बिजनेस स्टैंडर्ड - पोर्टफोलियो में सोने का हिस्सा 15 फीसदी हो
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Sunday, December 08, 2019 04:50 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम निवेश खबर

पोर्टफोलियो में सोने का हिस्सा 15 फीसदी हो

राजेश भयानी / मुंबई October 02, 2019

विशेषज्ञ यह स्वीकार करते हैं कि शेयर और सोना लंबी अवधि में सबसे अधिक प्रतिफल देने वाली परिसंपत्तियां हैं। ये विशेषज्ञ पिछले कुछ ïवर्षों के दौरान सोने का प्रदर्शन कमजोर रहने के बावजूद निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो में इस पीली धातु की हिस्सेदारी बढ़ाने की सलाह दे रहे हैं। बीते वर्षों में विशेष रूप से वर्ष 2013 के बाद सोने की चमक फीकी पड़ी है। उस समय सरकार ने शुल्क बढ़ाकर और आयात पर अंकुश लगाकर खरीदारी को हतोत्साहित किया था जिससे सोना अपने सबसे ऊंचे स्तर से लुढ़कने लगा था। उस अवधि में शेयरों ने अच्छा प्रदर्शन किया। रियल एस्टेट भी एक अन्य महत्त्वपूर्ण परिसंपत्ति वर्ग है, लेकिन यह बहुत से नियमों, करों और  परिसंपत्ति को बेचना आसान नहीं होने के कारण कमजोर बना हुआ है। इसके अलावा रियल एस्टेट के लंबी अवधि के प्रतिफल के आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं और न ही यह प्रतिफल पूरे देश में एकसमान है।  करीब चार दशक से सेंसेक्स के आंकड़े उपलब्ध हैं और इस दौरान शेयरों ने अच्छा प्रतिफल दिया है। हालांकि ऐसा लगता है कि बाजार का नियमन बेहतर होने और ज्यादा पारदर्शी, नियमों का पालन करने वाला और परिपक्व बनने से प्रतिफल कुछ कम हो रहा है। यह 20वीं सदी के अंतिम दो दशकों में 19-20 फीसदी था, जो 21वीं सदी के पहले और दूसरे दशकों में क्रमश: 12.5 फीसदी और 9.5 फीसदी रहा है। 
 
पिछले एक दशक में सोने का प्रतिफल शेयरों से अधिक रहा है। ऐसा लगता है कि भारत में सोना अब तक के सर्वोच्च स्तर पर पहुंचने और हाल में निवेश पोर्टफोलियो में सोने का हिस्सा बढ़ाने की चर्चाओं से परिदृश्य बदल रहा है। इस पीली धातु में अन्य संपत्ति वर्गों की तुलना में कई फायदेमंद और विशिष्ट खासियत हैं। सोने में अन्य वित्तीय बाजारों, विशेष रूप से शेयरों की तुलना में अलग रुझान होता है। निवेशकों को सोना खरीदने के लिए प्रोत्साहित करने वाले कारक भी अलग होते हैं। दुनियाभर में इस धातु को महंगाई की हेजिंग माना जाता है। 
 
भारत में सोने की कीमत अब भी आयात लागत आधारित है, इसलिए रुपया-डॉलर विनिमय दर में गिरावट का इसकी कीमतों पर असर दिखता है। सोने की कीमतों पर रुपये में गिरावट का असर पड़ता है। वित्तीय योजनाकार और सलाहकार अब तक अति धनाढ्य निवेशकों (एचएनआई) समेत निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो में 5 से 10 फीसदी हिस्सा सोने में रखने को कह रहे थे। सोने में ऊंचा प्रतिफल देने की संभावनाओं के बावजूद इसके हिस्से को इतना कम रखने की वजह यह थी कि सोना भी आभूषण के रूप में एक उपभोक्ता परिसंपत्ति है और यह निवेश नहीं है। 
 
निवेश के लिए खरीदे गए सिक्कों से भी भावनात्मक जुड़ाव होता है और जब नकदी की जरूरत पूरी करने या प्रतिफल के लिए सोने को बेचने की बारी आती है तो लोग सोने के सिक्कों को सबसे आखिर में बेचते हैं। अगर कोई व्यक्ति शुद्ध रूप से निवेशक है तो उसे ऐसा फैसला नहीं लेना चाहिए। हालांकि आज गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंडों के अलावा सॉवरिन गोल्ड बॉन्ड भी आ गए हैं और ये स्टॉक एक्सचेंजों पर सूचीबद्ध हैं। इन दो विकल्पों ने पहले ही भौतिक रूप में सोना खरीदने की जरूरत खत्म कर दी है और इस पीली धातु को सही मायनों में ऐसा निवेश उत्पाद बना दिया है, जिसमें भौतिक सोने के साथ पैदा होने वाला भावनात्मक जुड़ाव आड़े नहीं आता है। 
 
अब मझोले और छोटे शहरों के छोटे या खुदरा निवेशक अपने पोर्टफोलियो में 10 से 15 फीसदी हिस्सा सोने का रख सकते हैं। हालांकि बी एन वैद्य एसोसिएट्स के भार्गव वैद्य के मुताबिक अति धनाढ्य निवेशक (एचएनआई) अपने पोर्टफोलियो में 5 से 10 फीसदी से अधिक सोना नहीं रखते हैं। वह अपने ग्राहकों को सलाह देते हैं कि वे अपने पोर्टफोलियो में कम से कम 15 फीसदी सोना रखें और मौजूदा संकट के हालात में सोने का हिस्सा 25 फीसदी तक किया जाना चाहिए।  एचएनआई के अपने पोर्टफोलियो में सोना कम रखने की वजह यह है कि जब उनके पास पैसा होता है, तब सॉवरिन गोल्ड बॉन्ड उपलब्ध नहीं होते हैं। अगर वे बॉन्ड निर्गम खुला होने का मौका चूक जाते हैं तो उन्हें इंतजार करना पड़ता है। यहां तक कि सूचीबद्ध बॉन्डों में भी तरलता कम है और बड़ी खरीदारी से लागत बढ़ती है। 
 
एक सर्टिफाइड फाइनैंशियल प्लानर और प्रैक्टिशनर गौरव मशरूवाला ने कहा, 'लंबी अवधि के निवेशकों को धनराशि की जरूरत के आधार पर अपने पोर्टफोलियों में सोने की हिस्सेदारी बढ़ाने के बारे में विचार करना चाहिए और उन्हें सोने को केवल एक निवेश परिसंपत्ति मानना चाहिए।' दुनियाभर में पोर्टफोलियो में सोने का हिस्सा इतना अधिक नहीं है। हालांकि वहां महंगाई और वृद्धि भी इतनी अधिक नहीं है। अरोड़ा रिपोर्ट के लेखक और बाजार विशेषज्ञ निगम अरोड़ा कहते हैं, 'अरोड़ा रिपोर्ट में डॉलर आधारित निवेशकों को सोने में 3-5 फीसदी आवंटन का सुझाव दिया गया है। अगर सोने में गिरावट आती है तो रिपोर्ट में सोने में आवंटन को बढ़ाकर 5 से 7 फीसदी किए जाने की संभावना है। भारतीय निवेशक भी 10 से 15 फीसदी के बारे में विचार करना चाहिए।' संकट के दौर में पोर्टफोलियो में सोने की हिस्सेदारी दुनियाभर में बढ़ाई जाती है। 
Keyword: gold, ETF, exchange, share market,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या सरकार को दूरंसचार कंपनियों से करनी चाहिए शुल्क वसूली?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.