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कारोबारियों के बीच भरोसा पैदा करे सरकार

दिलाशा सेठ, शाइन जैकब और इंदिवजल धस्माना / नई दिल्ली October 03, 2019

भारतीय उद्योग को लगता है कि देश में आर्थिक मंदी की समस्या तब तक बनी रहेगी, जब तक कि निवेशकों और उपभोक्ताओं में विश्वास पैदा करने जैसे प्रमुख मुद्दों का हल न खोजा जाए। गुरुवार को भारतीय आर्थिक शिखर सम्मेलन में उद्योग के प्रतिनिधियों ने उपभोक्ता मांग को पूरा करने के लिए व्यक्तिगत आयकर दरों में कटौती जैसे अन्य उपायों की भी मांग की। सरकारी अधिकारियों का कहना है कि हाल ही में घोषित किए गए अन्य उपायों के बाद अर्थव्यवस्था में सुधार होगा। विश्व आर्थिक मंच और भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) द्वारा आयोजित कराए गए कार्यक्रम में एसआरईआई के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक हेमंत कनोडिय़ा ने कहा, 'सरकार बहुत से प्रयास कर रही है लेकिन जमीनी स्तर पर कुछ और कदम उठाने की आवश्यकता है।'
 
उन्होंने कहा कि बैंक ऋण देने से डरते हैं क्योंकि किसी परियोजना के गलत होने पर उन्हें जवाब देना पड़ता है। कनोडिय़ा ने कहा, 'निवेशक भी सतर्क हैं क्योंकि जांच एजेंसियों द्वारा जटिल जीएसटी तथा आयकर कानूनों के तहत जांच की जा सकती है।' दूसरी ओर, नौकरियों में अनिश्चितता की खबरों के चलते ग्राहक खर्च नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा, 'जब तक इन मुद्दों को हल नहीं किया जाता है, तब तक अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करना मुश्किल होगा। अगर इन मुद्दों पर ध्यान दिया जाता है, तो आर्थिक सुस्ती दूर करना कठिन नहीं होगा।' कंज्यूमर यूनिटी ऐंड ट्रस्ट सोसाइटी (सीयूटीएस) के महासचिव प्रदीप मेहता ने कहा कि मोदी सरकार 2.0 के पास अच्छे वित्तीय सलाहकार नहीं हैं। उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं है कि लोग खर्च नहीं कर रहे हैं, हालांकि वे टिकाऊ उपभोक्ता वस्तुएं नहीं खरीद रहे हैं।
 
गोदरेज ग्रुप के अध्यक्ष आदि गोदरेज ने कहा कि सरकार को उद्योग को और अधिक प्रोत्साहन देना चाहिए और अर्थव्यवस्था की धीमी विकास दर को बढ़ावा देने के लिए व्यक्तिगत आयकर दरों को कम करना चाहिए, भले ही ये राजकोषीय घाटे को बढ़ाएं। उन्होंने कहा कि यह बताना मुश्किल है कि त्योहारी सीजन खत्म होने तक अर्थव्यवस्था में मांग बढ़ रही है या नहीं। उन्होंने कहा, 'लेकिन मेरा मानना है कि हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वित्तीय वर्ष की दूसरी छमाही बेहतर रहे, जिसके लिए अधिक प्रोत्साहन देने की आवश्यकता है। ये उपाय व्यक्तिगत आयकर और अन्य मुद्दों के स्तर पर होने चाहिए।'
 
रीन्यू पावर के मुख्य प्रबंध निदेशक सुमंत सिन्हा ने कहा कि भले ही सरकार ने कॉरपोरेट कर की दरों में कटौती की घोषणा कर दी है लेकिन अभी भी और काम करने की आवश्यकता है।  वह कहते हैं, 'वर्ष 2019-20 की पहली तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर 5 प्रतिशत रही है और यह बिल्कुल साफ है कि अर्थव्यवस्था में मंदी का दौर है। सरकार अर्थव्यवस्था को उबारने और इसे वापस 7-8 प्रतिशत पर लाने के भरकस प्रयास कर रही है। फिलहाल उठाए गए कदमों से वास्तव में मदद मिलेगी। मेरा मानना है कि वैश्विक गिरावट से ही समस्या खड़ी होगी।'
 
डेलॉयट इंडिया में पार्टनर (कंज्यूमर डिविजन) अनिल तलरेज मानते हैं कि फिलहाल मंदी जैसा कोई दौर नहीं है। वह कहते हैं, 'ऑटो सेक्टर की खबरोंके कारण एक शांत माहौल जैसा समय था लेकिन सरकार द्वारा सुधार उपायों के बाद अर्थव्यवस्था में सुधार हुआ है।' नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने कहा कि आने वाले समय में सरकार द्वारा अर्थव्यवस्था को उच्च विकास पथ पर ले जाने के लिए कई और संरचनात्मक सुधार किए जाएंगे। कार्यक्रम के दौरान एक पैनल परिचर्चा में उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि कई और संरचनात्मक सुधार आने वाले हैं। सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र में विनिवेश पर जोर दिया है। मैं बता सकता हूं कि हमने परिसंपत्ति मुद्रीकरण के लिए बहुत बड़े पैमाने पर जोर दिया है। हमारा मानना ​​है कि ग्रीन-फील्ड परियोजनाओं के बजाय निवेशकों को ब्राउन-फील्ड परियोजनाओं में आना चाहिए।' कांत ने यह भी कहा कि सरकार को सुविधा प्रदाता और उत्प्रेरक होना चाहिए तथा खुद को कारोबार से बाहर रखना चाहिए। 
 
उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग के सचिव गुरुप्रसाद महापात्र बताते हैं कि सरकार द्वारा मजबूत नीतियों और सकारात्मक माहौल के चलते वर्ष 2024 तक भारत 5 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य पूरा कर लेगा। उन्होंने कहा, 'हमने भारत को वर्ष 2024 तक 5 लाख करोड़ डॉलर और 2030 तक 10 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है।' 
Keyword: WEF, india, income tax, GST,,
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