बिजनेस स्टैंडर्ड - चीन की जगह ले सकता है भारत
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Wednesday, December 11, 2019 07:56 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम जिरह खबर

चीन की जगह ले सकता है भारत

दिलाशा सेठ / नई दिल्ली 10 03, 2019

भारत आर्थिक मंच

बिजनेस स्टैंडर्ड चीन की जगह ले सकता है भारतअमेरिका के वाणिज्य मंत्री विल्बर रॉस ने आज कहा कि भारत के पास चीन और अमेरिका के बीच चल रहे व्यापार युद्ध का फायदा उठाने का बेहतरीन मौका है। उन्होंने यह बात ऐसे समय कही है जब भारत और अमेरिका एक व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। रॉस ने विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) और सीआईआई द्वारा आयोजित इंडिया इकनॉमिक समिट में कहा कि अमेरिका में भारत को वह मौका देगा जो अब तक चीन के पास था। यानी भारत अमेरिका को वे चीजें निर्यात कर सकेगा जो अब तक चीन करता था। इस दौरान वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल भी मौजूद थे। 

अमेरिकी मंत्री ने कहा, 'भारत के पास दूसरी जगह चल रहे व्यापार विवाद का फायदा उठाने का सही मौका है। गोयल के साथ बैठक में हमने उन क्षेत्रों की एक रूपरेखा तैयार की है जहां भारत की तुलना में चीन हमें ज्यादा निर्यात करता है और इसका क्या समाधान हो सकता है और हम इसे कैसे बदल सकते हैं।' प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हाल की अमेरिका यात्रा के दौरान इस तरह की अटकलें थी कि दोनों देशों के बीच एक सीमित व्यापार समझौता हो सकता है। लेकिन रॉस ने इसे खारिज करते हुए कहा कि दोनों देश जल्दी ही एक समझौते पर हस्ताक्षर कर सकते हैं। उन्होंने कहा, 'किसी भी सरकार ने यह नहीं कहा कि पांच मिनट में एक व्यापार समझौता होगा। हमने ऐसा नहीं कहा और न ही गोयल ने ऐसा कहा। मुझे लगता है कि यह केवल अटकलबाजी थी। हमें लगता है कि ऐसे कोई कारण नहीं है जिससे जल्दी समझौता न हो। हम एकदूसरे की समस्याओं को अच्छी तरह जानते हैं।'

अमेरिका भारत में अपने कृषि और विनिर्माण उत्पादों, दुग्ध उत्पादों और चिकित्सा उपकरणों के लिए व्यापक बाजार पहुंच चाहता है। साथ ही वह कुछ आईसीटी उत्पादों में आयात शुल्क में कमी की भी मांग कर रहा है। उन्होंने कहा कि अमेरिका भारत के साथ व्यापार घाटे को कम करना चाहता है जो संरक्षणवाद और कृत्रिम बाधाओं के कारण बढ़ा है। अमेरिकी मंत्री ने कहा कि मोटरसाइकिलों पर आयात शुल्क कम करने और चिकित्सा उपकरणों पर मूल्य नियंत्रण हटाने की मांग का मकसद अनुचित व्यापार व्यवस्थाओं से निपटना है। 

भारत और अमेरिका के व्यापारिक रिश्तों में जून में उस समय तनातनी बढ़ गई थी जब अमेरिका ने भारत से निर्यात होने वाले 5.6 अरब डॉलर के सामान को शुल्क मुक्त श्रेणी से बाहर कर दिया था। भारत ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए अमेरिका से आयात होने वाले 29 उत्पादों पर आयात शुल्क बढ़ा दिया था। 2018-19 में अमेरिका को भारत का निर्यात 52.4 अरब डॉलर का था जबकि आयात 35.5 अरब डॉलर था। भारत के साथ अमेरिका का व्यापार घाटा 2017-18 में  21.3 अरब डॉलर था जो 2018-19 में घटकर 16.9 अरब डॉलर रह गया। 

रॉस ने कहा कि भारत के साथ जल्दी से जल्दी व्यापार समझौतों को अंतिम रूप देने की जरूरत है।  हालांकि गोयल ने कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापार समझौता इस बात पर निर्भर करेगा कि वे इसे कितना समय देते हैं। उन्होंने कहा, 'यह इस बात पर निर्भर करता है कि दोनों देश बातचीत को कितना समय देते हैं। लेकिन मुझे ऐसी कोई बड़ी वजह नहीं दिखती है जिसके कारण यह आगे न बढ़ सके।'
Keyword: india, america, china, economy, WEF,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या राजकोषीय घाटे का लक्ष्य चूक जाएगी सरकार?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.