उसने 28,788 करोड़ रुपये राजस्व की जरूरत बताई थी। राजस्व में अंतर के बावजूद डिस्कॉम ने उपभोक्ताओं के बिल में बढ़ोतरी के लिए कोई आवेदन नहीं किया। इसके अलावा नियामक ने 7,064 करोड़ रुपये बिजली सब्सिडी को मंजूरी दे दी, जिससे कृषि उपभोक्ताओं को मुफ्त बिजली दी जा सके। 
Keyword: power, electric, andhra pradesh,,
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