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कर संग्रह और कर जांच के बीच मजबूत दीवार की दरकार

दिल्ली डायरी
ए के भट्टाचार्य /  October 03, 2019

पिछले सप्ताह सरकार ने 15 वरिष्ठ कर अधिकारियों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति का पत्र थमा दिया। कुल मिलाकर ऐसे अधिकारियों की संख्या 60 हो गई है, जिन्हें सरकार ने अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी है। यह निर्णय फंडामेंटल रूल (एफआर) 56-जे के तहत लिया गया है। इस प्रावधान के तहत समूह ए, बी, सी के सरकारी अधिकारियों की सेवा शर्तों का उल्लेख है। आखिर एफआर 56-जे के तहत क्या व्यवस्था दी गई है? इस विशेष प्रावधान के तहत सरकार किसी भी सरकारी अधिकारी को तीन महीने का अग्रिम नोटिस देकर या तीन महीने के वेतन-भत्ते का भुगतान कर सेवामुक्त कर सकती है। हालांकि यह प्रावधान तीन शर्तों के  अधीन है। पहली शर्त के तहत सरकार तब यह कदम उठा सकती है जब उसे लगता है कि अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने का विकल्प लोक हित में है। 

 
दूसरी शर्त यह है कि अगर अधिकारी समूह 'ए' या 'बी' से ताल्लुक रखता है तो 50 साल उम्र पूरी करने के बाद उसे सेवानिवृत्ति दी जा सकती है। हालांकि यह तभी होगा जब संबंधित अधिकारी 35 साल की उम्र से पहले सेवा में आया है।  तीसरी शर्त के तहत सभी सेवाओं के दूसरे सभी समूहों के अधिकारियों को 55 साल उम्र पार करने के बाद सरकार अनिवार्य सेवानिवृत्ति का आदेश दे सकती है। उल्लेखनीय है कि एफआर 56-जे पिछले कई दशकों से सरकारी सेवा नियमों का हिस्सा रहा है, लेकिन हाल में ही इसका इस्तेमाल बढ़ गया है। वास्तव में समय पूर्व सेवानिवृत्ति पर कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की तरफ से जारी सभी परिपत्रों पर गौर करें तो 1989 से 2014 यानी 25 वर्षों के बीच सरकार ने एफआर 56-जे के प्रावधानों पर स्थिति स्पष्ट करने के लिए कोई अधिसूचना जारी नहीं की। दूसरी तरफ, इन प्रावधानों के संबंध में सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों के प्रभावों को स्पष्ट करने के लिए 1969 से 1989 के बीच एक दर्जन परिपत्र जारी हुए। 2014 से अब तक सरकार ने स्पष्टीकरण से संबंधित नौ परिपत्र जारी किए हैं।
 
एक और अहम बात यह है कि 2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने से कुछ महीने पहले यानी मार्च में एक परिपत्र जारी हुआ था। मार्च 2014 में जारी परिपत्र इसलिए भी अहम है कि इसमें दो खास परिस्थितियों का जिक्र किया गया था, जिनके तहत अनिवार्य सेवानिवृत्ति के संबंध में निर्णय लिया जा सकता है। परिपत्र में कहा गया है कि  संबंधित अधिकारियों के प्रदर्शन की समीक्षा उसके 50 या 55 साल पूरा करने से कम से कम छह महीने पहले शुरू होनी चाहिए। इसमें यह भी दोहराया गया है कि सरकार एफआर 56-जे के तहत उन अधिकारियों को अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्त कर सकती है जिनका आचार-व्यवहार संदेह के दायरे में रहा है या जिनकी शारीरिक क्षमता या कार्य कुशलता स्थापित मानकों पर खरा नहीं उतरती है। 
 
पिछले पांच वर्षों के दौरान मोदी सरकार ने समितियों के गठन और जिस तरह अनिवार्य सेवानिवृत्ति लागू की जा सकती है उसकी समीक्षा के लिए कई परिपत्र जारी किए हैं। हालांकि पिछले कुछ महीने के दौरान इस मसले पर गतिविधियां तेज हुई हैं और अब तक यह मोटे तौर पर केंद्रीय वित्त मंत्रालय के अधीन विभाग तक ही सीमित रही हैं। लिहाजा ऐसा प्रतीत होगा कि अनिवार्य सेवानिवृत्ति को लेकर सरकार की मुहिम भ्रष्ट कर अधिकारियों द्वारा प्रताडऩा से जुड़ी शिकायतों पर ही केंद्रित है। कुल मिलाकर यह कदम विभिन्न सरकारी विभागों के भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ मुहिम के लिए तैयार एक व्यापक नीति का हिस्सा लग रहा है। 
 
अधिकारियों की सेवानिवृत्ति से जुड़ा एक पक्ष यह भी है कि कराधान विभाग से भ्रष्ट लोगों को रवाना करने का लक्ष्य केवल अनिवार्य सेवानिवृत्ति से ही पूरा नहीं होने जा रहा है। अकुशल एवं अक्षम अधिकारियों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति थमाने से केवल तात्कालिक चिंताएं ही दूर होंगी। उस कुव्यवस्था से निपटने के लिए भी कदम उठाना लाजिमी है, जिसमें कर अधिकारी भ्रष्ट आचरण अपनाने और करदाताओं को परेशान करने के लिए लालायित रहते हैं। अब समय आ गया है जब कर विभाग को करदाताओं के लिए अधिक सहज बनाने के लिए एक व्यापक रणनीति तैयार करनी चाहिए। डिजिटल माध्यम की मदद से इस दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है। हालांकि सर्वाधिक बुनियादी एवं प्रभावी उपाय यह होगा कि जांच करने वाले और कर संग्रह के लिए उत्तरदायी अधिकारी के बीच एक अभेद्य दीवार खड़ी की जाए। कर विभाग की जांच शाखा को अपने बल पर काम करना चाहिए और सरकार के राजस्व संग्रह लक्ष्य से इसका कोई लेना-देना नहीं होना चाहिए। 
 
उत्तरदायित्वों के मौजूदा विभाजन से कोई अपेक्षित नतीजा सामने नहीं आया है। अगर आयुक्त स्तर के 60 अधिकारी कुछ महीने में ही अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्त किए गए हैं तो इसका सीधा मतलब है कि खामी छोटी-मोटी नहीं है। इसके लिए राजस्व विभाग की संगठनात्मक संरचना में अधिक बदलाव की जरूरत है। वास्तव में जांच शाखा को राजस्व विभाग से निकालकर इसे वित्त मंत्रालय में किसी दूसरे विभाग का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। 
Keyword: retirement, narendra modi, revenue,,
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