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बैंकों में ठेके पर काम करने वालों की नौकरी को खतरा

नम्रता आचार्य / कोलकाता September 23, 2019

कुदरती मलिक 43 साल के हो चुके हैं और ज्यादातर प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं में वह शामिल नहीं हो सकते हैं। उन्होंने 7 केंद्र व राज्य सरकार सेवाओं की भर्ती की लिखित परीक्षा पास की। अंग्रेजी में एमए मलिक ने कृषि सेवा निदेशालय में क्लर्क पद के लिए अंतिम परीक्षा भी उत्तीर्ण की। बहरहाल आखिरी पल में विवाद के कारण परीक्षा रद्द हो गई। 2014 में उन्होंने एक सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी शुरू की और कोलकाता के बाहरी इलाके में सरकारी बैंक एटीएम पर काम करने लगे।  हाल में उनकी किस्मत ने नया मोड़ लिया। पिछले डेढ़ महीने से मलिक के पास कोई नौकरी नहीं है। एटीएम में छंटनी का दौर चला और वे इसके शिकार बन गए। मलिक अभी भी रोजाना एटीएम की रखवाली करते हैं क्योंकि उनका एसोसिएशन छंटनी के खिलाफ लड़ रहा है और उसने ऐसा करने की सलाह दी है। 
 
मलिक अब सरकारी बैंकों के प्रस्तावित महा विलय के कर्मचारियों के साथ भी भाईचारा दिखा रहे हैं, जिनकी बैंकिंग क्षेत्र में आने वाले दिनों में नौकरियां जाने वाली हैं।  बंगाल प्रोविजनल बैंक कॉन्ट्रैक्ट इंप्लाई एसोसिएशन के महासचिव सैयद मोहम्मद शहाबुद्दीन ने कहा, 'विलय के बाद अभी ठेके पर काम करने वाले कर्मचारियों की और छंटनी होने की संभावना है। सरकार ने सिर्फ स्थाई कर्मचारियों को आश्वस्त किया है कि उनकी नौकरी नहीं जाएगी। अस्थाई कर्मचारियों को सरकार और बैंक प्रबंधन कोई भी आश्वस्त नहीं कर रहा है।' 
 
विलय प्रक्रिया में शामिल एक सरकारी बैंक के प्रमुख के मुताबिक ठेके पर काम करने वाले लोगों की नौकरियां जाना 'गंभीर चिंता का विषय' है।  ठेके पर काम करने वालों में हाउसकीपिंग, सिक्योरिटी कर्मी व लिफ्ट चलाने वाले शामिल हैं, जिनके ऊपर असर पडऩे की संभावना है। एक बैंकर ने कहा कि उन इलाकों में नौकरियां जाने की संभावना ज्यादा है, जहां सभी बैंकों की उपस्थिति है और उनका विलय कर दिया गया है।  उदाहरण के लिए पूर्व में पंजाब नैशनल बैंक (पीएनबी) और यूनाइटेड बैंक आफ इंडिया  दोनों की तमाम शाखाएं हैं। विलय के बाद शाखा कार्यालयों, शाखाओं व एटीएम की संख्या को तार्किक बनाया जाएगा। पीएनबी, ओरिएंटल बैंक आफ कॉमर्स और यूनाइटेड बैंक आफ इंडिया को मिलाया जाएगा। इसके साथ ही स्थानांतरण से कुछ व्यवधान की संभावना है, क्योंकि उन्हें सर्पोट करने वाले ठेका श्रमिकों जैसे वाहन चालकों को नौकरियां गंवानी पड़ सकती है। 
 
बहरहाल इस समय तक तो ठेके पर काम करने वाले कर्मचारियों की छंटनी एटीएम तक सीमित थी। जून में भारतीय रिजर्व बैंक ने सलाह दी थी कि सभी बैंक ई सर्विलांस व्यवस्था देश के सभी एटीएम पर करें, जिससे समय से अलर्ट और तत्काल प्रतिक्रिया सुनिश्चित हो सके। ज्यादातर सरकारी बैंक पहले से ही एटीएम बंद कर रहे हैं, साथ ही सिक्योरिटी गार्ड भी कम हो रहे हैं। एक एटीएम पर हर समय सिक्योरिटी रखने पर लागत करीब 40,000 से 50,000 रुपये महीने आती है, वहीं ई सर्विलांस की मासिक लागत 5,000 रुपये से 15,0000 रुपये तक है। 
 
रिजर्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक जून 2017 और जून 2019 के बीच ऑफसाइट और ऑनसाइट एटीएम की संख्या करीब 2,275 कम हुई है।  बंगाल प्रोविजनल बैंंक कॉन्ट्रैक्ट इंप्लाई एसोसिएशन के मुताबिक सिर्फ पश्चिम बंगाल में एटीएम पर सिक्योरिटी गार्ड का काम करने वाले 6,400 लोगों की नौकरियां गई हैं। वहीं अन्य राज्यों के सटीक आंकड़े नहीं हैं।  सेंट्रल एसोसिएशन आफ प्राइवेट सिक्योरिटी इंडस्ट्री के चेयरमैन विक्रम सिंह ने कहा कि विलय के साथ और नौकरियां जा सकती हैं। इस फैसले से कुछ स्टार्टअप सहित तमाम सिक्योरिटी कंपनियों को काम समेटना पड़ा है। बहरहाल फिक्की के चेयरमैन ऋतुराज सिन्हा ने कहा कि निजी सिक्योरिटी कम्युनिटी, खासकर सिक्योरिटी गार्डों का अन्य क्षेत्रों में समायोजन हो रहा है। 
Keyword: bank, loan, debt, RBI, NPA,,
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