बिजनेस स्टैंडर्ड - सहकारी बैंकों का नियमन
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Monday, October 21, 2019 08:29 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम विशेष खबर

सहकारी बैंकों का नियमन

संपादकीय /  September 25, 2019

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने मंगलवार को पंजाब ऐंड महाराष्ट्र कोऑपरेटिव बैंक लिमिटेड (पीएमसी) के कारोबार पर पाबंदी लगा दी। इसके परिणामस्वरूप अगले छह महीनों तक बैंक से नकद निकासी 1,000 रुपये प्रति खाते तक सीमित कर दी गई। इसके अलावा बैंक न तो नया ऋण दे सकेगा, न नई जमा ले सकेगा और न ही किसी तरह का भुगतान कर सकेगा। जाहिर है इस परिणाम के चलते जमाकर्ताओं में घबराहट का माहौल बन गया। अभी यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं है कि नियामक को बैंक पर ऐसे प्रतिबंध क्यों लगाने पड़े लेकिन खबरें आ रही हैं कि इसका संबंध हाउसिंग डेवलपमेंट ऐंड इन्फ्रास्ट्रक्चर (एचडीआईएल) को बैंक द्वारा दिए गए ऋण से है। यह कंपनी राष्ट्रीय कंपनी विधि पंचाट के समक्ष दिवालिया प्रक्रिया के लिए प्रस्तुत है, हालांकि रियल्टी कंपनी ने इसे चुनौती दी है। एचडीआईएल को दिए गए ऋण से निपटने के मामले में अंकेक्षक और नियामक में मतभेद है। बैंक के संचालन से जुड़े कुछ मुद्दे भी हो सकते हैं क्योंकि बैंक और एचडीआईएल अतीत में भी आपस में जुड़े रहे हैं। ऐसा लगता है कि बैंक का पतन अचानक हुआ और नियामक द्वारा परीक्षण पूरा होने के बाद चीजें अधिक स्पष्ट होकर सामने आएंगी। गत वित्त वर्ष के आखिर में पीएमसी ने 100 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा दर्शाया था। बैंक में 11,000 करोड़ रुपये की राशि जमा थी। बैंक की गैर निष्पादित परिसंपत्तियों का स्तर 2.19 फीसदी था जो बेहद कम है।

 
नियामक और सरकार को चाहिए कि मौजूदा वित्तीय परिदृश्य में सहकारी बैंकों की महत्ता का नए सिरे से आकलन करें ताकि ऐसी घटनाओं का दोहराव रोका जा सके। आरबीआई के मुताबिक गत वित्त वर्ष के अंत में देश में कुल 1,542 शहरी सहकारी बैंक थे। इनमें से 26 पर नियामकीय पाबंदी थी और 46 की परिसंपत्ति नकारात्मक थी। कुछ मामलों में कोर बैंकिंग प्रणाली को अपनाने में देर होती भी दिखी क्योंकि बैंकों के पास पूंजी और विशेषज्ञता का अभाव था। इनमें से कई बैंकों में असली मुद्दा संचालन का था। इस बात से भी कोई मदद नहीं मिलती कि इनका संचालन आरबीआई और संबंधित राज्य की सहकारी समिति का पंजीयक दोनों करते हैं। इतना ही नहीं पूंजी से जुड़े कई मुद्दे भी हैं। शहरी सहकारी बैंक सार्वजनिक निर्गम या प्रीमियम शेयरों के माध्यम से पूंजी नहीं जुटा सकते। उन्हें अल्पावधि की नकदी जरूरतों को पूरा करने में भी दिक्कत होती है क्योंकि सबकी पहुंच सीधी आरबीआई की नकदी सहायता तक नहीं होती। सहकारी बैंकों की विफलता के पीछे अक्सर मूल वजह उनकी अल्प पूंजी रहती है। उदाहरण के लिए शहरी सहकारी बैंक 25 लाख रुपये से शुरू हो सकते हैं जबकि सूक्ष्म वित्त बैंकों के लिए कम से कम 100 करोड़ रुपये की पूंजी चाहिए। ऐसे बैंकों में प्राय: राजनीतिक हित जुड़े रहते हैं।
 
यकीनन अतीत में सहकारी बैंकों की भूमिका काफी अहम रही है। इसमें औपनिवेशिक समय भी शामिल है। परंतु वाणिज्यिक बैंकों के प्रसार और नई तकनीक के आगमन के बाद हाल के वर्षों में उनकी प्रासंगिकता कम हुई है। पूंजी और विशेषज्ञता की कमी के चलते इन बैंकों के लिए अन्य वित्तीय संस्थानों से मुकाबला कर पाना मुश्किल है। ऐसे में व्यापक समीक्षा और कानून में संशोधन जरूरी है ताकि नियमन, विलय और कुछ बैंकों को वाणिज्यिक या सूक्ष्म वित्त बैंकों में बदलने के मामले में आरबीआई को अधिक अधिकार दिए जा सकें। इससे उन्हें भी पूंजी जुटाने और प्रतिभाओं को आकर्षित करने में मदद मिलेगी। नीतिगत पहल के अभाव में ये बैंक और अधिक संकटग्रस्त होते जाएंगे।
Keyword: nirmala sitaraman, bank, merge, PMC,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या राजकोषीय घाटे के लक्ष्य से चूकेगी सरकार?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.