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हर जिले में होंगे एमएसएमई के लिए इन्क्यूबेटर

शुभायन चक्रवर्ती / नई दिल्ली October 02, 2019

आगामी दीपावली को एमएसएमई मंत्री नितिन गडकरी उद्यम विकास केंद्र (ईडीसी) पेश करने जा रहे हैं। एक अधिकारी ने कहा कि पिछले दो साल से इनकी योजना बनाई जा रही थी। आधिकारिक दस्तावेजों के मुताबिक सूक्ष्म, लघु और मझोले उद्यमों में स्थानीय उद्यमी विकसित करने के मकसद से ईडीसी उसी तरह काम करेंगे जैसे स्टार्टअप के लिए इन्क्यूबेटर करते हैं। अधिकारी ने पुष्टि करते हुए कहा, 'पहली बार एक एकीकृत इकाई नए और मौजूदा कारोबार विकसित करने के लिए प्रबंधन प्रशिक्षण और कार्यालय की जगह जैसी सेवाएं मुहैया कराएगी।'
 
 यह योजना देश के हर जिले के लिए बनाई गई है। एक अन्य अधिकारी ने कहा कि मंत्रालय ने कुल 500 ईडीसी की योजना बनाई है, जिनमें से 20 ईडीसी इस वित्त वर्ष के अंत तक शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।  विभिन्न राज्यों में स्थित एमएसएमई विकास केंद्र ईडीसी की पहल छोटे पैमाने पर शुरू कर चुके हैं, जिनमें से कुछ का विस्तार किया जा सकता है।  जागरूकता और प्रेरणा के प्रसार, कारोबार से जुड़ाव और सरकार के समर्थन से इन्क्यूबेशन मुहैया कराने पर इस पहल का विशेष ध्यान होगा। यह उद्यम विकास पाठ्यक्रमों, व्यावसायिक मार्गदर्शन और कौशल विकास भी मुहैया कराएगा, जिसेस उभरते उद्यमियों को विकास में मदद मिल सके। इसके लिए एमएसएमई का विकास आयुक्त कार्यालय निजी क्षेत्र के उद्यमियों से बात कर रहा है, जिससे कि वे केंद्रों पर आएं और कक्षाओं का संचालन करने के साथ छोटी फर्मों को मदद पहुंचा सकें। बिजनेस करियर काउंसिलिंग और एप्टीट्यूट टेस्ट भी इस पैकेज में शामिल होंगे। 
 
इसका एक मकसद एमएसएमई क्षेत्र की वित्तीय कठिनाइयों का समाधान भी है, जो नोटबंदी के बाद से ही नकदी के भारी संकट से जूझ रहा है। अधिकारी ने कहा कि भविष्य में तय मानकों के मुताबिक फर्म की क्षमता जांचने के बाद सरकार द्वारा ईडीसी के माध्यम से एमएसएमई क्षेत्र को कर्ज दिलाने की पहल भी की जाएगी। ये केंद्र कर्ज की सुविधा और सिंडिकेशन, निर्यात संवर्धन और आपूति शृंखला मुहैया कराने का भी काम करेंगे। ईडीसी में कठिनाई में फंसी फर्मों के लिए 'इंटरप्राइज क्लीनिक' भी होंगे। सरकार को उम्मीद है कि इसके जरिये छोटे कारोबारियोंं को कर्ज के दुष्चक्र में फंसने से बचाया जा सकेगा। अधिकारी ने कहा कि इस पहल के माध्यम से सरकार नीतिनिर्माताओं की 'छोटी फर्मों की कमी' से जुड़ी प्रमुख चिंता के समाधान की कवायद कर रही है। मौजूदा परिभाषा के मुताबिक छोटी फर्मों में 25 लाख से 5 करोड़ रुपये तक निवेश वाली फर्में आती हैं।
 
सरकार को उम्मीद है कि ईडीसी से उद्यमियों में विविधता बढ़ेगी और इसमें युवाओं, महिलाओं, अनुसूचित जाति, जनजाति व अक्षम पृष्ठभूमियों के लोग शामिल हो सकेंगे।  यह केंद्र व्यापक आधार के होंगे और इनका संचालन निजी क्षेत्र, बिजनेस मैनेजमेंट ऑर्गेनाइजेशंस, स्थानीय उद्योग संगठनों से बनी विशेष उद्देश्य इकाई के माध्यम से होगा। 
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