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फैशन रिटेलर गांवों तक पहुंचा रहे वैश्विक रुझान

समरीन अहमद /  September 23, 2019

दो वर्ष पहले जब वी-मार्ट ने झारखंड के गुमला में अपना पहला रिटेल स्टोर खोला तो स्थानीय लोग दुकान के भीतर चप्पल जूते उतार कर जाते थे। यह झारखंड में एक चतुर्थ श्रेणी का कस्बा है। माओवाद के प्रभाव वाले इस इलाके में यह तब सबसे बड़ा स्टोर हुआ करता था। इसके आधुनिक और भव्य सजावट को देखते हुए खरीदार इसमें नंगे पांव जाना ही ठीक समझते थे। तब से अब तक बहुत कुछ बदल चुका है। इंटरनेट के प्रसार के कारण लोगों में अच्छा दिखने की चाहत बढ़ी है। यही वजह है कि तीसरी और चौथी श्रेणी के कस्बों में इस तरह की खुदरा शृंखला का तेजी से विस्तार हुआ है।  

 
वी-मार्ट के मुख्य वित्तीय अधिकारी आनंद अग्रवाल कहते हैं, 'एक ओर जहां लोगों की चाहतें बढ़ रही हैं और लोग सुंदर दिखना चाहते हैं तो वहीं आज भी वे कपड़े को एक निवेश के तौर पर ही खरीद रहे हैं। यह खरीदारी उनकी आमदनी के स्तर पर निर्भर करता है जिसमें अभी भी अधिक बढ़ोतरी नहीं हुई है। अधिक कपड़े रखने वालों में कॉलेज जाने वाले छात्र और युवा पेशेवर ही अधिक हैं।'  पसंद में आए इस बदलाव से मजबूती पाकर खुदरा शृंखला क्षेत्र की यह नामी कंपनी सालाना करीब 22 फीसदी की दर से वृद्घि कर रही है और इस साल 60 नए स्टोरों के साथ आक्रामक तौर पर अपनी मौजूदगी बढ़ाने पर विचार कर रही है। 
 
ज्यादातर दूसरी और तीसरी श्रेणी के शहरों में कारोबार करने वाली इस कंपनी के 18 राज्यों में 236 स्टोर हैं। इसने हाल ही में पश्चिम बंगाल के कोंताई और हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा में स्टोर खोले हैं। 1,430 करोड़ रुपये मूल्य की इस कंपनी के लिए दूसरी तिमाही सपाट रही है लेकिन उसे त्योहारी सीजन में ग्राहकों की संख्या में 25-30 फीसदी की वृद्घि होने की उम्मीद है। अग्रवाल कहते हैं कि इन इलाकों में कमर से ऊपर तक पहने जाने वाली जींस और बिना बांह वाले डेनिम की जबरदस्त मांग है। खुदरा शृंखला वैश्विक फैशन रुझानों पर करीब से ध्यान रख रही है जिसे उपभोक्ताओं को एक चौथाई कीमत पर मुहैया कराई जाती है। 
 
वी-मार्ट ने हाल ही में अपना ऑनलाइन प्रारूप भी शुरू किया है और यह घर तक आपूर्ति की सेवा देन जा रही है। इसके लिए कंपनी ने 40 लॉजिस्टिक पार्टनरों के साथ साझेदारी की है। इससे दुर्गा पूजा के दौरान बिक्री को बढ़ाने में काफी मदद मिलेगी। उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और मध्य प्रदेश में कारोबार करने वाली एक और फैशन रिटेल शृंखला वीबाजार के मुख्य प्रबंध निदेशक हेमंत अग्रवाल कहते हैं, 'ई-कॉमर्स नए फैशन रुझानों को लेकर दिलचस्पी पैदा करने में भी बड़ी भूमिका निभा रही हैं। इससे पहले नए रुझान छोटे शहरों तक छह महीने बाद पहुंचते थे लेकिन अब वह स्थिति नहीं रही।' 
 
कंपनी के कुल कारोबार में करीब 85 फीसदी हिस्सा वस्त्रों की खुदरा बिक्री से जुड़ा है। वीबाजार के फिलहाल 55 स्टोर हैं और त्योहारी सीजन में यह 12 और नए स्टोर खोलेगी। इन नए स्टोरों में से प्रत्येक की पूंजीगत व्यय 90 लाख रुपये होगी और इसके साथ ही वह ओडिशा के बाजार में कदम रखने जा रही है। अगले वर्ष के आरंभ में कंपनी की योजना 25 नए स्टोर खोलने की है। उन्होंने कहा, 'त्योहारी सीजन में हम ग्राहकों की संख्या में 20 फीसदी की वृद्घि होने की उम्मीद कर रहे हैं।' ग्राहकों की संख्या में वृद्घि पिछले वर्ष के मुकाबले थोड़ी कम रह सकती है। डेलॉयट इंडिया में पार्टनर अनिल तलरेजा ने स्पष्टï किया कि इसकी वजह कोई आर्थिक सुस्ती नहीं है बल्कि ई-कॉमर्स की बिक्री भी जोर पकड़ रही है।
 
छोटे शहरों में बदलते फैशन रुझानों को पूरा करने के लिए खुदरा शृंखला 1-इंडियाफैमिलीमार्ट मौजूदा वित्त वर्ष में मणिपुर के सेनापति और असम के शिवसागर जैसे शहरों में 18 नए स्टोर खोलने जा रही है। इनमें से प्रत्येक स्टोर पर 80 लाख रुपये का निवेश होगा। कंपनी ने अगले पांच वर्ष में 2,300 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से 350 स्टोर खोलने की योजना बनाई है। 72 शहरों में कंपनी के 95 स्टोर हैं जहां 100-2,000 रुपये तक के कपड़े मिलते हैं। 1-इंडियाफैमिलीमार्ट के सह संस्थापक और मुख्य कार्याधिकारी जे पी शुक्ला कहते हैं, 'इस साल महिलाओं के पायजामे (हरेम) और पलाजो सबसे अधिक बिके जिसके बाद डेनिम कुर्ती का स्थान है।'    किशोर बियाणी की अगुआई वाले फ्यूचर समूह के वैल्यू-फैशन उपक्रम एफबीबी की योजना अगले दो वर्ष में 350 करोड़ रुपये के निवेश से 140 एक्सक्लुसिव आउटलेट खोलने की है।  
Keyword: fashion, retailer, v mart, jharkhand,,
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