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क्या जीवनकाल बढ़ाने के लिए प्रक्रिया को पलटा जा सकता है?

तकनीकी तंत्र
देवांग्शु दत्ता /  October 01, 2019

जैव विज्ञान के क्षेत्र में कई उल्लेखनीय प्रगति हुई है लेकिन उम्र बढऩे की प्रक्रिया अब तक रहस्य बनी हुई है। बेहतर पोषण, साफ सफाई तथा स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार से जीवन प्रत्याशा बढ़ी है। नई दवाओं की खोज और आनुवंशिक अनुसंधान से असाध्य रोगों का इलाज संभव हुआ है। उम्मीद की जाती है कि बीते दौर की तुलना में आज मनुष्य बेहतर स्वास्थ्य के साथ ज्यादा लंबे समय तक जीता है। लेकिन क्या मानव प्रजाति दीर्घायु हो सकती है? हर ऐतिहासिक दौर में ऐसे लोग हुए हैं जो 80 से 90 साल या उससे भी अधिक समय तक जिंदा रहे जबकि तब औसत जीवनकाल 40 से भी कम था। 

 
निश्चित तौर पर हम यह उम्मीद कर सकते हैं कि ज्यादा से ज्यादा लोग दीर्घायु होंगे। पूरे यूरोपीय संघ (ईयू) में जीवन प्रत्याशा 80 साल को पार कर गई है और जापान, सिंगापुर और स्विटजरलैंड में तो यह 85 साल से अधिक है। भारत में लोग औसतन 69 साल तक जीते हैं। लेकिन क्या जीवन प्रत्याशा को 120 साल या इससे भी अधिक समय तक पहुंचाना मुमकिन है? कुछ लोगों को लगता है कि ऐसा संभव है। इस तरह शोधकर्ताओं और नीतिनिर्माताओं के समक्ष दो परस्पर लेकिन अलग-अलग लक्ष्य हैं। इनमें से एक लक्ष्य ऐसी व्यवस्था बनाना है जहां लोग लंबे समय तक जी सकें और निरोग रह सकें। दूसरा लक्ष्य ज्यादा महत्त्वाकांक्षी है। यह है उम्र बढऩे की प्रक्रिया को समझना और जीवनकाल बढ़ाने के लिए इसके प्रभावों को पलटना। 
 
दुनियाभर में अभी करीब 500,000 लोगों की उम्र 100 से अधिक है। यह संख्या भविष्य में हर दशक में दोगुनी होगी। 'साइंस' पत्रिका में प्रकाशित एक विश्लेषण के मुताबिक मनुष्य के जीवित रहने की कोई सीमा नहीं हो सकती है। इटली की जनसांख्यिकीविद् एलिजाबेटा बार्बी और फ्रांसेस्को लगोना तथा इटैलियन नैशनल इंस्टीट्यूट ऑफ स्टैटिस्टिक्स ने वर्ष 2009 से 2015 के बीच इटली के 105 साल या उससे अधिक उम्र के 3,836 लोगों का रिकॉर्ड खंगाला। हम जानते हैं कि सहज रूप से और सांख्यिकीय रूप से भी हर वयस्क का मरने का खतरा बढ़ जाता है। यानी 20 साल के युवक की तुलना में 21 साल के युवक के अगले 12 महीने में मरने की आशंका थोड़ा ज्यादा है और हरेक साल के साथ यह जोखिम बढ़ता जाता है। इस अध्ययन में एक विचित्र बात सामने आई है कि 105 साल की उम्र के बाद अगले 12 महीने की अवधि के दौरान मरने का जोखिम करीब 50 फीसदी रह जाता है। यह सांख्यिकीय या पद्घति संबंधी संयोग हो सकता है या यह किसी जैविक घटना का संकेत हो सकता है जहां कोशिकाओं की मरम्मत की प्रक्रिया उम्र बढऩे के प्रभाव को संतुलित करती है। 
 
अंतरिक्ष अनुसंधान और रोबोटिक्स को बढ़ावा देने वाली संस्था एक्सप्राइज फाउंडेशन ने भी मनुष्यों का जीवनकाल बढ़ाने के अनुसंधान में दिलचस्पी दिखाई है। एक्सप्राइज बोर्ड के एक सदस्य सेर्गेई यंग ने लॉन्जेविटी विजन फंड के लिए 10 करोड़ डॉलर जुटाए हैं। यह जीवनकाल बढ़ाने से संबंधित क्षेत्रों में अनुसंधान करने वाली जैव प्रौद्योगिकी स्टार्टअप कंपनियों में निवेश करेगा। यंग का मानना है कि जीवनकाल को बढ़ाकर 200 साल किया जा सकता है और इसके लिए प्रौद्योगिकी को एक अरब से अधिक लोगों तक मुहैया कराया जा सकता है।  एक्सप्राइज के संस्थापक पीटर डाइमेंडिस ज्यादा व्यावहारिक हैं लेकिन इसे लेकर काफी उत्साहित हैं। उन्होंने कहा, 'किसी व्यक्ति के जीवन में 20 से 30 साल जोडऩे का कारोबार धरती पर सबसे बड़ा होगा। जीनोम अनुक्रमण, कृत्रिम मेधा और कोशिकीय दवाओं से ऐसी सफलताएं हासिल होंगी जिससे 100 साल की उम्र 60 की बन जाएगी।' एक्सप्राइज ने हाल ही में जीवनकाल बढ़ाने के बारे में एक सम्मेलन कराया और इसके लिए भविष्य की रूपरेखा भी जारी की। इसमें 12 उन क्षेत्रों का जिक्र है जिनमें सुधार या सफलता से मानव स्वास्थ्य को बेहतर बनाया जा सकता है और जीवन प्रत्याशा को बढ़ाया जा सकता है। विज्ञान पत्रिका 'द लान्सट' के मुताबिक 70 फीसदी से अधिक मौतें उम्र संबंधी गंभीर बीमारियों से होती है। इनमें कैंसर, अल्जाइमर्स, दिल की बीमारी और जिगर की बीमारी आदि शामिल हैं। 
 
इन 12 क्षेत्रों में उम्र बढऩे के आंकड़ों का डेटाबेस तैयार करना, बढ़ती उम्र की प्रक्रिया के शोध के लिए दुनियाभर में स्वीकार्य जैविक मार्कर को वैश्विक मानक बनाना, ऐसे अध्ययनों को दोहराना जिनसे संकेत मिलते हैं कि कैलरी प्रतिबंध से जीवन लंबा होता है, बढ़ती उम्र के साथ होने वाली कम से कम तीन बीमारियों की चेतावनी के लिए परीक्षण, यौवन का कोई भी चक्र जो जानवरों पर कारगर हो, बढ़ती उम्र के साथ पैर पसारने वाली कम से कम तीन बीमारियों की व्यापक इलाज से रोकथाम, पोषक तत्त्वों को संसाधित करने की क्षमता का विश्लेषण, बढ़ती उम्र को सभी प्रक्रियाओं को जोडऩे वाला सिद्घांत और आसान व्यायाम प्रणालियां या व्यायाम के सकारात्मक प्रभावों को दोहराने वाली जैव चिकित्सा प्रणालियां शामिल हैं। ये अध्ययन के अति महत्त्वाकांक्षी लेकिन समझ में आने वाले क्षेत्र हैं। इसके तीन काल्पनिक वैज्ञानिक लक्ष्य हैं। पहला यह कि कम से कम एक साल तक उम्र बढऩे की प्रक्रिया को रोककर बढ़ती उम्र को पूरी तरह रोकना। पहले स्तनधारियों पर इसका प्रयोग किया जाएगा और फिर इंसानों पर। दूसरा लक्ष्य मानव शरीर का विस्तृत और सटीक मॉडल बनाना है जिस पर प्रयोग किए जा सकें। इससे शोध पर मौजूदा प्रतिबंधों को दरकिनार किया जा सकता है जिसके संभावित फायदे हो सकते हैं लेकिन यह इस विषय के लिए खतरनाक हो सकता है। तीसरा लक्ष्य उम्र बढऩे की प्रक्रिया को रोकना है। इसके तहत एक व्यक्ति के मस्तिष्क को पूरे सिर के साथ या उसके बिना दूसरे व्यक्ति के शरीर या किसी गैर मानव पात्र में एक साल के लिए हस्तांतरित किया जाएगा जबकि चेतना को बरकरार रखा जाएगा। इससे इस बात का प्रदर्शन होगा कि चेतना को कुछ समय के बाद फिर से हासिल किया जा सकता है। इसे हासिल करने का मतलब होगा अमरत्व।
Keyword: pharma, medicine, biology, human,,
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