बिजनेस स्टैंडर्ड - आईबीसी पर दिशानिर्देश जल्द
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आईबीसी पर दिशानिर्देश जल्द

विभिन्न नियामकों के लिए दिशानिर्देश, सफल बोलीदाताओं के हितों की होगी रक्षा
रुचिका चित्रवंशी और ईशिता आयान दत्त / नई दिल्ली/कोलकाता 09 25, 2019

...आईबीसी मामला

बोलीदाताओं को दावे और अधिग्रहीत संपत्तियों के जोखिम से सुरक्षा देने के लिए जल्द आएगा दिशानिर्देश
जेएसडब्ल्यू स्टील और टाटा स्टील जैसी कंपनियां समाधान बाद पेश आने वाली समस्याओं से मंत्रालय को करा चुकी हैं अवगत
हाल में हुए संशोधन के अनुसार समाधान योजना सभी संबंधित पक्षों पर होगी लागू
कानून विशेषज्ञों और कंपनियों की नजर में स्थिति और स्पष्ट किए जाने की जरूरत

बिजनेस स्टैंडर्ड आईबीसी पर दिशानिर्देश जल्दऋणशोधन अक्षमता और दिवालिया (आईबीसी) मामलों में जीते बोलीदाताओं के हितों की रक्षा के लिए सरकार जल्द ही दिशानिर्देश लाने वाली है। ये निर्देश उन्हें आईबीसी प्रक्रिया पूरी होने के बाद आने वाले दावों और उनकी खरीदी गई संपत्तियों को जोखिम से बचाएंगे। कंपनी मामलों के मंत्रालय के पास आईबीसी मामले पूरे होने के बाद उठने वाली पेचीदा समस्याओं को लेकर कई शिकायतें आ चुकी हैं और शिकायत करने वाली कंपनियों में जेएसडब्ल्यू तथा टाटा स्टील भी शामिल हैं। मंत्रालय यह भी सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहा है कि जांच एजेंसियां जांच के दायरे में आई कंपनियों की परिसंपत्तियां जब्त नहीं करें। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया, 'किसी कंपनी के आईबीसी प्रक्रिया से गुजरने के बाद सभी दावे खत्म हो जाते हैं। इस कानून का उद्देश्य स्पष्ट करने के लिए हम व्यापक दिशानिर्देश जारी करेंगे।' मगर उच्च न्यायालय के विरोधाभासी आदेशों से बोलीदाता पसोपेश में हैं।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में बजट सत्र के दौरान अपने भाषण में सभी बोलीदाताओं को यह आश्वासन दिया था कि सफल आवदेक के खिलाफ कोई आपराधिक मामला नहीं चलेगा और ऐसी प्रक्रियाओं के एि केवल निगमित कर्जदारों को ही जिम्मेदार ठहराया जाएगा। कंपनी मामलों का मंत्रालय जरूरत पड़ने पर इन प्रक्रियाओं को अंतिम रूप देने के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल की अनुमति भी लेगा। अधिकारी ने कहा कि मंत्रालय ऐसी अपेक्षा कर रहा है कि अन्य सरकारी एजेंसियां आईबीसी प्रक्रिया से गुजर चुकी कंपनियों के मामले में देनदारी से जुड़े दावे आदि नहीं करने संबंधी दिशानिर्देशों का पालन करेंगे।

माना जा रहा है कि सरकार जब दिशानिर्देशों में ये बातें स्पष्ट कर देगी तो विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी), केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड और केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड समेत विभिन्न नियामक इन बातों का पालन करेंगे।  हाल में ही आईबीसी संहिता में एक संशोधन किया है, जिसके तहत केंद्र सरकार, राज्य सरकार अथवा बकाया कर्ज वसूलने के लिए बैठे स्थानीय निकाय समाधान योजना को मानने के लिए बाध्य होंगे। दिशानिर्देश इसी के मुताबिक बनाए जाएंगे।

दूरसंचार, खनन और रियल एस्टेट जैसे क्षेत्रों में आईबीसी मामलों को तब बाधाओं का सामना करना पड़ा है, जब विभिन्न सरकारी विभाग आईबीसी के तहत मंजूर प्रक्रिया की अनदेखी कर अलग-अलग मंजूरी प्रक्रियाओं पर अड़ गए। पीडब्ल्यूसी में पार्टनर - परामर्श सेवाएं अंशुल जैन कहते हैं, 'ऐसा लगता कि इस संशोधन में स्वीकृत योजनाओं को देश भर में न्यायपालिका के हस्तक्षेप से अलग रखने के एक अहम बिंदु पर ध्यान नहीं दिया गया है। न्यायापालिका या अन्य न्यायाधिकरणों को भी स्वीकृत योजनाएं मानने के लिए बाध्य किया जाता तो तमाम तरह के असमंजस पैदा ही नहीं होते।'

एजेडबी ऐंड पार्टनर्स में पार्टनर सुहर्ष सिन्हा भी मानते हैं कि आईबीसी में हुए हालिया संशोधन में कर देनदारी का ध्यान रखा गया है और इसके मद्देनजर इसमें जांच एजेंसियों को भी शामिल करने की पर्याप्त गुंजाइश है। सिन्हा ने कहा कि हालांकि निगमित कर्जधारक को आपराधिक मुकदमों से बचाने के लिए स्थिति और स्पष्ट करने की जरूरत है। जेएसडब्ल्यू के निकटवर्ती सूत्रों ने कहा कि अगर निगमित कर्जधारक फंसते हैं तो इससे समाधान प्रक्रिया पर असर पड़ेगा और समाधान आवेदक भी इससे बच नहीं पाएगा। 

Keyword: IBC, code, IBBI, NCLT, RBI,,
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