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बदलेगा रेटिंग फर्मों का ढांचा!

रेटिंग एजेंसियों पर मार्केट इन्फ्रास्ट्रक्चर संस्थान की तरह लागू हो सकते हैं नियम
श्रीमी चौधरी / नई दिल्ली 09 30, 2019

... नियम होंगे सख्त

स्वामित्व, संचालन, जिम्मेदारी के मानकों में बदलाव की जरूरत
रेटिंग एजेंसियों के बोर्ड में 50 फीसदी स्वतंत्र निदेशक/लोकहित निदेशक होने चाहिए
मौजूदा समय में कुछ रेटिंग एजेंसियों के बोर्ड और रेटिंग समितियों में हैं स्वतंत्र निदेशक
बोर्ड में  केंद्र, नियामक के नामित भी हो सकते हैं शामिल

बिजनेस स्टैंडर्ड बदलेगा रेटिंग फर्मों का ढांचा!भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) और कंपनी मामलों का मंत्रालय क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों के स्वामित्व और संचालन ढांचे में बदलाव लाने पर विचार कर रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि नियामकीय संस्था इस पर विचार कर रही है कि क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों को मार्केट इन्फ्रास्ट्रक्चर संस्थानों (एमआईआई) के तौर पर वर्गीकृत  किया जाए या नहीं। स्टॉक एक्सचेंज, क्लीयरिंग कॉरपोरेशन एवं डिपॉजिटरी जैसे महत्त्वपूर्ण संस्थानों को एमआईआई माना जाता है और इन्हें सख्त संचालन एवं शेयरधारिता नियमों का पालन करना होता है। अगर सरकार और सेबी इसे क्रियान्वित करते हैं तो क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों की जटिलताओं का समाना करना पड़ सकता है क्योंकि कोई भी क्रेडिट रेटिंग एजेंसी एमआईआई के लिए लागू मौजूदा शर्तों को पूरा नहीं करती हैं। तीन बड़ी रेटिंग एजेंसियां पहले से ही सूचीबद्ध हैं जिससे यह मसला और जटिल हो सकता है।

हालांकि आईएलऐंडएफएस सहित हालिया कॉरपोरेट डिफॉल्ट की घटनाओं से क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों के कामकाज के तरीकों में खामियां सामने आई हैं और इसे ज्यादा जिम्मेदार बनाए जाने की मांग हो रही है। सूत्रों के अनुसार कंपनी मामलों के मंत्रालय ने सेबी को क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों के निदेशक मंडल की व्यवस्था में पूरी तरह बदलाव करने के लिए पत्र लिखा है। यह पत्र पिछले हफ्ते लिखा गया था और इसमें क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों के लिए एमआईआई की तरह शेयरधारिता की शर्तें बनाने का भी उल्लेख किया गया है।

मंत्रालय ने क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों के बोर्ड में 50 फीसदी से अधिक स्वतंत्र निदेशक या लोकहित निदेशकों को नियुक्त करने का भी प्रस्ताव किया है। इसके साथ ही बोर्ड में नियामक का भी एक नामित सदस्य हो सकता है।  घटनाक्रम के जानकार एक सूत्र ने कहा, 'प्राधिकरणों का मानना है कि रेटिंग फर्मों को भी अन्य एमआईआई की तरह प्रणली के लिहाज से महत्त्वपूर्ण माना जाना चाहिए और इसके लिए उच्च नियामकीय जरूरतें होनी चाहिए।' इस कदम का मकसद क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों में कारोबारी संचालन की खामियों को दूर करना है।

मौजूदा नियामकीय प्रारूप के अंतर्गत रेटिंग फर्मों के लिए निश्चित संख्या में स्वतंत्र निदेशकों को बोर्ड में शामिल करने की अनिवार्यता नहीं है। हालांकि कुछ रेंटिंग एजेंसियों के बोर्ड में स्वतंत्र निदेशक हैं और कुछ की रेटिंग समितियों में स्वतंत्र सदस्य हैं। अन्य में बाह्य सदस्य और/या आंतरिक सदस्य समान मामले से जुड़े नहीं होते हैं। सेबी के पास कुल सात रेटिंग फर्में पंजीकृत हैं, जो भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा बाह्य क्रेडिट मूल्यांकन संस्थान के तौर पर भी मान्यता प्राप्त हैं। इन फर्मों के प्रवर्तक ऐसे सार्वजनिक वित्तीय संस्थान, अधिसूचित वाणिज्यिक बैंक, विदेशी बैंक होते हैं जिनकी पिछले पांच साल में नेटवर्थ लगातार 100 करोड़ रुपये रही हो। वर्तमान में भारत में क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों का स्वामित्व मुख्य रूप से व्यक्तिगत शेयरधारकों, कारोबारी निकायों, विदेशी निवेशकों, म्युचुअल फंडों आदि के पास है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अधिकांश रेटिंग फर्में विदेशी निवेश वाली प्रबंधन कंपनियों द्वारा प्रवर्तित हैं। इनके बोर्ड में भी स्वतंत्र निदेशक होते हैं। हालांकि पूर्व डिप्टी गवर्नर आर गांधी की अगुआई में गठित सेबी की विशेषज्ञ समिति ने 2018 में एमआईआई पर अपनी रिपोर्ट में कहा था कि फिलहाल क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों के लिए अतिरिक्त स्वामित्व के नियम जरूरी नहीं हैं।
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