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मुआवजे पर वित्त आयोग के सुझाव को राज्यों ने किया खारिज

दिलाशा सेठ / पणजी September 20, 2019

राज्यों ने एकमत से 15वें वित्त आयोग के चेयरमैन एनके सिंह के उस सुझाव को आज खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने केंद्र से मुआवजे के लिए सालाना वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) राजस्व वृद्घि अनुमान को 14 फीसदी से कम करने का सुझाव दिया था। राज्यों द्वारा उपकर प्रतिपूर्ति की अवधि तीन साल और बढ़ाकर 2024-25 करने की मांग को देखते हुए सिंह ने यह सुझाव दिया था। जीएसटी परिषद की बैठक से पहले वित्त आयोग के चेयरमैन ने राज्यों के वित्त मंत्रियों के साथ बातचीत की थी क्योंकि उन्हें नवंबर तक अपनी रिपोर्ट को अंतिम रूप देना है।

 
असम के वित्त मंत्री हेमंत विश्व शर्मा ने कहा, 'राज्यों ने राजस्व आकलन को 14 फीसदी से कम करने के वित्त आयोग के प्रस्ताव को खारिज कर दिया। राज्य जीएसटी प्रणाली में स्थायित्व चाहते हैं।' शर्मा ने कहा, 'वित्त आयोग की रिपोर्ट सौंपे जाने तक जीएसटी दर या ढांचे में ज्यादा बदलाव की उम्मीद नहीं है।' कर संग्रह में कमी और राजस्व की स्थिति को देखते हुए केंद्र राज्यों के लिए मुआवजा अवधि बढ़ाने के पक्ष में नहीं है। जीएसटी के तहत राज्यों को राजस्व नुकसान की भरपाई के लिए मिलने वाले मुआवजे की खातिर वसूला जाने वाला उपकर चालू वित्त वर्ष के पहले पांच महीनों में जरूरत से कम रहा है। मांग में कमी के कारण उपकर संग्रह घटा है। मुआवजा उपकर 28 फीसदी जीएसटी दायरे वाली कुछ वस्तुओं जैसे वाहन, सिगरेट, एयरेटेड पेय आदि पर लगता है। इस मसले पर अंतिम निर्णय जीएसटी परिषद द्वारा लिया जाएगा, जिसमें केंद्रीय वित्त मंत्री के साथ राज्यों के वित्त मंत्री भी शामिल होते हैं। 
 
जीएसटी मुआवजा उपकर संग्रह चालू वित्त वर्ष में अगस्त तक करीब 24,000 करोड़ रुपये कम रहा है। अगस्त तक कुल 41,000 करोड़ रुपये मुआवजा उपकर संग्रह हुआ है जबकि राज्यों को राजस्व में कमी की भरपाई के लिए 65,000 करोड़ रुपये का आवंटन किया जाना है। इस कमी की भरपाई पिछले वित्त वर्ष के अधिशेष कोष से की जा रही है। जीएसटी लागू होने पर राज्यों को राजस्व में होने वाले किसी भी तरह के नुकसान की भरपाई 5 साल तक करने का वादा किया गया है। सालाना 14 फीसदी कर संग्रह वृद्घि को आधार मानकर राजस्व के नुकसान की भरपाई की जानी है और इसकके लिए आधार वर्ष 2015-16 रखा गया है। 
 
सिंह ने पेट्रोलियम को भी जीएसटी के तहत लाने की सलाह दी है। बीते समय में राज्य पेट्रोलियम को जीएसटी के दायरे में लाने पर सहमत नहीं हुए थे क्योंकि वह इस मद से होने वाले राजस्व को अपने हाथ से जाने देने के पक्ष में नहीं है। राज्यों के राजस्व में पेट्रोलियम उत्पादों का बड़ा योगदान है। एक अधिकारी ने कहा, 'अगर पेट्रोलियम को जीएसटी में शामिल किया जाता है तो मुआवजे की अवधि बढ़ाना तार्किक हो सकता है। इसके साथ ही राज्यों को मुआवजा देने के लिए केंद्र को अतिरिक्त राजस्व की भी जरूरत होगी।'
Keyword: nirmala sitaraman, economy, corporate tax, GST,,
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