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प्लास्टिक से लड़ाई में आईटीसी का दांव

विवेट सुजन पिंटो /  October 02, 2019

मुंबई के निकट पालघर में शक्ति प्लास्टिक इंडस्ट्रीज के कैंपस में इधर उधर बिखरे कचरे के कारण यह कबाडख़ाना जैसा दिख रहा है। श्रमिक इस कचरे के माध्यम से मल्टीलेयर प्लास्टिक (एमएलपी) जैसे भोजन और चॉकलेट के रैपर, चिप्स, बिस्किट और स्नैक्स के पैकेट आदि खोज रहे हैं जिससे उनको रीसाइकिल किया जा सके। एफएमसीजी क्षेत्र की प्रमुख कंपनी आईटीसी ने पुणे में देश का पहला एमएलपी संग्रहण और रीसाइक्लिंग अभियान शुरू किया है जिसके एक सिरे पर कूड़ा इकट्टठा करने वाले हैं तो दूसरे छोर पर शक्ति प्लास्टिक जैसी रीसाइक्लिंग कंपनियां, जो प्लास्टिक कचरा प्रबंधन सुनिश्चित कर रही हैं। 

 
आईटीसी में ईएचएस ऐंड क्वालिटी एश्योरेंस प्रमुख चितरंजन दर के अनुसार कंपनी बेंगलूरु और हैदराबाद जैसे दूसरे शहरों में भी इस तरह का कार्यक्रम शुरू करने की योजना बना रही है। इस परियोजना की महत्ता इस बात से लगाई जा सकती है कि एमएलपी को रीसाइकिल करना काफी जटिल काम है और कंपनियां, ग्राहकों तथा नीतिनिर्माताओं के लिए यह बड़ा चुनौती था। पैकेट बंद खाना बनाने वाली कंपनियों समेत विभिन्न उद्योगों का कहना है कि फिलहाल एमएलपी की जगह कुछ और उपयोग में नहीं लाया जा सकता। इसे प्लास्टिक की बहुत सी परतें और एल्युमीनियम फॉइल, पेपर तथा पेपर बोर्ड जैसे सामान के मिश्रण से तैयार किया जाता है। 
 
ये बहुत सी परतें खाने को खराब होने से बचाती हैं और परिवहन तथा भंडारण में सहूलियत देती है। खाद्य कंपनियों का कहना है कि इन सुविधाओं के चलते आज के समय में लोगों तक पैकेट वाला खाना पहुंचाने का सबसे बेहतर माध्यम एमएलपी ही है। हालांकि कूड़ा इकट्ठा करने वाले आमतौर पर इस कूड़े के साथ साथ नालियों में बह रहे कूड़े और सीवेज कैनाल वाले कूड़े को नहीं उठाते। कुछ मामलों में इस अपशिष्ट को सीमेंट के भ_े पर ले जाकर जीवाश्म ईंधन (जैसे कोयला) के रूप में जलाया जाता है और सड़क निर्माण के लिए तारकोल के साथ मिलाया जाता है। 
 
शक्ति प्लास्टिक इंडस्ट्रीज के निदेशक राहुल पोद्दार बताते हैं कि एमएलपी को सीमेंट के भट्टों पर भेजना इसके निपटान का आसान विकल्प हो सकता है लेकिन इससे कोई आर्थिक लाभ नहीं होता क्योंकि रीसाइक्लिंग करने वालों को अपने खर्चे पर इसे वहां तक ले जाना पड़ता है।  आईटीसी सबसे पहले कूड़ा इकट्ठा करने वालों से एमएलपी कचरा खरीदती है और फिर इनकी छंटनी तथा वर्गीकरण करने के बाद शक्ति प्लास्टिक जैसे रीसाइक्लर को भेज देती है। दर बताते हैं कि आईटीसी की रीसाइक्लिंग इकाई में तकनीक की सहायता से एमएलपी कचरे को प्लास्टिक पैलेट में बदला जाता है जिसका उपयोग रोजमर्रा के सामान, जैसे प्लास्टिक की कुर्सी, स्टूल, फाइलें, क्लिप, बाल्टियां आदि बनाने में किया जाता है। 
 
वह कहते हैं, 'यह प्लास्टिक कचरा प्रबंधन का बेहतर उपाय है।' विशेषज्ञ कहते हैं कि जैसे-जैसे प्लास्टिक कचरा प्रबंधन गति पकड़ेगा, दूसरी कंपनियां भी इस काम को शुरू कर सकती हैं। फिलहाल भारत की अधिकांश पैकेज्ड फूड बनाने वाली कंपनियां  विस्तारित उत्पादक जिम्मेदारी (ईपीआर) कार्यक्रम के तहत प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन से निपटती हैं। यह सुनिश्चित करता है कि कंपनियां अपने उत्पाद के जरिये पैदा किए गए प्लास्टिक को एनजीओ तथा कचरा प्रबंधन इकाइयों की मदद से वापस इक_ा करें और बाद में उसे जलाकर या रीसाइकिल करके इसका निपटान करें। हिंदुस्तान यूनिलीवर, नेस्ले और आईटीसी जैसी कई बड़ी कंपनियां प्लास्टिक कचरा प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए अगले कुछ वर्षों में रीसाइकिल होने योग्य प्लास्टिक विकसित करने पर काम कर रही हैं।
Keyword: plastic waste management, company, ITC,,
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