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ज्यादा ब्याज के कारण सहकारी बैंकों का रुख करते हैं ग्राहक

अनूप रॉय और निधि राय /  October 02, 2019

एक के बाद एक सहकारी बैंक संकट में फंसते जा रहे हैं लेकिन इसके बावजूद जमाकर्ताओं का इन बैंकों पर भरोसा बरकरार है। इसकी कई वजह हो सकती हैं लेकिन एक मुख्य कारण यह है कि सहकारी बैंक अधिक ब्याज देते हैं। खासकर वरिष्ठ नागरिकों के मामले में यह बात एकदम सही है जो अपने जीवनभर की कमाई सहकारी बैंकों में रखना पसंद करते हैं। ईवाई में वित्तीय सेवाओं के प्रमुख अबिजेर दीवानजी ने कहा, 'ब्याज पर निर्भर रहने वाले सेवानिवृत्त और बुजुर्ग अपना पैसा सहकारी बैंकों में रखते हैं क्योंकि वे ज्यादा ब्याज देते हैं।' न केवल वरिष्ठ नागरिक बल्कि दूसरे लोग भी ऊंची ब्याज दर के कारण अपना पैसा सहकारी बैंकों में रखते हैं। ये बैंक अन्य बैंकों से 0.5 से एक फीसदी तक ज्यादा ब्याज देते हैं। पंजाब एवं महाराष्ट्र सहकारी (पीएमसी) बैंक में पैसा जमा कराने के पीछे यही मुख्य वजह थी। सीमा कपूर के पीएमसी बैंक की बांद्रा-पश्चिम शाखा में दो खाते हैं। उन्होंने कहा, 'मेरे इस बैंक में पैसे रखने के पीछे यही वजह थी कि यह मुझे मेरी राशि पर एक फीसदी अतिरिक्त ब्याज देता था।'

 
दीवानजी के मुताबिक जमाकर्ताओं के लिए यह बात मायने रखती है कि ये बैंक भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा विनियमित होते हैं और वे मानते हैं कि ये बैंक कभी नाकाम नहीं होंगे। उन्होंने कहा, 'लेकिन लोग यह नहीं समझते कि यह विनियमन मामूली है। सहकारी बैंकों की उतनी जांच पड़ताल नहीं होती है जितनी कि बैंकों या गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनएफसी) की होती है। बैंक और एनएफसी आरबीआई के सीधे नियंत्रण में रहते हैं।' दीवानजी ने कहा कि पीएमसी बैंक संकट ने इस तथ्य की तरफ भी लोगों का ध्यान खींचा है कि सहकारी बैंकों के लिए कोई एकल उधारकर्ता सीमा निर्धारित नहीं है जो स्थिरता के लिहाज से जोखिमभरा है। इसके अलावा महाराष्ट्र जैसे राज्यों में हाउसिंग सोसाइटियों के लिए अपना खाता सहकारी बैंकों में ही खोलना अनिवार्य है। हालांकि इस नियम में ढील दी गई है और हाउसिंग सोसाइटियों को वाणिज्यिक बैंकों में भी खाता खोलने की अनुमति दी गई है। अब तक हाउसिंग सोसाइटियों के सहकारी बैंकों में जमा राशि को निकालने और दूसरे बैंकों में जमा करने की कोई मजबूरी नहीं थी लेकिन पीएमसी बैंक संकट के बाद जमाकर्ता उलझन में पड़ गए हैं। रियल एस्टेट कंपनी हाउसिंग डेवलपमेंट ऐंड इन्फ्रास्ट्रक्चर (एचडीआईएल) को ऋण देने में धोखाधड़ी के कारण पीएमसी बैंक सुर्खियों में आया है। 
 
पीएमसी बैंक ज्यादा देर तक काम करता था। इसकी कई शाखाएं शाम में खुली रहती थीं और रविवार को भी खुलती थीं। जमाकर्ताओं के लिए यह सुखद स्थिति थी। बैंक में चार खाते रखने वाली कावेरी चड्ढा ने कहा, 'बैंक मेरे घर के पास है और रविवार को खुला रहता है। इसके अलावा यह रात आठ बजे तक खुला रहता है। मेरे जैसी कामकाजी महिला के लिए यह बहुत सुविधाजनक है। इतना ही नहीं मुझे एक फीसदी अतिरिक्त ब्याज भी मिलता है।' ग्राहक सेवा और कई पीढिय़ों से चला आ रहे संबंध भी इसकी लोकप्रियता की वजह हैं। हरप्रीत सिंह गुलेरिया के पीएमसी बैंक में पांच खाते हैं। उन्होंने कहा, मेरे माता-पिता ने 35 साल पहले खाते खुलवाए थे और हमने इस लंबे संबंधों को जारी रखा है। साथ ही कई अन्य कारण भी है जिनकी वजह से जमाकर्ता वाणिज्यिक बैंकों के बजाय सहकारी बैंकों को वरीयता देते हैं। कुछ राज्य निचले स्तर के कर्मचारियों और शिक्षकों को भी सहकारी बैंकों के जरिये भुगतान करते हैं।
 
संबंधों की भी अहम भूमिका है। सहकारी बैंकों का सीमित दायरा होता है और वे अपने ग्राहकों को बहुत अच्छी तरह जानते हैं। अक्सर प्रबंधक अपने दोस्तों और परिजनों को बैंक में खाता खोलने के लिए प्रेरित करते हैं और इसी तरह बैंक का कारोबार चलता है। किसी खास स्थान के साथ जुड़ाव लोगों को बैंक के साथ पहचान का आभास कराता है और इसी से कारोबार होता है। बैंकों की तुलना में सहकारी बैंकों में अपने ग्राहक को जाने (केवाईसी) के नियम सरल होते हैं और इस बात की एक अलिखित गारंटी होती है कि जमाकर्ता को जरूरत के समय ऋण मिलेगा।
 
साथ ही कई स्थानीय कारक भी होते हैं। खासकर गांवों में कृषि या पेशा आधारित सहकारी संस्थाओं में लोग पैसा रखते हैं क्योंकि इन बैंकों का गठन खुद उन्होंने या उनके पूर्वजों ने किया है। कई बार स्थानीय नेता भी जमा पर मौखिक गारंटी देते हैं और ज्यादातर समय अपने वादे पर खरा उतरते हैं जिससे ग्राहकों का भरोसा बढ़ता है। एक वरिष्ठ सलाहकार ने नाम न आने की शर्त पर कहा, 'नेता भी सहकारी बैंक चलाते हैं और उनके आश्वासन पर लोग इनमें अपना पैसा रखते हैं। लेकिन यह बात तभी तक जारी रह सकती है जब तक बैंक का आकार छोटा रहता है। लेकिन आकार बढऩे पर बैंक का राजनीतिक संबंध गड़बड़ होने लगता है और नेता अपनी गतिविधियों के लिए बैंक का इस्तेमाल करना छोड़ देते हैं।'
Keyword: PMC, RBI, bank, UCB,,
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