बिजनेस स्टैंडर्ड - पीएमएलए पर आईबीसी को मिली प्राथमिकता
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Saturday, January 29, 2022 07:16 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम खबर

पीएमएलए पर आईबीसी को मिली प्राथमिकता

आशिष आर्यन /  September 22, 2019

धन शोधन निरोधक अधिनियम (पीएमएलए) के मुकाबले ऋण शोधन अक्षमता एवं दिवालिया संहिता (आईबीसी) को प्राथमिकता दिए जाने के एक महत्त्वपूर्ण फैसले के तहत पीएमएलए के अपील अधिकारी ने स्टर्लिंग समूह की कुछ परिसंपत्तियों को वापस करने का आदेश दिया है। ये परिसंपत्तियां भारी ऋण बोझ तले दबी कंपनी स्टर्लिंग बायोटेक की सहायक इकाई पीएमटी मशीन्स की हैं जिन्हें प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा जब्त कर ली गई थी। स्टर्लिंग बायोटेक की सहायक इकाई पीएमटी मशीन्स के रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल (आरपी) ने अपील प्राधिकरण में याचिका दायर कर कहा था कि प्रवर्तन निदेशालय ने गलत तरीके से उसकी परिसंपत्तियों को जब्त कर लिया। याचिका में आरपी ने दलील दी थी कि उन परिसंपत्तियों का अधिग्रहण कथित अपराध से पहले हुआ था और आरोप कथित अपराध की तारीख से पहले लगाए गए थे।

 
पीएमएलए के लिए अपील प्राधिकरण ने अपने फैसले में कहा कि प्रवर्तन निदेशालय द्वारा जब्त की गईं परिसंपत्तियों का नितिन संदेसरा, चेतन संदेसरा और दीप्ति संदेसरा द्वारा किए कथित अपराध से कोई संबंध नहीं है और इसलिए आरपी को वे परिसंपत्तियां अवश्य लौटाई जानी चाहिए ताकि पीएमटी मशीन्स के लिए त्वरित दिवालिया समाधान सुनिश्चित हो सके। न्यायमूर्ति मनमोहन सिंह की अध्यक्षता वाले पीएमएलए अपील प्राधिकरण के एकल पीठ ने माना कि बैंकों द्वारा शुरू की गई वसूली की प्रक्रिया 'वैध एवं कानूनी वसूली' है और उसे 'बिना किसी वैध कारण के वर्षों तक अवरुद्ध' नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय अभियुक्त की निजी संपत्तियों और अन्य सभी परिसंपत्तियों को जब्त नहीं कर सकता है।
 
हालांकि अपील प्राधिकरण ने अपने इस फैसले में स्पष्ट किया है कि कथित आपोपी के खिलाफ चल रही किसी भी प्रकिया पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा जिसमें दुनिया के किसी भी भाग में चल रही अथवा चलने वाली प्रत्यर्पण की प्रकिया भी शामिल है। आरपी के वकील और कर्म लॉ एसोसिएट्स के संस्थापक पार्टनर राजेंद्र बेनीवाल ने कहा, 'इस फैसले से दिवालिया प्रक्रिया के अपेक्षित लक्ष्य को पूरा करने का मार्ग प्रशस्त हुआ है। प्रवर्तन निदेशालय द्वारा परिसंपत्तियों को जब्त किए जाने के कारण कॉरपोरेट ऋण शोधन अक्षमता समाधान प्रक्रिया (सीआईआरपी) के तहत दबावग्रसत परिसंपत्तियों का अधिकतम मूल्य हासिल करने का उद्देश्य पूरा नहीं हो सकता था।'
 
आरपी ने अपनी याचिका में कहा था कि ईडी द्वारा इन संपत्तियों को जब्त किए जाने से पीएमटी मशीन्स की कॉरपोरेट ऋण शोधन अक्षमता समाधान प्रक्रिया में देरी हो रही है। इस कंपनी को 1993 में स्टर्लिंग बायोटेक ने अधिग्रहण किया था। इसे 2018 में दिवालिया समाधान के लिए एनसीएलटी के मुंबई पीठ के समक्ष पेश किया गया था।  पीएमटी मशीन्स ने 2011-12 में अपने ऋण पुनर्भुगतान में डिफॉल्ट किया था जिसके बाद यूको बैंक के नेतृत्व में बैंकों के कंसोर्टियम ने 2013 में उसके खिलाफ ऋण वसूली ट्रिब्यूनल (डीआरटी) में शिकायत की थी।
Keyword: IBC, code, IBBI, NCLT, court, PMLA,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या एनएआरसीएल शुरू होने से बैंकों को फंसे कर्ज से मिलेगी निजात?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.