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आईएलऐंडएफएस के आधे कर्ज के निपटान की उम्मीद

अमृता पिल्लै और अनूप रॉय / मुंबई October 01, 2019

सरकार द्वारा नियुक्त आईएलऐंडएफएस समूह की प्रबंधन समिति समूह का करीब आधे कर्ज के समाधान, वसूली या पुनर्गठन की उम्मीद कर रही है। समिति मार्च 2020 तक इसका एक बड़ा हिस्सा हासिल करने का प्रयास कर रही है। कोटक महिंद्रा बैंक के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्याधिकारी तथा आईएलऐंडएफएस के चेयरमैन उदय कोटक ने कहा, 'हम करीब आधे कर्ज के समाधान, वसूली या पुनर्गठन की उम्मीद कर रहे हैं। इनमें ग्रीन श्रेणी की कंपनियां भी शामिल हैं। इससे हमारा मतलब यह है कि हम 94,000 करोड़ रुपये में से कम से कम 50 फीसदी के वास्तविक समाधान और वसूली के प्रति आश्वस्त हैं।
 
समूह 36,400 करोड़ रुपये के कर्ज के निपटान की प्रक्रिया में है जिसमें से कम से कम 30,000 करोड़ रुपये की वसूली या समाधान की उम्मीद है। अभी समूह की नजर ऐसी परिसंपत्तियों पर है जिनसे आसानी से पैसा जुटाया जा सकता है। इनमें पवन ऊर्जा क्षेत्र की सहायक कंपनी की ऑरिक्स कॉर्प को बिक्री शामिल है। इसके लिए राष्ट'्रीय कंपनी कानून पंचाट (एनसीएलटी) पहले ही अपनी मंजूरी दे चुका है और बैंकों के भी जल्दी ही इस पर सकारात्मक जवाब देने की उम्मीद है। इससे कंपनी को 4,320 करोड़ रुपये मिल सकते हैं। ग्रीन श्रेणी की दूसरी कंपनियां अपने दम पर कर्ज का भुगतान कर सकती हैं। यही वजह है कि समूह उन्हें 'सकारात्मक इक्विटी बनाने की कोशिश कर रहा है और फिर उन्हें ऐसी कंपनियों को सौंपा जाएगा जो इन परियोजनाओं को बेहतर ढंग से चला सके। 
 
सड़क और शिक्षा में अंबर या रेड श्रेणी की कंपनियों के लिए बोलियां कर्जदारों की समिति को सौंपी जा रही है। कंपनी को इन कंपनियों के लिए 8,100 करोड़ रुपये की बोलियां मिली हैं जबकि उन पर 10,150 करोड़ रुपये का कर्ज है। जिन कंपनियों के लिए कम बोली मिली है या कोई बोली नहीं मिली है, उनके लिए इनविट मॉडल पर विचार किया जाएगा। कंपनी के पास अभी 3,200 करोड़ रुपये की शुद्घ नकदी है। आईएलऐंडएफएस ने मंगलवार को कहा कि उसे चीन में अपनी परियोजना के लिए एक अंतरराष्ट'्रीय इकाई से बोली मिली है। चीन में इसकी परियोजना पर 16,000 करोड़ रुपये कर्ज है। आईएलऐंडएफएस ने कहा, 'उसे अनिवार्य बोली इक्विटी मूल्य के साथ मिली है। कंपनी तमिलनाडु में अपनी बिजली परियोजना से संबंधित 8,000 करोड़ रुपये के कर्ज पुनर्गठन के लिए एक कर्जदाता से बातचीत कर रही है। अधिकारियों ने कहा कि समूह की इंजीनियरिंग कंपनी आईएलऐंडएफएस इंजीनियरिंग ऐंड कंस्ट्रक्शन कंपनी (आईईसीसीएल) परियेाजना कार्यों में शिरकत करना शुरू कर देगी। प्रबंधन समिति ने कहा कि ये ऑर्डर संयुक्त उद्यम या बैक-ऐंडेड अनुबंध के माध्यम से आगे बढ़ाए जाएंगे। समूह अपनी रियल एस्टेट परिसंपित्तयां भी बेचने पर विचार करेगा, जिनमें मुंबई में मुख्यालय की इमारत भी शामिल है। प्रबंधन समिति को इस बिक्री से 3,000 से 3,500 करोड़ रुपये रकम मिलने की उम्मीद है। कोटक ने मुंबई में इस इमारत का मूल्यांकन 1,500 करोड़ रुपये से अधिक किया है।
 
समूह ने लागत कम करने के लिए पिछले एक साल के दौरान कर्मचारियों की तादाद एक तिहाई कम कर दी है। समूह के कर्मचारियों की संख्या एक साल पहले 22,000 से कम होकर 16,000 रह गई है। प्रबंधन समिति ने यह भी कहा कि उसने नकदी के मामले में काफी सावधानी बरती है और 31 अगस्त तक इसके पास 5,300 करोड़ रुपये नकदी थी। गैर-आईएलऐंडएफएस समूह इकाइयों से ऋणों की वसूली से 1,200 करोड़ रुपये से अधिक रकम हासिल हुई है। समूह ने 5,100 करोड़ रुपये से अधिक कर्ज का पुनर्गठन भी किया है, जिससे इसकी तीन इकाइयां 'अंबर से 'ग्रीन श्रेणी में आ गई है।
Keyword: IL&FS, fund, share, LIC, sidbi, इन्फ्रास्ट्रक्चर लीजिंग ऐंड फाइनैंस सर्विसेज,
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