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फंड का प्रदर्शन नहीं ठीक तो खर्च रखें कम

संजय कुमार सिंह /  October 06, 2019

भारतीय म्युचुअल फंड (एमएफ) उद्योग पर मॉर्निंगस्टार की हाल में आई रिपोर्ट में खर्च अनुपात पर कुछ अच्छी खबरें दी गई हैं तो कुछ बुरी खबरों का भी जिक्र है। अच्छी खबर यह है कि रिपोर्ट में शुल्क और खर्चों पर भारत का ग्रेड 2017 के 'औसत से नीचे' से ऊपर उठकर अब 'औसत' हो गया है। ग्रेड में सुधार इसलिए हुआ है क्योंकि नियामक ने सितंबर 2018 में खर्च अनुपात के नए दायरे तय कर दिए हैं। बुरी खबर यह है कि भारत में इक्विटी फंडों का ऐसेट-वेटेड मीडियन खर्च अनुपात 1.93 प्रतिशत है, जिनकी वजह से ये चौथे सबसे महंगे इक्विटी फंड बन गए हैं। ऐसे में निवेशकों को फंड हाउस के पास जा रहे खर्च अनुपात को लेकर खासा सतर्क रहने की जरूरत है। यह बात इसलिए भी अधिक अहम हो गई है क्योंकि ऐक्टिव फंडों को अपने बेंचमार्क सूचकांकों से बेहतर प्रदर्शन करने में बहुत दिक्कत आ रही है। लार्ज कैप फंडों को तो यह दिक्कत और भी ज्यादा है। पिछले पांच साल में 29 में से केवल 13 फंड यानी 44.8 प्रतिशत लार्ज-कैप फंड ही निफ्टी के कुल प्रतिफल सूचकांक से अधिक प्रतिफल दे पाए हैं।

 
भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) में पंजीकृत निवेश सलाहकार और फिडुशियरीज के संस्थापक अविनाश लूथरिया कहते हैं,'जिन फंडों का खर्च अनुपात बहुत अधिक होता है, उनका प्रदर्शन बेंचमार्क से बेहतर रहने का कोई सवाल ही नहीं है।' लिहाजा वह खर्च अनुपात को ध्यान में रखकर ही फंड चुनने की सलाह देते हैं। निवेशकों अगर ऊंचे खर्च अनुपात से बचना चाहत हैं तो वे रेग्युलर फंडों के बजाय डायरेक्ट फंडों की डगर भी पकड़ सकते हैं। मोबिक्विक में वेल्थ मैनेजमेंट प्रमुख कुणाल बजाज कहते हैं, 'खर्च अनुपात कितना अहम है, यह बात डायरेक्ट फंडों के अच्छे प्रदर्शन से साबित हो जाती है।' इसका उदाहरण इसी बात से मिल जाता है कि पिछले पांच साल में डायरेक्ट श्रेणी में सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले लार्ज फंड ऐक्सिस ब्लूचिप ने 13.30 प्रतिशत की सालाना चक्रवृद्घि दर से प्रतिफल दिया। इसके मुकाबले रेग्युलर फंड ने 11.93 प्रतिशत यानी 137 आधार अंक कम प्रतिफल दिया।
 
भारतीय बाजार की एक अच्छी बात यह है कि एक ही फंड में खुदरा निवेशक भी निवेश कर सकते हैं और संस्थागत निवेशक भी रकम लगा सकते हैं। संस्थागत निवेशक खर्च अनुपात पर बेहद पैनी नजर रखते हैं। लूथरिया कहते हैं, 'निफ्टी 50 एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ईटीएफ), लिक्विड फंड जैसी जिन श्रेणियों में संस्थागत निवेशक निवेश करते हैं, उनमें रकम लगाकर दूसरे निवेशक भी कम शुल्क का लाभ उठा सकते हैं। फंड हाउस बड़े संस्थागत निवेशकों को आकर्षित करने के इरादे से शुल्क कम रखते हैं।' 
 
अब वित्तीय योजनाकारों ने निवेशकों को अब सस्ते पैसिव फंडों में निवेश करने की सलाह देनी शुरू कर दी है। वे निवेशकों को लार्ज-कैप श्रेणी में पैसिव फंडों में 50 प्रतिशत आवंटन के साथ निवेश शुरू करने की सलाह दे रहे हैं। निफ्टी 50 बेंचमार्क वाले 13 ईटीएफ 10 या उससे भी कम आधार अंक के खर्च अनुपात के साथ उपलब्ध हैं। बजाज कहते हैं, 'हालांकि कम लागत वाले वैसे ईटीएफ में ही निवेश करें, जिनकी प्रबंधनाधीन परिसंपत्तियां खासी बढ़ चुकी हैं। सस्ते ईटीएफ पेश करने वाली कई फंड कंपनियां अब उन पर सब्सिडी दे रही हैं। अगर फंड के आकार में ठीकठाक बढ़ोतरी नहीं होती है तो आगे चलकर उन्हें अपना खर्च अनुपात बढ़ाने पर मजबूर होना पड़ सकता है।' खर्च अनुपात के अलावा उन फंडों पर भी नजर दौड़ाएं, जिनमें ट्रैकिंग एरर कम हो कारोबार की मात्रा ज्यादा हो।
 
पिछले कुछ साल में स्मार्ट बीटा फंड विकल्प बनकर उभरे हैं। डीएसपी इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स के अध्यक्ष कल्पेन पारेख कहते हैं, 'जब आप पैसिव फंड की तरफ बढ़ते हैं तो आप अल्फा का लाभ लेने की संभावना एकदम गंवा देते हैं। स्मार्ट-बीटा फंडों में अल्फा देने की क्षमता होती है और उनके खर्च अनुपात भी मध्यम दायरे में होते हैं।' सेक्टर फंडों में निवेश करने से पहले आपको जरूर सोचना चाहिए। इनमें दूसरे जोखिम तो होते ही हैं, खर्च अनुपात भी बहुत अधिक होते हैं। सेक्टर फंडों में खर्च अनुपात का औसत दायरा 2.13 से 2.74 प्रतिशत है और औसत 2.48 प्रतिशत है। इसके अलावा उन फंड कंपनियों से भी परहेज करें जो रातोरात खर्च अनुपात बढ़ा देती हैं और उन्हें लगता है कि ज्यादातर निवेशकों का ध्यान इस तरफ जाएगा ही नहीं। जिस फंड में आपने निवेश किया है, यदि उसमें भी ऐसा होता है तो हिसाब लगाकर देखिए कि फंड में निवेश बरकरार रखना आपके लिए ठीक है या नहीं।
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