बिजनेस स्टैंडर्ड - मुश्किल में सूरत का कपड़ा उद्योग
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Tuesday, December 10, 2019 10:21 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम कंपनिया खबर

मुश्किल में सूरत का कपड़ा उद्योग

विनय उमरजी / अहमदाबाद 10 02, 2019

ऑर्डर में 40 प्रतिशत तक की कमी

अटके इनपुट टैक्स क्रेडिट से कार्यशील पूंजी का टोटा
जीएसटी और नोटबंदी की मार से नहीं उबर पाया है कपड़ा उद्योग

बिजनेस स्टैंडर्ड मुश्किल में सूरत का कपड़ा उद्योगबाजार में सुस्ती और कार्यशील पूंजी के अभाव से सूरत के कपड़ा उद्योग पर संकट खड़ा हो गया है। पिछले साल के मुकाबले इस बार त्योहारों के दौरान मिलने वाले ऑर्डर में कम से कम 40 प्रतिशत की कमी आई है। कपड़ा इकाइयों की मानें तो आगामी त्योहारी मौसम में राज्य के भीतर और बाहर से मिलने वाले सौदे खासे कम हो गए हैं। कपड़ा उद्योग त्योहारों के दौरान राहत मिलने की उम्मीद कर रहा था। कारोबार इतना पिट गया है कि जहां वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) और नोटबंदी से पहले सूरत में रोजाना 4 करोड़ मीटर कपड़े का उत्पादन और कारोबार होता था, वहीं अब यह आंकड़ा कम होकर रोजाना महज 2 से 2.5 करोड़ मीटर रह गया है।

शहर के अग्रणी पावरलूम संकुलों में एक पंडेसारा वीवर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष आशिष गुजराती ने कहा, 'नोटबंदी और जीएसटी लागू होने के बाद कपड़ा उद्योग पर बुरा असर हुआ है, लेकिन पिछले दो वर्षों से त्योहारों के दौरान अच्छे कारोबार से खासी राहत मिल रही थी, मगर इस साल वह भी नदारद लग रही है। राज्य के भीतर और बाहर से आने वाले ऑर्डर कम से कम 40 प्रतिशत तक कम हो गए हैं।' 

ऑर्डर कम होने से कारोबार तो औंधे मुंह गिरा ही है, मगर कारोबार लायक पूंजी की कमी ने भी गहरी चोट की है। पिछले दो तीन वर्षों से जमा इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) मिलने में देरी ने कारोबार की सेहत और बिगाड़ दी है। कपड़ा उद्योग के अनुमानों के अनुसार उनका 400 से 500 करोड़ रुपये का रिफंड अब भी अटका हुआ है, जिससे पूरे उद्योग खासकर बुनाई एवं प्रसंस्करण इकाइयों की हालत खराब कर रखी है। यह बात बुनकर उद्योग के लिए कुछ ज्यादा ही सिरदर्द साबित हो रही है।

बुनाई के लिए पॉलिएस्टर धागा अहम कच्चा माल है, जबकि  तैयार सामान (ग्रे फैब्रिक) होता है। पहले पॉलिएस्टर धागे पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगता था, जिसे घटाकर बाद में 12 प्रतिशत कर दिया गया। हालांकि तैयार सामान पर 5 प्रतिशत जीएसटी लगता है, जिससे एक उल्टी शुल्क संरचना बन गई और इसका नतीजा यह हुआ है कि इनपुट टैक्स क्रेडिट का अंबार लग गया है। गुजरात उच्च न्यायालय ने इस साल अगस्त में केंद्र के उस कदम को खारिज कर दिया था, जिसमें 1 जुलाई 2017 से 31 जुलाई 2018 तक जमा क्रेडिट वापस नहीं करने का प्रावधान था। 

हालांकि सूत्रों के अनुसार जमा इनपुट के्रडिट का एक बड़ा हिस्सा अब तक वापस नहीं आया है, जिससे पावरलूम क्षेत्र की कार्यशील पूंजी अटक गई है। साउथ गुजरात टेक्सटाइल प्रोसेसर्स ऐसासिएशन (एसजीटीपीए) के अध्यक्ष जीतूभाई वखारिया कहते हैं,'भुगतान मिलने में भी देरी होने लगी है। सुस्त मांग के कारण थोक खरीदारों के स्तर पर भी बिक्री धीमी पड़ गई है। पहले 30-45 दिनों में भुगतान मिल जाता था, लेकिन जीएसटी और नोटबंदी के बाद यह अवधि बढ़कर 90 दिनों तक खिंच गई है।' 
Keyword: textiles, cotton, cloths, branded, surat,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या राजकोषीय घाटे का लक्ष्य चूक जाएगी सरकार?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.