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पीएमसी चेयरमैन के पास थे एचडीआईएल के शेयर

देव चटर्जी और राघवेंद्र कामत / मुंबई 09 26, 2019

एस वरियाम सिंह और एचडीआईएल का संबंध
सितंबर 2005 : वरियाम ने सह-प्रवर्तक के तौर पर एचडीआईएल के 6.50 लाख शेयरों को खरीदने के लिए 4.7 करोड़ रुपये निवेश किया
जुलाई 2006 : दो बोनस निर्गम के बाद यह शेयर 1.17 करोड़ हो गए
अगस्त 2006 : 5.48 करोड़ रुपये में 54.8 लाख शेयर हस्तांतरित किए, 62.2 लाख शेयर अपने पास रखे
जुलाई 2007 : एचडीआईएल का आईपीओ 500 रुपये प्रति शेयर पर आया
जनवरी 2008 : एचडीआईएल का शेयर मूल्य 1,000 करोड़ रुपये को पार कर गया
अगस्त 2008 : 2:7 बोनस मिलने से 80 लाख शेयर हो गए
दिसंबर 2015 : एचडीआईएल के 80 लाख शेयर के मालिक
मार्च 2016 : सिंह प्रवर्तक नहीं रहे

बिजनेस स्टैंडर्ड पीएमसी चेयरमैन के पास थे एचडीआईएल के शेयरपंजाब ऐंड महाराष्ट्र सहकारी बैंक (पीएमसी) के चेयरमैन वरियाम सिंह के पास सितंबर 2017 तक रियल एस्टेट कंपनी हाउसिंग डेवलपमेंट ऐंड इन्फ्रास्ट्रक्चर (एचडीआईएल) में 1.91 फीसदी हिस्सेदारी है। 67 वर्षीय सिंह एचडीआईएल के बोर्ड में बतौर निदेशक 2005 में शामिल हुए थे और 2015 में बैंक के चेयरमैन बनने के लिए एचडीआईएल से इस्तीफा दे दिया था। इससे पहले वह 1999 से 2005 तक पीएमसी के चेयरमैन रह चुके थे। सिंह एचडीआईएल में गैर-कार्यकारी निदेशक थे लेकिन उन्हें कंपनी के प्रवर्तकों में से एक के तौर पर दिखाया गया था। इसके साथ ही एचडीआईएल के संस्थापक वधावन की अन्य इकाइयों में भी उनकी हिस्सेदारी थी। एचडीआईएल में अपने कार्यकाल के दौरान वह पीएमसी बैंक के बोर्ड में निदेशक भी बने रहे। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) कंपनी और पीएमसी बैंक के बीच इस संबंध की जांच करेगा। नियामक ने बैंक के बोर्ड को निलंबित कर दिया है और एक प्रशासक नियुक्त किया है। सूत्रों ने कहा कि आरबीआई तीन हफ्तों में जांच पूरी करेगा।

पीएमसी बैंक द्वारा एचडीआईएल को दिया गया ऋण भी नियामकीय जांच के दायरे में है। हालांकि बैंक के ऑडिटरों ने कहा कि एचडीआईएल के कर्ज को मानक श्रेणी में रखा गया है लेकिन आरबीआई ने इसे दबाव वाला अकाउंट बताया है, जिससे  बैंक को इसे गैर-निष्पादित आस्तियां घोषित कर इसके लिए जरूरी प्रावधान करने करना होगा। बैंक ऑफ इंडिया एचडीआईएल के मामले को राष्ट्रीय कंपनी विधि पंचाट (एनसीएलटी) के मुंबई पीठ में ले गई है। पंचाट ने 20 अगस्त को ऋणशोधन प्रक्रिया शुरू की है।

रियल्टी कंपनी ने एनसीएलटी के आदेश को राष्ट्रीय विधि अपील पंचाट (एनसीएलएटी) में चुनौती दी है। 31 अगस्त, 2019 को पीएमसी बैंक ने एचडीआईएल को 100 करोड़ रुपये का अतिरिक्त कर्ज दिया था ताकि कंपनी बैंक ऑफ इंडिया के कर्ज को एकमुश्त निपटान योजना के तहत चुका सके। खबरों के अनुसार एचडीआईएल द्वारा पीएमसी बैंक से करीब 2,500 करोड़ रुपये का कर्ज लेने का अंदेशा है। 

मुंबई विश्वविद्यालय से स्नातक सिंह ने 2005 में सह-प्रवर्तक के तौर पर 4.7 करोड़ रुपये निवेश कर एचडीआईएल में 6.50 लाख शेयर खरीदे थे। दो बोनस निर्गम के बाद 2006 में कंपनी में उनकी शेयरधारिता 1.17 करोड़ शेयरों की हो गई। इसके बाद उन्होंने 5.48 करोड़ रुपये में 54.8 लाख शेयर बेच दिए और जुलाई 2007 में कंपनी के आईपीओ आने तक उनके पास 62.2 लाख शेयर बचे थे।आईपीओ का मूल्य 500 रुपये प्रति शेयर रखा गया था जिससे सिंह की हिस्सेदारी का मूल्य जनवरी 2008 में बढ़कर 1,000 करोड़ रुपये से अधिक हो गया। आईपीओ के बाद सिंह के पास एचडीआईएल की हिस्सेदारी 2.9 फीसदी थी, जो धीरे-धीरे कम होकर 1.91 फीसदी रह गई।उनके परिवार के सदस्य कुलजीत कौर के पास भी आईपीओ के बाद कंपनी की करीब 1 फीसदी हिस्सेदारी थी। एचडीआईएल ने मार्च 2016 में किए गए खुलासे में सिंह को प्रवर्तक नहीं बताया था। 

हालांकि इसके बाद एचडीआईएल में सिंह की हिस्सेदारी का क्या हुआ इसकी जानकारी नहीं है। अगर एचडीआईएल में उनके शेयर हों तो आज उसका मूल्य महज 2.6 करोड़ रुपये होगा क्योंकि इस बीच कंपनी के शेयर में काफी गिरावट आई है। 2005 में एचडीआईएल ज्वॉइन करने के बाद सिंह जमीन खरीदने में काफी मदद की, जिससे एचडीआईएल को पुरानी सोसाइटियों को पुनर्विकसित करने में मदद मिली। इसे देखते हुए वधावन ने उन्हें कंपनी और समूह की अन्य इकाइयों में सह-प्रवर्तक का दर्जा दे दिया। 

एचडीआईएल किसी समय शीर्ष डेवलपरों में से एक थी और वैश्विक निवेशकों की चहेती बन गई थी लेकिन बढ़ते कर्ज, नकदी की किल्लत और मुंबई में झुग्गियों के पुनर्वास परियोजना में देरी से संकट में फंस गई। पिछले साल जुलाई में एचडीआईएल ने आन्ध्रा बैंक का कर्ज एकमुश्त निपटान योजना के तहत चुका दिया था। आन्ध्रा बैंक भी कंपनी को एनसीएलटी ले गई थी। इसके साथ ही एचडीआईएल की सहायक इकाई गुरुआशिष कंस्ट्रक्शन ने भी दिवालिया आवेदन किया है और ऋणदाताओं की समिति ने समाधान योजना को मंजूरी दे दी है।

इस बीच, भाजपा के पूर्व सांसद किरीट सोमैया ने कहा कि उन्होंने मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराधा शाखा में बैंक के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने कहा, 'हमने पीएमसी बैंक और एचडीआईएल के शीर्ष प्रबंधन के खिलाफ पुलिस में मामला दर्ज कराया है। हम चाहते हैं कि बैंक और रियल एस्टेट कंपनी के बीच सांठगांठ की जांच हों जिन्होंने बैंक के 9.12 लाख जमाकर्ताओं के 3,000 करोड़ रुपये लूटे हैं।' उन्होंने कहा कि जमाकर्ताओं के हितों की रक्षा के लिए बैंक के खातों की फॉरेंसिक जांच कराई जानी चाहिए।
Keyword: PMC, RBI, bank,,
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