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भविष्य में सतर्कता बरतने की जरूरत

अभिजित लेले /  October 02, 2019

यह कहना गलत नहीं होगा कि महाराष्ट्र ऐंड पंजाब को-ऑपरेटिव बैंक (पीएमसी) में अनियमितता और धांधली भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की नाक के नीचे हुई है। हालांकि शहरी सहकारी बैंक (यूसीबी) के लिए वृहद स्तर पर नियामकीय ढांचे के प्रारूप के संबंध में केंद्रीय बैंक के नियमन के उपायों पर सवाल नहीं उठाया जा सकता। आर गांधी (आरबीआई के पूर्व गवर्नर) समिति की रिपोर्ट (2015) में शहरी सहकारी बैंकों को लेकर सटीक आकलन किया गया था, खासकर निदेशक मंडल की स्थापना के साथ बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट (बीओएम) के गठन की सिफारिश सराहनीय थी। इस तरह, समिति ने नए शहरी सरकारी बैंकों को लाइसेंस आवंटित करने पर गठित वाई एच मालेगाम समिति (2010) की सिफारिशों को भी अपना समर्थन दे दिया। 

 
इस बारे में एक बैंकर ने कहा, 'बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट का गठन इस मानसिकता को दूर करना था कि व्यावसायिक बैंकों की तरह शहरी सहकारी बैंकों पर आरबीआई का समान अधिकार नहीं है।' परिचालन के स्तर पर बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट और निदेशक मंडल के बीच संबंध निगरानी मंडल और कार्यकारी बोर्ड जैसा ही है। निदेशक मंडल पर रणनीति बनाने का उत्तरदायित्व होगा, जबकि बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट पर यूसीबी के रोजमर्रा के परिचालन नियंत्रण और उपयुक्त निर्देश देने की जिम्मेदारी होगी।  ऐसा कहा गया कि नई व्यवस्था के तहत केंद्रीय बैंक के पास शहरी सरकारी बैंकों, उनके बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट और मुख्य कार्याधिकारी (सीईओ) पर उसी तरह नियंत्रण रखेगा जैसे यह किसी व्यावसायिक बैंकों के मामले में रखता है। ऐसा महसूस किया गया कि ये अधिकार मौजूदा सांविधिक ढांचे से प्राप्त नहीं किए जा सकते और नए शहरी सहकारी बैंकों को लाइसेंस देने के लिए एक अनिवार्य शर्त बनानी चाहिए, जिसे कानूनी रूप से लागू किया जा सकेगा। अब सवाल उठता है कि पीएमसी बैंक कांड के बाद हम कहां खड़े हैं? 
 
इसके लिए हमें इतिहास में जाना होगा और उन बातों पर दोबारा गौर करना होगा, जो शहरी सरकारी बैंकों पर 31वीं स्थायी समिति ने अक्टूबर 2014 में हुई बैठक में कही थी। एक राय यह दी गई कि 2005 में प्रकाशित आरबीआई के दृष्टिकोण पत्र पर, खासकर शहरी सरकारी बैंक के संदर्भ में, विचार करना चाहिए। ऐसा पाया गया कि बड़े यूसीबी (पीएमसी बैंक के संदर्भ में) बिना पुख्ता नियामकीय दायरे और निगरानी में आए व्यावसायिक बैंकों की तरह कारोबार करना चाहते हैं। आरबीआई के पास कानूनी अधिकार और समाधान विकल्प सीमित होने के मद्देनजर इस बात पर विचार करना होगा कि यूसीबी को खुली छूट दिया जाना जमाकर्ताओं (डिपॉजिटर) के हित में होगा या नहीं। यह भी महसूस किया गया कि लाइसेंस आवंटित करने के उपुयक्त समय और उन्हें आगे बढ़ाने के ढांचे के संबंध में मालेगाम समिति की सिफारिशों की आगे और समीक्षा की जरूरत है।  
Keyword: PMC, RBI, bank,,
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