बिजनेस स्टैंडर्ड - 4 लाख करदाताओं को नई व्यवस्था से नोटिस
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4 लाख करदाताओं को नई व्यवस्था से नोटिस

श्रीमी चौधरी / नई दिल्ली 09 25, 2019

15 दिन के अंदर करदाताओं से मांगा स्पष्टीकरण

नई व्यवस्था के तहत रिटर्न की जांच के लिए तय किए करीब 100 मानदंड
अघोषित विदेशी आय, अचल संपत्तियां, ऊंचे मूल्य वाले सौदे, दीर्घावधि पूंजी लाभ, परिजनों के नाम से निवेश आदि को बनाया आधार

बिजनेस स्टैंडर्ड 4 लाख करदाताओं को नई व्यवस्था से नोटिसआयकर विभाग ने करीब 4 लाख ऐसे करदाताओं को चिह्नित किया है जिन्हें सरकार द्वारा हाल में शुरू की गई मानव हस्तक्षेप के बिना आकलन योजना के तहत जांच का सामना करना पड़ सकता है। मामले के जानकार एक अधिकारी ने कहा कि इनमें से करीब 1 लाख से अधिक करदाताओं को नोटिस भेजकर उनकी ओर से दाखिल किए गए रिटर्न पर 15 दिन के अंदर स्पष्टीकरण देने को कहा गया है। हालांकि करीब 10,000 नोटिस करदाताओं तक नहीं पहुंच पाए और कुछ वापस आ गए। जांच से संबंधित सभी नोटिस को भेजने की अंतिम समयसीमा 30 सितंबर है।

समझा जाता है कि कर विभाग ने चालू वर्ष के लिए कंप्यूटर आधारित जांच चयन (सीएएसएस) चक्र को अंतिम रूप दे दिया है और नई व्यवस्था के तहत रिटर्न की जांच के लिए करीब 100 मानदंड तय किए हैं। सूत्रों ने कहा कि इनमें से कुछ मानदंडों में अघोषित विदेशी आय और अचल संपत्तियां, ऊंचे मूल्य वाले सौदे, दीर्घावधि पूंजी लाभ को सही तरीके से नहीं बताना, टीडीएस के दावे का कर फॉर्म से मेल नहीं खाना, परिजनों के नाम पर किए गए निवेश का खुलासा नहीं करना, गलत रिटर्न भरना, बीते वर्षों में कर चोरी आदि शामिल हैं। इन्हीं के आधार पर करदाताओं को ये नोटिस भेजे गए हैं। कार्य योजना के अनुसार शुरुआती चरण में संपूर्ण ई-आकलन पूरी तरह से मानव हस्तक्षेप रहित नहीं होगा क्योंकि संबंधित क्षेत्र के अधिकारी करदाता के प्रोफाइल को समझेंगे और नोटिस जारी करते समय इसे सर्वर पर देखेंगे।

आय कर विभाग द्वारा तैयार किए गए आकलन मॉड्यूल के मुताबिक जांच के लिए चुने गए मामलों में नोटिस जारी किए जाएंगे। नोटिस जारी होने के बाद न्यायिक आकलन अधिकारी इनकम टैक्स बिज़नेस ऐप्लिकेशन (आईटीबीए) के जरिये इसमें आगे की कार्यवाही करेगा। यह अधिकारी आईटीबीए पोर्टल से करदाताओं के प्रोफाइल की जानकारी हासिल कर सकता है। इनमें उसका पैन, आईटीआर और टीडीएस जानकारी आदि शामिल है।

इसके साथ ही एक आकलन अधिकारी को इन नोटिसों का सत्यापन करना होगा और यह भी सुनिश्चित करना होगा कि नोटिस सही ढंग से पहुंच गए या नहीं। जिन मामलों में नोटिस वापस आए या किसी कारण से नहीं पहुंच पाए, उनका प्रिंटआउट निकालकर संबंधित करदाता को भेजी जाएगी। इसके अलावा अगर रिटर्न ऐसे आकलन अधिकारी को मिलता है जो न्यायिक आकलन अधिकारी नहीं है तो करदाता की स्थायी खाता संख्या तुरंत न्यायिक आकलन अधिकारी को हस्तांतरित की जाएगी।मॉड्यूल में साथ ही कहा गया है कि अगर कार्यवाही आकलन अधिकारी के पास लंबित है तो इसका मौजूदा व्यवस्था के तहत बनाई गई कार्यवाही में विलय कर दिया जाएगा।

विभाग ने नोटिस की भाषा पर बहुत ध्यान दिया है ताकि इसे सरल और सहज बनाया जा सके। एक करदाता को भेजे गए नोटिस में कहा गया है, 'हम मानते हैं कि आपने रिटर्न भरने में काफी सतर्कता दिखाई होगी लेकिन हमें कुछ बिंदुओं पर स्पष्टïीकरण चाहिए।' 13 सितंबर से लागू हुई ई-आकलन योजना, 2019 का मकसद टैक्स रिटर्न में मानवीय हस्तक्षेप खत्म करना है। इसके तहत धारा 143 (2) कुछ मामलों को जांच के लिए चुना जाएगा। राष्टï्रीय और क्षेत्रीय ई-आकलन केंद्रों के जरिये ऐसा किया जाएगा जो स्वाचालित ढंग से मामलों का आवंटन करेंगे।

Keyword: income tax, CBDT, आयकर विभाग कराधान,
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