बिजनेस स्टैंडर्ड - 6.1 फीसदी रहेगी आर्थिक वृद्घि दर
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6.1 फीसदी रहेगी आर्थिक वृद्घि दर

अभिषेक वाघमारे / नई दिल्ली October 04, 2019

अर्थव्यवस्था में गहराती मंदी को ध्यान में रखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने 2019-20 में आर्थिक वृद्घि का अपना अनुमान घटाकर 6.1 प्रतिशत कर दिया है। यदि ऐसा होता है तो चालू वित्त वर्ष में सकल घरेलू वृद्घि (जीडीपी) वर्ष 2012-13 के  बाद से सबसे कम होगी। इससे अल्पावधि में रोजगार सृजन और आय वृद्घि की रफ्तार प्रभावित हो सकती है। यह अगस्त की बैठक में जताए गए अनुमान से 80 आधार अंक कम है। इन दो बैठकों के बीच की अवधि में यानी अगस्त से लेकर अब तक वाहन बिक्री घटी है, प्रमुख क्षेत्र का उत्पादन कमजोर पड़ा है और सेवा उत्पादन में कमी आई है।
 
यदि हम पूरे दर कटौती चक्र को देखें तो पता चलता है कि लेकिन केंद्रीय बैंक के नजरिये में बदलाव स्पष्ट है। फरवरी से आठ महीनों के दौरान आरबीआई ने वृद्घि के अपने अनुमान को 7.4 प्रतिशत से 130 आधार अंक तक घटाकर मौजूदा समय में 6.1 प्रतिशत किया है। नीतिगत रीपो दर में इस अवधि में कुल 135 आधार अंक की कमी आई है।  आरबीआई का मानना है कि भारत की अर्थव्यवस्था वित्त वर्ष की दूसरी छमाही (अक्टूबर-मार्च) में 6.6-7.2 प्रतिशत के बीच बढ़ेगी। हाल में समाप्त सितंबर तिमाही में उसने अनुमान जताया था कि अर्थव्यवस्था 5.3 प्रतिशत की दर से बढ़ेगी। वृद्घि दर लगातार कमजोर पड़कर जून तिमाही में 5 प्रतिशत रह गई।
 
वित्त मंत्रालय द्वारा सुधार संबंधी उपायों (कॉरपोरेट कर दर में कटौती समेत) पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए एमपीसी ने कहा, 'जहां सरकार द्वारा घोषित ताजा उपायों से निजी खपत और निजी निवेश गतिविधि बढऩे की संभावना है, वहीं मंदी रोकने के निरंतर प्रयासों से वृद्घि की रफ्तार बढ़ाने में मदद मिलेगी।' समिति ने सरकार को संकेत दिया है कि मंदी से निपटने के लिए नीतिगत मोर्चे पर और कदम उठाने की जरूरत है। इसने कहा है, 'मुद्रास्फीति के लक्ष्य के दायरे में रहने की उम्मीद के साथ घरेलू मांग में सुधार के जरिये वृद्घि से जुड़ी चिंताएं दूर होने की संभावना है।'
 
आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि निर्माण गतिविधि में ठहराव के अलावा सेवा गतिविधियां भी जुलाई-अगस्त में कमजोर रहीं। हालांकि उन्होंने उन क्षेत्रों के बारे में भी जानकारी दी जिनमें भविष्य में सुधार आ सकता है। दास ने एक बयान में कहा, 'वर्ष 2019-20 में अब तक कंज्यूमर नॉन-ड्यूरेबल्स और इंटरमीडिएट उत्पादों ने लगातार वृद्घि दर्ज की है और ये वृद्घि के संभावित कारक के तौर पर उभरे हैं।' वहीं कृषि क्षेत्र की वृद्घि में सुधार आ सकता है, क्योंकि बांधों में पर्याप्त मात्रा में जल की उपलब्धता से रबी उत्पादन में मदद मिलेगी। 
 
विश्लेषकों ने वृद्घि दर में कमी को आरबीआई द्वारा गंभीर मंदी की स्पष्ट स्वीकारोक्ति करार दिया है और यह भी चेतावनी दी है कि वास्तविक वृद्घि इस संशोधित अनुमान से भी कम रह सकती है।  आरबीएल बैंक में अर्थशास्त्री रजनी ठाकुर ने कहा, 'यह स्पष्ट हो गया है कि वृद्घि को लेकर आशंका मौजूद है। सुधार एक धीमी प्रक्रिया है और किसी तरह का सकारात्मक बदलाव अगली दो-तीन तिमाहियों में दिखने के आसार नहीं हैं। जीडीपी वृद्घि के आगामी तिमाहियों में 6-6.5 प्रतिशत के दायरे में पहुंचने में सफल रहने और हालात में ठोस सुधार आया तो अगले वित्त वर्ष ही आंकड़ों में असर दिखने की संभावना है।' रेटिंग एजेंसी इक्रा का कहना है कि जीडीपी वृद्घि के अनुमान में बड़ी कटौती से तुरंत सुधार की सीमित संभावना का संकेत मिलता है। 
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