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ज़ी को राहत, फंडों पर पड़ेगा असर!

जश कृपलानी / मुंबई September 25, 2019

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने साफ किया है कि किसी भी कंपनी की ऋण प्रतिभूतियों की परिपक्वता अवधि में विस्तार को मूल्यांकन के लिहाज से डिफॉल्ट माना जाना चाहिए। बाजार नियामक ने मंगलवार रात इस बारे में एक परिपत्र जारी किया। एस्सेल समूह ने बुधवार को आधिकारिक रूप से यह घोषणा की कि उसे अपने बकाये के भुगतान के लिए विभिन्न ऋणदाताओं से समयसीमा बढ़ाने की अनुमति मिल गई है। इससे पहले सेबी के अध्यक्ष अजय त्यागी ने कहा था कि नियामक ने म्युचुअल फंडों और प्रवर्तकों के बीच गिरवी शेयर नहीं बेचने के लिए हुए करार को मान्यता नहीं दी। अलबत्ता सेबी ने इस तरह की व्यवस्था के संचालन के लिए औपचारिक रूप से कोई नियम नहीं बनाए थे। 

 
सूत्रों के मुताबिक सेबी के इस कदम से वे फंड हाउस प्रभावित हो सकते हैं जो एस्सेल समूह के प्रवर्तकों को बकाये के भुगतान की अवधि में विस्तार दे रहे हैं जबकि उनके ऋणपत्रों की परिपक्वता अवधि सितंबर में पूरी हो रही है। एक डेट फंड मैनेजर ने नाम न आने की शर्त पर कहा, 'अब ऋण प्रतिभूतियों की परिपक्वता की अवधि बढऩे पर मूल्यांकन एजेंसियों को नए नियमों के मुताबिक मूल्य निर्धारण करना होगा।' मौजूदा नियमों के मुताबिक जिन प्रतिभूतियों की रेटिंग घटाकर डी कर दी गई हो, उन पर हुए निवेश पर म्युचुअल फंडों को 75 फीसदी की कटौती करनी पड़ती है। एक अन्य फंड मैनेजर ने कहा, 'एस्सेल के मामले में नियामक म्युचुअल फंडों को अपवाद के तौर पर छूट दे सकता है क्योंकि फंड हाउसों ने सेबी का परिपत्र जारी होने से पहले ही बकाये के भुगतान की अवधि बढ़ाने के लिए प्रवर्तकों के साथ बातचीत शुरू कर दी थी।' उन्होंने कहा कि जिन म्युचुअल फंडों के ऋणपत्रों की परिपक्वता अवधि 30 सितंबर के बाद है, वे सेबी के इस कदम से प्रभावित हो सकते हैं। 
 
ऋण पर शेयर (एलएएस) ढांचे के हिस्से के रूप में एस्सेल समूह में म्युचुअल फंडों का निवेश सुरक्षित है क्योंकि प्रवर्तकों ने उनके पास अपने शेयर गिरवी रखे हैं। जनवरी में म्युचुअल फंडों और अन्य कर्जदारों ने एस्सेल के प्रवर्तकों के साथ गिरवी शेयर नहीं बेचने के लिए करार किया था। इसमें इस बात पर सहमति जताई गई थी कि जी के शेयरों में भारी गिरावट के कारण इसे डिफॉल्ट घोषित नहीं किया जाएगा। प्रवर्तकों ने रेहन के रूप में जी के शेयर गिरवी रखे हैं। साथ ही एस्सेल के ऋणदाताओं ने प्रवर्तकों को बकाये के भुगतान के लिए 30 सितंबर तक का समय दिया था। इससे कुछ ऋण प्रतिभूतियों की परिपक्वता अवधि बढ़कर 30 सितंबर हो गई थी। एस्सेल समूह ने कहा कि उसके ऋणदाता सितंबर अंत की समयसीमा को और आगे बढ़ाने पर सहमत हो गए हैं।
 
इससे पहले इस महीने एस्सेल समूह ने जी एंटरटेनमेंट में प्रवर्तकों की हिस्सेदारी बेचकर मिली राशि से कुछ बकाया चुकाया था। एक फंड हाउस के वरिष्ठ कार्यकारी ने कहा, 'हमें लगता है कि अगर प्रवर्तकों को अतिरिक्त समय दिया जाए तो उन्हें जी में अपनी हिस्सेदारी का उचित मूल्य मिल सकता है। इससे निवेशकों की बेहतर वसूली होगी।' 
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