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कुछ महीनों में 12,000 पर पहुंच सकता है निफ्टी!

जश कृपलानी /  09 29, 2019

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा कर दरों में की गई कटौती के बाद बाजार में एक दिन में आई बड़ी तेजी से कारोबारियों को और ज्यादा तेजी आने की उम्मीद पैदा हुई है। जश कृपलानी के साथ साक्षात्कार में आदित्य बिड़ला सनलाइफ ऐसेट मैनेजमेंट कंपनी के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्याधिकारी ए बालासुब्रमण्यन ने बताया कि उन्हें विश्वास है कि इन कर कटौती से अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रही कई समस्याओं को राजकोषीय स्थिति पर किसी बड़े जोखिम के बगैर दूर करने में मदद मिल सकती है। पेश हैं बातचीत के मुख्य अंश:

 
वित्त मंत्री के निर्णयों को लेकर आपकी क्या प्रतिक्रिया है?
 
ये निर्णय एक बड़े सकारात्मक आश्चर्य के तौर पर आए हैं। कुछ बाजार कारोबारियों का मानना है कि अब तक की गईं घोषणाएं आंशिक हैं, पूरी तरह ठोस नहीं। हालांकि सभी घोषणाएं विभिन्न समस्याओं को दूर किए जाने के लिहाज से ठोस और सुनियोजित थीं। कॉरपोरेट कर घटाकर 25 प्रतिशत किए जाने के अलावा वित्त मंत्री ने नई निर्माण कंपनियों के लिए कर दरें नरम बनाने की भी घोषणा की। नई निर्माण कंपनियों के लिए कर दर घटाकर 15 प्रतिशत (अधिभार अलग) की गई है। न्यूनतम वैकल्पिक कर (मैट) के लिए संशोधित दरों को शामिल किए जाने के बाद कॉरपोरेट के लिए कर दर 20 प्रतिशत के पार नहीं जाएगी। इसलिए कर कटौती व्यापक तौर पर घोषित की गई है। ऐसे उपायों से कॉरपोरेट मुनाफे को मदद मिलेगी, जिससे पूंजी बाजारों को भी मजबूती मिलेगी। इन उपायों से कमजोर बाजार धारणा को मजबूत बनाने में मदद मिल सकती है।
 
पूंजीगत खर्च चक्र में सुधार के बारे में आपकी क्या प्रतिक्रिया है?
 
इसमें कुछ समय लगेगा क्योंकि सबसे पहले उपभोक्ता मांग में सुधार लाने की जरूरत होगी। अच्छे मॉनसून से ग्रामीण आय में सुधार आ सकता है। कुछ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में भी वृद्घि हो सकती है। ये सब उपभोक्ता मांग के लिए शुभ संकेत होंगे। जब मांग में सुधार आ जाएगा, पूंजीगत खर्च बढ़ेगा। सरकार कंपनियों के लिए नए निवेश को आसान बना रही है। नई निर्माण कंपनियों के लिए कम कर का मकसद निर्माण गतिविधि को बढ़ावा देना है जिससे रोजगार स्तर में भी सुधार आएगा। यदि कर कटौती-केंद्रित आय वृद्घि के संदर्भ में पूंजी बाजार मजबूत होते हैं तो इससे कंपनियों को कोष उगाही के जरिये सस्ती पूंजी तक पहुंच बनाने में मदद मिलेगी। इसऌका इस्तेमाल आगामी विस्तार योजनाओं के लिए किया जा सकेगा। 
 
कर कटौती का राजकोषीय घाटे पर कितना प्रभाव पड़ेगा?
 
इसे लेकर कुछ समस्याएं आ सकती हैं। सरकार का मानना है कि पूंजी में यह कमी लगभग 1.4 लाख करोड़ रुपये होगी। हालांकि घाटा बड़ी चिंता नहीं है, इसके संदर्भ में और अधिक संसाधन जुटाने की क्षमता मौजूद है। यदि कर कटौती का प्रभाव इस साल पड़ता है तो यह कम होगा क्योंकि आरबीआई बिल जालाना समिति की सिफारिशों के तौर पर सरकार को 1.7 लाख करोड़ रुपये स्थानांतरित कर रही है। 
 
बॉन्ड बाजार में प्रतिफल को लेकर आपका क्या नजरिया है?
 
10 वर्षीय बॉन्ड प्रतिफल बढ़कर फिर से 6 प्रतिशत पर पहुंच सकता है। हालांकि आरबीआई द्वारा आगे भी दरें घटाने की संभावना है, क्योंकि मुद्रास्फीति काफी हद तक नियंत्रण में है। केंद्रीय बैंक अपना ध्यान वृद्घि को लेकर बरकरार रख सकता है। 18 वर्षीय बॉन्ड प्रतिफल कुछ समय के लिए 6.76 प्रतिशत के आसपास रह सकता है। साथ ही सरकार सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों में हिस्सेदारी बिक्री पर भी ध्यान दे सकती है जिससे राजकोषीय स्थिति को नियंत्रित रखने में मदद मिलेगी। 
 
लेकिन क्या बाजार धारणा पर ऋण बाजार की चिंताएं बरकरार रह सकती हैं?
 
इसके विपरीत, हमें ऋण बाजारों में सुधारों के नए चरणों को देखना चाहिए। कुछ दबावग्रस्त खातों के संबंध में समाधान प्रक्रियाएं सही दिशा में आगे बढ़ रही हैं। सभी नियामक समाधान प्रक्रियाओं के तेज समाधान के मकसद से एक साथ आगे आ सकते हैं।  चूंकि ऋण संबंधित समस्याएं लगातार घट रही हैं, इसलिए अगले कुछ महीनों में निफ्टी यदि 12,000 के स्तर पर पहुंच जाए तो आश्चर्य नहीं होगा। ऋण बाजारों में सुधार से बाजार कारोबारियों को भरोसा मजबूत होगा। 
 
बाजार के नजरिये से किन चीजों पर ध्यान देने की जरूरत होगी?
 
यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि भारतीय उद्योग जगत के लिए राजस्व वृद्घि कैसी रहती है। कर कटौती ने आय वृद्घि की संभावना बढ़ा दी है। इसलिए विश्लेषक अपने तिमाही परिणामों से संबंधित अनुमानों में आय वृद्घि पर जोर देंगे। अच्छे मॉनसून से ग्रामीण खपत में सुधार आएगा जिससे राजस्व वृद्घि को मदद मिलेगी। यह मझोली और छोटे आकार की कंपनियों के लिए भी सकारात्मक होगा, क्योंकि इस  सेगमेंट में कई कंपनियां मुनाफा कमा रही हैं, लेकिन मजबूत वृद्घि दर्ज नहीं कर रही हैं। जब राजस्व वृद्घि में सुधार आएगा तो निश्चित रूप से मूल्यांकन भी आकर्षक दिखने लगेगा। 
Keyword: nirmala sitaraman, economy, corporate tax,,
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