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कई शेयरों ने कर कटौती से मिली बढ़त गंवाई

सुंदर सेतुरामन / मुंबई October 02, 2019

कॉरपोरेट कर में अचानक कटौती के फैसले से दलाल पथ तेजी के रथ पर सवार था लेकिन कुछ दिनों बाद बाजार की खुमारी काफूर हो गई। वित्तीय क्षेत्र के संकट की वजह से शेयरों ने 19 सितंबर को कर कटौती की घोषणा के बाद हासिल अपनी बढ़त गंवा दी। बीएसई 500 कंपनियों में से करीब आधे शेयर कर कटौती के पूर्व स्तर पर आ गए हैं। कॉरपोरेट कर को 30 फीसदी से घटाकर 22 फीसदी करने के ऐलान के दो दिन के अंदर ही सेंसेक्स करीब 8 फीसदी उछल गया। बीएसई 500 के करीब 85 फीसदी से ज्यादा शेयरों में कर कटौती के बाद जोरदार तेजी आई थी। हालांकि केवल 55 फीसदी शेयर ही इस बढ़त को बनाए रखने में सफल रहे हैं। 501 कंपनियों में से करीब 230 शेयर सरकार द्वारा वित्तीय प्रोत्साहन की घोषणा के पहले के स्तर से भी नीचे कारोबार कर रहे हैं। इन शेयरों में ज्यादातर वित्तीय क्षेत्र के हैं या उन कंपनियों के हैं जिन पर वित्तीय दबाव है।
 
वेलेंटिस एडवाइजर्स के संस्थापक ज्योतिवद्र्घन जयपुरिया ने कहा, 'बाजार में अगर स्थायी तेजी चाहते हैं तो अर्थव्यवस्था के साथ-साथ कंपनियों की आय में सुधार लाने की जरूरत है। वित्तीय क्षेत्र को लेकर चिंता बनी हुई है। कुछ समय से फंसे कर्ज की समस्या दूर होने की अहसास हो रहा था लेकिन अब इसके फिर से उभरने का जोखिम बढ़ गया है।'  येस बैंक, डीएचएफएल, कॉफी डे इंटरप्राइजेज, इंडियाबुल्स हाउसिंग और रिलायंस कैपिटल जैसे शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट आई है क्योंकि वित्तीय दबाव और डिफॉल्ट के जोखिम को देखते हुए निवेशकों ने इन शेयरों से निवेश निकाला है। 
 
आईआईएफएल में शोध प्रमुख अभिमन्यु सोफत ने कहा, 'बीएसई 500 के कई शेयरों का 18 सितंबर के स्तर पर लौटना चकित नहीं करता है। एनबीएफसी में नकदी संकट, कंपनियों के चूक करने के बढ़ते मामले और आय वृद्घि में कर कटौती के बाद भी किसी तरह का बदलाव नहीं हुआ है। इन सभी मसलों की वजह से काफी मार्जिन की जरूरत है जिससे इन शेयरों पर असर पड़ा है। सितंबर तिमाही के आंकड़े भी बीएसई 500 कंपनियों के लिए बेहतर रहने की उम्मीद नहीं है।'  हालांकि कई कंपनियां हैं जिसके शेयर भाव कर कटौती के पहले के स्तर पर ऊपर बने हुए हैं। विश्लेषकों का कहना है कि निवेशक उन कंपनियों पर दांव लगा रहे हैं जहां अच्छी आय की संभावना दिख रही है।  एचडीएफसी सिक्योरिटीज में रिटेल रिसर्च के प्रमुख दीपक जसानी ने कहा, ''निवेशक प्रबंधन की गुणवत्ता और कारोबार को लेकर ज्यादा सजग हो रहे हैं। कुछ ने कर कटौती के बाद शेयरों में आई तेजी को अपना निवेश निकालने के अवसर के तौर पर देखा और बिकवाली की।'
Keyword: nirmala sitaraman, economy, corporate tax, share market,,
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