बिजनेस स्टैंडर्ड - एसआईपी वैरिएंट में कैसे और कब करें निवेश
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एसआईपी वैरिएंट में कैसे और कब करें निवेश

संजय कुमार सिंह /  September 22, 2019

पिछले कुछ साल में भारतीय निवेशक सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) के जरिये निवेश का मंत्र सीख और अपना चुके हैं। म्युचुअल फंड उद्योग में एसआईपी खातों की संख्या 27.8 लाख तक पहुंच चुकी है। जुलाई, 2019 में उद्योग को एसआईपी से कुल 8,324 करोड़ रुपये का निवेश हासिल हुआ और एसआईपी के प्रबंधनाधीन परिसंपत्तियां 2,81,393 करोड़ रुपये रहीं। अब बहुत से म्युचुअल फंड सामान्य एसआईपी में फेरबदल की कोशिश कर रहे हैं ताकि इसे ज्यादा प्रभावी बनाया जा सके और निवेशकों का प्रतिफल बढ़ाया जा सके।  सामान्य एसआईपी में निवेशक हर महीने एक निश्चित राशि निवेश करता है। जब बाजार में गिरावट आती है तो उसे एसआईपी के जरिये ज्यादा यूनिट मिल जाती हैं। जब बाजार चढ़ता है तो एसआईपी से कम यूनिट मिलती हैं। इस तरह लंबी अवधि में यूनिटों की खरीद लागत औसत हो जाती है। इसे रुपये में लागत का औसत होना भी कहा जाता है। असल में एसआईपी म्युचुअल फंड निवेश में समय के जोखिम को खत्म कर देती है। निवेशक को इस बात की चिंता नहीं करनी पड़़ती कि बाजार में दाखिल होने का यह सही समय है या नहीं। खरीद की लागत औसत हो जाने से प्रतिफल सुधारने में भी मदद मिलती है।

 
रैंक एमएफ का स्मार्टसिप प्लस
 
सैम्को सिक्योरिटीज की म्युचुअल फंड वितरण इकाई रैंकएमएफ ने स्मार्टसिप प्लस शुरू किया है। इसमें निवेशक की एसआईपी राशि को दो योजनाओं- इक्विटी और लिक्विड स्कीम में बांटा जाता है। उनमें धनराशि का आवंटन मार्जिन ऑफ सेफ्टी के आधार पर किया जाता है। मार्जिन ऑफ सेफ्टी निवेश का एक सिद्धांत है, जिसमें कीमत को जांच-परखकर निवेश करने वाले निवेशक किसी शेयर में तब पैसे लगाता है, जब वह बाजार में उस कीमत से कम में मिल रहा होता है, जो कीमत निवेशक के हिसाब से उसकी होनी चाहिए।
 
रैंकएमएफ प्रत्येक इक्विटी फंड के मार्जिन ऑफ सेफ्टी इंडेक्स का आकलन करता है, जिसमें फंड की अंतर्भूत कीमत की उसकी नेट एसेट वैल्यू (एनएवी)से तुलना की जाती है। मार्जिन ऑफ सेफ्टी इंडेक्स का मूल्यांकन 0 से 200 तक होता है। जब स्कोर 100 के औसत आंकड़े से अधिक होता है तो मार्जिन ऑफ सेफ्टी अधिक होता है और अगर यह कम होता है तो मार्जिन ऑफ सेफ्टी कम होता है। जब शेयर बाजार सस्ता होता है तब मार्जिन ऑफ सेफ्टी स्कोर अधिक होता है। जब मार्जिन ऑफ सेफ्टी कम होता है तो एसआईपी की ज्यादातर राशि किसी लिक्विड फंड में लगाई जाती है। जब यह बहुत कम होता है तो इक्विटी फंड की कुछ यूनिट बेची जाती हैं और उस पैसे को लिक्विड फंड में निवेश किया जाता है। अगर मार्जिन ऑफ सेफ्टी सामान्य है तो एसआईपी की धनराशि इक्विटी फंड में निवेश की जाती है। अगर यह अधिक होती है तो एसआईपी की धनराशि को इक्विटी फंड में निवेश किया जाता है और इसके अलावा लिक्विड फंड की कुछ यूनिटों को बेचकर उससे मिलने वाली राशि को इक्विटी फंड में निवेश किया जाता है। 
 
रैंकएमएफ के म्युचुअल फंड प्रमुख ओमकेश्वर सिंह ने कहा, 'अगर मार्जिन ऑफ सेफ्टी 110 से ऊपर पहुंच जाता है तो हम इक्विटी में निवेश दोगुना कर देते हैं। अगर यह 90 से नीचे आ जाता है तो हम इक्विटी फंड के बजाय किसी लिक्विड फंड में पैसा लगाते हैं। अगर यह 80 से नीचे आ जाता है तो हम इक्विटी में 35 फीसदी मुनाफावसूली करते हैं और उस पैसे को लिक्विड फंड में लगा देते हैं। फिर जब बाजार 105 के करीब आ जाता है तो हम पैसे को लिक्विड फंड से निकालकर इक्विटी फंड में डाल देते हैं।' 
 
एक सामान्य एसआईपी में हर महीने एकसमान राशि का निवेश होता है, भले ही बाजार का मूल्यांकन घटे या बढ़े। लेकिन स्मार्टसिप प्लस बाजार की अलग-अलग परिस्थितियों में निवेश की राशि बदलकर इक्विटी यूनिटों की खरीद कीमत और कम कर देता है और इस तरह निवेशकों को बेहतर प्रतिफल अर्जित करने में मदद करता है। स्मार्टसिप प्लस बाजार मूल्यांकन अधिक होने पर खरीदी जाने वाली इक्विटी फंडों की यूनिटें घटाकर और लिक्विड फंड में पैसे लगाकर पोर्टफोलियो का जोखिम कम करता है। रैंकएमएफ का स्मार्टसिप प्लस सभी इक्विटी फंडों के पास उपलब्ध है। सिंह के मुताबिक बीते वर्षों के पुष्ट आंकड़े दर्शाते हैं कि स्मार्टसिप प्लस सामान्य एसआईपी की तुलना में सालाना 4 फीसदी अधिक प्रतिफल दे सकता है।
 
फंड्स इंडिया का स्मार्टसिप
 
फंड्सइंडिया यह सुविधा फ्रैंकलिन टेम्पलटन म्युचुअल फंड के साथ मिलकर मुहैया कराता है। इसमें एसआईपी की एक निश्चित धनराशि को दो फंडों में बांट दिया जाता है। अमूमन इक्विटी और डेट फंड में निवेश का अनुपात 70:30 रखा जाता है। बाजार के हालात के मुताबिक हर महीने आवंटन का अनुपात बदलता रहता है। इस आवंटन का फैसला फ्रैंकलिन टेम्पलटन म्युचुअल फंड करता है। फंड्सइंडिया डॉट कॉम में मुख्य अनुसंधान विश्लेषक गौरव कुमार बताते हैं, 'वे आवंटन का फैसला दो कारकों- मूल्यांकन और रुझान के आधार पर करते हैं। जब बाजार महंगा नजर आता है या उसमें गिरावट का रुझान होता है तो इक्विटी में आवंटन घटा दिया जाता है। मगर जब बाजार सस्ता नजर आता है और उसमें तेजी का रुझान होता है तो इक्विटी आवंटन बढ़ा दिया जाता है।'
 
इस समय फंड्सइंडिया यह सुविधा केवल एक इक्विटी फंड (फ्रैंकलिन इंडिया इक्विटी फंड) और एक अल्ट्रा शॉर्ट-टर्म डेट फंड (फ्रैंकलिन इंडिया अल्ट्रा शॉर्ट बॉन्ड फंड) के साथ मिलकर मुहैया कराता है। कुमार कहते हैं, 'फ्रैंकलिन इंडिया इक्विटी मल्टी-कैप फंड है, जिसका लंबा इतिहास है और अभी तक इसका काफी अच्छा ट्रैक रिकॉर्ड रहा है। यह मल्टी-कैप फंड है, जिस पर बाजार कारकों का बड़ा असर पड़ता है। लार्ज-कैप फंडों पर बाजार कारकों का कम असर पड़ता है, जबकि मिड और स्मॉल कैप फंडों पर बाजार कारकों का भारी असर पड़ता है। डेट फंड के लिए अल्ट्रा शॉर्ट टर्म  फंड को इसीलिए चुना जाता है ताकि अवधि से जुड़े जोखिम से बचा जा सके।' उन्होंने कहा कि  70:30 के अनुपात पर ही बने रहने वाले पोर्टफोलियो की तुलना में उनके स्मार्टसिप का 0.5 से 2.5 फीसदी बेहतर प्रदर्शन होता है। 
 
वैल्यू-एवरेजिंग इन्वेस्टमेंट प्लान (वीआईपी)
 
यह निवेश का एक अन्य तरीका है, जो यूनिटों को खरीदने में होने वाले खर्च को सामान्य एसआईपी की तुलना में और भी कम करने का प्रयास करता है। इसमें एक बुनियादी मासिक निवेश राशि तय की जाती है। मान लीजिए कि यह राशि 10,000 रुपये है। माना जाता है कि निवेश एक विशेष दर जैसे 1 फीसदी प्रतिमाह से बढ़ेगा। अगर निवेश की गई राशि इससे कम रफ्तार से बढ़ती है तो अगले महीने निवेश की जाने वाली राशि को बढ़ाया जाता है। लेकिन अगर निवेश राशि अनुमानित दर से अधिक तेज बढ़ती है तो अगले महीने निवेश राशि को घटाया जाता है। मिंटवॉक के सह-संस्थापक निखिल बनर्जी की सलाह है, 'यह विकल्प केवल उन अनुभवी निवेशकों को चुनना चाहिए, जो हर महीने अलग-अलग राशि का निवेश कर सकते हैं।' क्या आपको एसआईपी के इन प्रकारों को चुनना चाहिए? इन एसआईपी वैरिएंट के पीछे बुनियादी विचार अच्छा है। बनर्जी को लगता है, 'वे बुनियादी रूप से किसी व्यक्ति को बाजार के उतार-चढ़ाव का फायदा उठाने में मदद करते हैं।' 
 
हालांकि वे विशेष तरीकों का इस्तेमाल कर इस बात का पता लगाते हैं कि कब निवेशक को ज्यादा जोखिम लेना चाहिए और कब सुरक्षित दांव लगाना चाहिए। बनर्जी ने कहा, 'उनकी सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि उनका एल्गोरिद्म आपके लिए बाजार का सही समय चुनने की क्षमता रखता है या नहीं। इसका परीक्षण वास्तविक बाजार दशाओं में किया जाना चाहिए। इन योजनाओं का पर्याप्त रिकॉर्ड नहीं है। जिस बेहतर प्रदर्शन का दावा किया जा रहा है, वह पहले के पुष्ट आंकड़ों पर आधारित है।' बनर्जी का सुझाव है कि अनुभवी निवेशक अपनी कुल एआईपी राशि का 15 से 20 फीसदी इन योजनाओं में निवेश कर सकते हैं। बनर्जी कहते हैं, 'अगर वे लंबी अवधि में प्रतिफल बढ़ाने में योगदान दे पाती हैं तो उनमें निवेशक आवंटन बढ़ा सकते हैं।'
Keyword: SIP, invest, mutual fund,.,
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