बिजनेस स्टैंडर्ड - गांधी की विरासत पर सियासत
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गांधी की विरासत पर सियासत

एजेंसियां /  October 02, 2019

महात्मा गांधी के गरिमापूर्ण एवं अनुकरणीय जीवन से जुड़े प्रसंगों एवं उनके लिखे एवं बोले गए शब्दों की अहमियत को उद्घाटित करने वाले हजारों कार्यक्रम बुधवार को उनकी 150वीं जयंती पर आयोजित किए गए जिनमें लाखों लोगों ने शिरकत कर मानवता की सेवा में उनके अविस्मरणीय योगदान को रेखांकित किया। इस यादगार मौके पर समाज एवं शासन के हरेक तबके ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को भावप्रवण श्रद्धांजलि देने के साथ ही उनकी विरासत से अपना नाता भी जोडऩे की कोशिश की। हर छोटे-बड़े गांव, कस्बे एवं शहर में गांधी जयंती पर पदयात्राएं एवं कार्यक्रम आयोजित किए गए। सोशल मीडिया पर भी महात्मा गांधी की मौजूदा दौर में प्रासंगिकता को लेकर काफी चर्चा देखी गई।
 
खासकर सियासी दलों के बीच बापू को अपना बताने की छटपटाहट अधिक नजर आई। इनमें सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से लेकर खुद को महात्मा गांधी का राजनीतिक उत्तराधिकारी मानने वाली कांग्रेस भी इस गहमागहमी का हिस्सा बनी। भारत को अंग्रेजों की गुलामी से आजाद करवाने में बापू के योगदान के अलावा भारतीय जनमानस पर उनके दीर्घकालिक प्रभाव की भी सबने अपने-अपने ढंग से व्याख्या करने की कोशिश की। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, उप राष्ट्रपति वेंकैया नायडू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुआई में कृतज्ञ राष्ट्र ने बापू की समाधि राजघाट पर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए। प्रधानमंत्री मोदी ने इस मौके पर अमेरिकी समाचारपत्र न्यूयॉर्क टाइम्स में प्रकाशित अपने विशेष लेख 'व्हाई इंडिया ऐंड वल्र्ड नीड गांधी' में 'आइंस्टीन चैलेंज' पेश करते हुए कहा, 'आखिर हम किस तरह यह सुनिश्चित करेंगे कि भावी पीढिय़ां गांधी के आदर्शों को याद करे? मैं चिंतकों, उद्यमियों और तकनीकी गुरुओं को आमंत्रित करता हूं कि वे नवाचार के माध्यम से गांधी के विचारों को प्रसारित करने के लिए आगे आएं।'
 
इसके पहले मोदी ने ट्विटर पर एक संक्षिप्त वीडियो जारी कर महात्मा गांधी के सपनों का भारत बनाने का आह्वïान करते हुए कहा, 'विश्व समुदाय के लिए शांति अब भी प्रासंगिक बनी हुई है।' प्रधानमंत्री मोदी ने वर्षों तक महात्मा गांधी की कर्मभूमि रहे साबरमती आश्रम भी जाकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। साबरमती आश्रम जाने के पहले मोदी ने अहमदाबाद में एक सभा को संबोधित करते हुए कहा कि हाल ही में संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक में भी बार-बार गांधी जी का जिक्र आता रहा और वह आगे भी सबके बीच मौजूद रहेंगे।
 
गांधी जयंती के अवसर पर स्वच्छता अभियान चलाने और खुले में शौच से मुक्ति के अलावा एकल उपयोग वाले प्लास्टिक से जुड़े खतरों के प्रति आगाह करने वाले कार्यक्रम भी आयोजित किए गए। हालांकि राजनीतिक स्तर पर अधिक गोलबंदी नजर आई। भाजपा और कांग्रेस दोनों ने ही गांधी के विचारों को लेकर आम लोगों तक पहुंचने की कोशिश में कई जगह मार्च आयोजित किए। भाजपा अध्यक्ष एवं केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने बापू की 150वीं जयंती पर चार माह चलने वाले विशेष अभियान की शुरुआत की जिसमें पार्टी नेता देश भर में भ्रमण कर महात्मा गांधी के विचारों को प्रसारित करने का काम करेंगे। इस मौके पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दिल्ली कैंट में बापू की एक प्रतिमा का अनावरण भी किया।
 
भाजपा के वैचारिक संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने अपने एक लेख में महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि गांधी ने स्वदेशी एवं आत्मनिर्भरता पर बल दिया था लेकिन छोटी सोच वाले लोगों ने पश्चिमी मूल्यों पर आधारित मॉडल को आदर्श मानकर अपने सम्मान एवं गौरव को कमतर बनाने का काम किया है। उन्होंने गांधी के एक लेख का हवाला देते हुए कहा कि वह विभाजन के समय स्वयंसेवकों के कार्य से काफी खुश हुए थे। दूसरी तरफ आम चुनाव में करारी शिकस्त के बाद से ही शांत पड़ी हुई कांग्रेस ने गांधी जयंती पर कुछ सक्रियता दिखाई। पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी ने पिछले कुछ वर्षों में हुई देश की बदहाली के लिए भाजपा सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि बापू को यह देखकर गहरी पीड़ा होती। पूर्व पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी ने राजघाट तक कार्यकर्ताओं के एक जुलूस की अगुआई की जबकि उनकी बहन एवं पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा भी लखनऊ में सड़क पर उतरीं। कांग्रेस ने जहां इसे गांधी संदेश यात्रा का नाम दिया तो भाजपा ने इसे संकल्प यात्रा का नाम दिया है।
 
महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के मौके पर केंद्र सरकार के तमाम मंत्रालयों एवं विभागों के अलावा राज्य सरकारों ने भी कार्यक्रम एवं श्रद्धांजलि सभाएं आयोजित कीं। खास तौर पर गांधी के जीवन से जुड़े स्थानों पर विशेष सक्रियता देखी गई। साबरमती आश्रम के अलावा नमक सत्याग्रह के केंद्र में रहे दांडी में भी विशेष अभियान चलाया गया। मुंबई के मणि भवन में चरखा कताई और गांधी के प्रिय भजनों का गायन भी हुआ। 
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