बिजनेस स्टैंडर्ड - कागज पर आयात का दबाव
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कागज पर आयात का दबाव

टीई नरसिम्हन / चेन्नई October 06, 2019

इस वित्त वर्ष की पहली तिमाही में कागज (अखबारी कागज को छोड़कर) और गत्ते का आयात 29.50 प्रतिशत बढ़कर $36 करोड़ डॉलर हो गया है। घरेलू बाजार में मांग बढऩे के बावजूद भारतीय कंपनियां अधिक आयात के कारण इसका लाभ नहीं उठा पा रही हैं। इस वजह से क्षमता उपयोग लगभग 75-80 प्रतिशत रह गया है। केंद्रीय लुगदी एवं कागज अनुसंधान संस्थान (सीपीपीआरआई) के आंकड़ों के मुताबिक देश की 861 कागज मिलों में से केवल 497 (58 प्रतिशत) ही चालू हैं। यह आंकड़े उद्योग पर दबाव को दर्शाते हैं।
 
कागज उद्योग ने प्रस्तावित क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक साझेदारी (आरसीईपी) के तहत कागज और गत्ते पर आयात शुल्क रियायतें देने के संबंध में सरकार को अपनी गंभीर चिंता से अवगत कराया है। यह साझेदारी इस साल के आखिरतक संपन्न होने की उम्मीद है। वाणिज्यिक खुफिया एवं सांख्यिकी महानिदेशालय (डीजीसीआईएस) ने बताया है कि 2018-19 की पहली तिमाही के मुकाबले भारत के कागज और गत्ता आयात में 2019-20 की पहली तिमाही के दौरान मात्रा के हिसाब से 36.6 प्रतिशत का बड़ा इजाफा हुआ है।
 
इस अवधि में जहां एक ओर चीन से आयात में 47.7 प्रतिशत की उछाल आई है, वहीं आसियान से आयात में 78.9 प्रतिशत तक का भारी इजाफा हुआ है। मूल्य के लिहाज से दक्षिण कोरिया से आयात में 48.04 प्रतिशत और मात्रा के लिहाज से 42.46 प्रतिशत की संयुक्त वार्षिक वृद्धि दर से इजाफा हुआ है। पिछले आठ साल में चीन से भारत में कागज और गत्ता आयात में मूल्य के लिहाज से 13.24 प्रतिशत और मात्रा के लिहाज से 6.31 प्रतिशत की संयुक्त वार्षिक वृद्धि दर से इजाफा हुआ है।
 
इंडियन पेपर मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (आईपीएमए) के अनुसार हालांकि कागज का भारतीय बाजार प्रतिवर्ष 6-7 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है, लेकिन इस इजाफे में ज्यादातर आयात हावी हो रहा है। आईपीएमए ने कहा कि एक ओर घरेलू कागज उद्योग बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में काम कर रहा है, वहीं दूसरी ओर मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के तत्वावधान में बहुत कम दामों पर बड़ी मात्रा में कागज और गत्ते का आयात भारत में किया जाता है। आसियान-एफटीए के तहत कागज और गत्ते के अंतर्गत शुल्क की लगभग सभी श्रेणियों में आयात शुल्क लगातार कम किया जाता रहा है और एमएफएन की 10 प्रतिशत की मूल दर से कम होकर मूल सीमा शुल्क अप्रैल 2014 से प्रभावी शून्य हो गया है। भारत-कोरिया व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते के अंतर्गत भी मूल सीमा शुल्क को लगातार कम किया गया है और जनवरी 2017 से यह शून्य प्रतिशत के स्तर पर आ गया है। जनवरी 2018 से प्रभावी एशिया प्रशांत व्यापार समझौते (एपीटीए) के तहत भारत ने चीन (और अन्य देशों) के लिए आयात शुल्क रियायतें बढ़ा दीं और कागज की अधिकांश श्रेणी पर मूल सीमा शुल्क को 10 प्रतिशत से घटाकर सात कर दिया।
 
आईपीएमए के महासचिव रोहित पंडित ने कहा कि भारत दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ता कागज बाजार है और वैश्विक स्तर पर विदेशी कागज विनिर्माताओं का ध्यान इस बात पर है कि भारत में किस तरह ज्यादा से ज्यादा कागज आपूर्ति की जाए। उन्होंने कहा कि आसियान-भारत मुक्त व्यापार समझौते के अंतर्गत देश में हो रहे कागज और गत्ते के शुल्क मुक्त आयात के कारण देश के कागज उद्योग को पहले ही पिछले आठ सालों से भारी दबाव का सामना करना पड़ रहा है और अगर दुनिया के सबसे बड़े कागज विनिर्माता चीन से आरसीईपी के तहत शुल्क मुक्त आयात को भी आगे अनुमति दी जाती है तो यह बहुत विनाशकारी होगा। 
 
जेके पेपर के अध्यक्ष और निदेशक एएस मेहता ने कहा कि भारत दुनिया में कागज का सबसे तेजी से बढ़ता बाजार है जिसने विदेशी विनिर्माताओं को सस्ता आयात करने का मौका उपलब्ध कराया है जिससे घरेलू बाजार और विभिन्न विनिर्माताओं को नुकसान हो रहा है।
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