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कंपनी को दिवाला से बचाने के लिए की मदद

देव चटर्जी और राघवेंद्र कामत / मुंबई September 29, 2019

संकट में फंसे पंजाब ऐंड महाराष्ट्र कोऑपरेटिव (पीएमसी) बैंक ने रियल एस्टेट डेवलपर हाउसिंग डेवलपमेंट ऐंड इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (एचडीआईएल) को अन्य सरकारी बैंक (पीएसबी) का कर्ज चुकाने में मदद की थी। इसका मकसद यह था कि एकमुश्त समाधान के तहत एचडीआईएल कर्ज का भुगतान कर दे और कंपनी पर प्रवर्तकों का नियंत्रण बना रहे। न्यायालय के रिकॉर्ड से पता चलता है कि एचडीआईएल ने यूनियन बैंक आफ इंडिया, सिंडिकेट बैंक, बैंक आफ इंडिया, देना बैंक और जम्मू ऐंड कश्मीर बैंक के कर्ज का भुगतान करने में चूक की, जिससे इन बैंकों ने कंपनी के खिलाफ दिवाला प्रक्रिया की शुरु आत कर दी। एचडीआईएल ने तेजी से कर्जदाताओं से एकमुश्त समाधान के लिए बातचीत की, जिससे कर्ज के एक हिस्से का भुगतान हो सके। एक सूत्र ने कहा कि उस समय पीएमसी बैंक एचडीआईएल का वित्तपोषण कर रहा था, जिससे संकट में फंसी रियल एस्टेट कंपनी बैंकों के साथ एकमुश्त समाधान योजना पर हस्ताक्षर कर सके और दिवाला प्रक्रिया से बाहर निकल सके। सरकारी बैंक कंपनी पर बकाये का करीब 50 प्रतिशत छोडऩे को तैयार हो गए। एचडीआईएल ने मार्च 2019 मेंं समाप्त तिमाही में 1,997 करोड़ रुपये का कर्ज दिखाया। 
 
बहरहाल राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) ने 20 अगस्त 2019 को एचडीआईएल के खिलाफ दायर कर्ज समाधान याचिका स्वीकार कर ली, जो ऋणशोधण अक्षमता एवं दिवाला संहिता 2016 के तहत बैंक आफ इंडिया की ओर से दाखिल की गई थी।  उसके बाद एचडीआईएल के प्रवर्तक और चेयरमैन राकेश वाधवा राष्ट्रीय कंपनी कानून अपीली न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) में चले गए, जिसने एनसीएलटी की दिवाला कार्रवाई पर रोक लगा दी, जो आदेश कंपनी के खिलाफ 3 सितंबर को दिया गया था। एनसीएलएटी का आदेश इस आधार पर आया कि वाधवा ने कहा कि कंपनी बैंक आफ इंडिया के बकाये का भुगतान पे ऑर्डर के माध्यम से पीएमसी से नया कर्ज लेकर करेगी। 
 
इस सिलसिले में एचडीआईएल को भेजे गए ई मेल पर कोई उचित प्रतिक्रिया नहीं मिली। एचडीआईएल की मुसीबतें 2013 में शुरू हुई। उस समय कंपनी के वाइस चेयरमैन और प्रबंध निदेशक सारंग वाधवा ने कंपनी की एक प्रतिशत हिस्सेदारी 57 करोड़ रुपये में बेची, जिससे 2010 में खरीदी गई जमीन के बकाये का भुगतान किया जा सके। उस समय कंपनी के शेयरों में भारी गिरावट आई थी। उस समय प्रवर्तकों के शेयर का करीब 98 प्रतिशत गिरवीं हो गया था, जिससे कंपनी की कठिनाइयों का पता चला, जिससे उसके प्रवर्तक गुजर रहे थे। 
 
एचडीआईएल की वित्तीय समस्याएं बढऩे पर 2015 में निदेशक वरयाम सिंह ने कंपनी का बोर्ड छोड़ दिया और वे पीएमसी बैंक के चेयरमैन बन गए। उसके बाद से ही एचडीआईएल ने सरकारी बैंकों के साथ एकमुश्त समाधान के लिए बातचीत करनी शुरू कर दी। रियल एस्टेट विश्लेषकों का कहना है कि पिछले 4 साल के दौरान रियल एस्टेट में गिरावट के अलावा एचडीआईएल कई जटिल समस्याओं से जूझ रही है। इसमें खरीदारों से नकदी मिलने में देरी, बहुत कम नई पेशकश, मुंबई एयरपोर्ट झुग्गी बस्ती पुनर्वास परियोजना में देरी और बढ़ता कर्ज शामिल है। कंपनी को मुंबई एयरपोर्ट पर कब्जा जमाए झुग्गियों में रह रहे लोगों का पुनर्वास करना था। यह परियोजना शुरू ही नहीं हो सकी। 
 
बिक्री के पहले के भुगतानों में भी देरी हुई, जिसका संबंध कंपनी की बुकिंग बिक्री से है। इस माध्यम से भी कंपनी के कोष में धन नहीं आया।  कंपनी पर नजर रख रहे एक विश्लेषक ने कहा कि एचडीआईएल की समस्याओं के मूल में नकदी संग्रह की खराब स्थिति है। उन्होंने कहा कि कंपनी को जमीन की बिक्री में भी इसी तरह का सामना करना पड़ा क्योंकि भुगतान मंजूरियों से जुड़ा हुआ था। नकदी जुटाने के लिए कंपनी पिछले 2 साल से मुंबई में जमीन बेच रही है, जिससे कर्ज कम किया जा सके। लेकिन निगम प्राधिकारियों से मंजूरी मिलने में देरी और कुल मिलाकर बाजार में व्यापक मंदी की वजह से नकदी जुटाने की प्रक्रिया बहुत धीमी रही।  एचडीआईएल की डूबती उतराती किस्मत मुंबई के रियल एस्टेट से भी जुड़ी हुई है। देश में सबसे महंगे मुंबई के रियल एस्टेट क्षेत्र में 2014 से ही मंदी है। लंबी मंदी और नई परियोजनाओं में देरी के साथ बगैर बिके मकान की वजह संकट गहरा हुआ है। मुंबई में 2014 के बाद से दाम नहीं बढ़े हैं और बिल्डर महंगे अपार्टमेंट का दाम नहीं कम कर रहे हैं। 
 
डेवलपरों पर नोटबंदी जैसे फैसलों का भी बुरा असर पड़ा, जहां काला धन लगता है। साथ ही रियल एस्टेट (नियमन एवं विकास) अधिनियम, वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के अलावा अन्य कई नियमन के कारण रियल एस्टेट मंदी की चपेट में आया है। ऐसे समय में पीएमसी बैंक ने एचडीआईएल को कर्ज देना शुरू किया, जिससे वह तूफान से बाहर निकल सके। लेकिन इसके विपरीत यह हुआ कि कोऑपरेटिव बैंक ही ध्वस्त हो गया क्योंकि एचडीआईएल अपनी संपत्ति बेचकर धन जुटाने और पीएमसी को भुगतान में सक्षम नहीं हुआ। 
Keyword: PMC, RBI, bank, HDIL,,
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