बिजनेस स्टैंडर्ड - कुछ समय तक प्याज में रहेगी तेजी
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कुछ समय तक प्याज में रहेगी तेजी

राजेश भयानी / मुंबई September 25, 2019

लोगों को फिलहाल प्याज के अधिक दाम झेलने ही पड़ेंगे। इसका कारण है बाजार में प्याज की कम उपलब्धता। सरकार द्वारा अब तक किए गए कई उपायों के वांछित परिणाम नहीं मिले हैं। खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने प्याज पर स्टॉक सीमा लगाने के लिए अंतिम कार्रवाई करने की कल चेतावनी दी थी। पिछले एक महीने में प्याज के दामों में तीव्र वृद्धि होने के बाद विगत 10 दिनों के दौरान केंद्र सरकार ने विभिन्न चरणों में उपाय किए हैं। अगस्त की शुरुआत में प्याज के दाम 13 रुपये प्रति किलोग्राम थे जो अब महाराष्ट्र में सबसे बड़ी मंडी लासलगांव में बढ़कर 40 रुपये हो चुके हैं। यह दाम तीन साल के शीर्ष स्तर पर हैं। कुल प्याज का एक-तिहाई उत्पादन महाराष्ट्र में होता है।

 
कल मंत्री ने कहा था कि मौजूदा मांग पूरी करने के लिए महाराष्ट्र में प्याज का पर्याप्त स्टॉक है। हालांकि ऐसा प्रतीत होता है कि दाम बढ़ाने के लिए आपूर्ति रोकी जा रही है। सरकार इस आपूर्ति में सुधार करने और प्याज उपलब्धता में ऐसी किसी कमी को थामने के लिए केंद्रीय बफर स्टॉक से आपूर्ति के सभी उपाय कर रही है और अगर कारोबारियों के सटोरिया व्यवहार की वजह से दामों में नरमी नहीं आती है तो सरकार स्टॉक की सीमा लागू करने पर भी विचार करेगी। इसके तहत कई तरह के उपाय किए गए हैं जिनमें निर्यात रोकना और बफर स्टॉक जारी करना भी शामिल है। सरकार ने कल यह भी कहा था कि बांग्लादेश और श्रीलंका को न्यूनतम निर्यात मूल्य से कम पर दर्ज किया गया निर्यात तुरंत रोका जाएगा और सरकार के इस फैसले का उल्लंघन करते पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
 
हालांकि विशेषज्ञों को नहीं लगता कि इन सभी कार्रवाइयों के बावजूद दामों में इतनी जल्दी गिरावट आएगी। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा कि रबी सीजन की बुआई से पहले जनवरी में प्याज की कीमतें गिरकर पांच रुपये के स्तर से भी नीचे चली गई थीं जिसके परिणामस्वरूप कुछ किसानों ने अन्य फसलों का रुख कर लिया था। लेकिन इससे भी महत्त्वपूर्ण बात यह है कि इस सीजन में देर से शुरू हुई बारिश और उसके बाद महाराष्ट्र तथा कर्नाटक में भारी बारिश होने से फसल को नुकसान हुआ। देश के प्याज उत्पादन में आधा योगदान इन दोनों राज्यों का रहता है।
 
कर्नाटक की फसल अगस्त और सितंबर की शुरुआत में आती है। अक्टूबर-नवंबर में स्थानीय फसल आने तक महाराष्ट्र को इसी से आपूर्ति होती है। अधिकारी ने कहा कि भारी बारिश और नुकसान की वजह से पड़ोसी राज्य से आपूर्ति प्रभावित हो गई है जिससे दामों पर असर पड़ा है। एक बड़े निर्यातक ने भी इस बात का समर्थन किया है। एक व्यापारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि कुछ किसानों और व्यापारियों ने प्याज का स्टॉक कर रखा है और इसे धीरे-धीरे बाजार में जारी कर रहे हैं क्योंकि पिछले सीजन में उन्होंने दामों में गिरावट की वजह से नुकसान उठाया था। सूत्रों का कहना है कि अगर स्टॉक सीमा लगाई जाती है तो यह स्टॉक बाजार में आने लगेगा लेकिन दीवाली के बाद महाराष्ट्र की फसल आवक होने तक कुल आपूर्ति कम रहने से दामों में बहुत ज्यादा गिरावट नहीं आएगी।
 
देश में लगभग 2.3 करोड़ टन प्याज उत्पादन होता है। इस सीजन में अधिक दामों की वजह से भी उपभोग प्रभावित हुआ है। कई रेस्तरांओं ने तो प्याज परोसना ही बंद कर दिया है या उसमें कटौती कर दी है। मुंबई के बाजार में इस सीजन में प्याज के दाम 60 रुपये प्रति किलोग्राम तक जा चुके हैं।
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