बिजनेस स्टैंडर्ड - कर में कटौती से विनिर्माण क्षेत्र को मिलेगा बल
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कर में कटौती से विनिर्माण क्षेत्र को मिलेगा बल

अर्णव दत्ता, अदिति दिवेकर और अमृता पिल्लई / नई दिल्ली/मुंबई September 20, 2019

कॉरपोरेट कर की दर को घटाकर 22 फीसदी करने और 1 अक्टूबर से पंजीकृत होने वाले विनिर्माताओं के लिए इसे महज 15 फीसदी किए जाने से विनिर्माण क्षेत्र में नए निवेश को बढ़ावा मिलेगा। उद्योग के हितधारकों का कहना है कि कर मद में कम खर्च होने से कंपनियों के बहीखाते पर नकदी की उपलब्धता बढ़ेगी और ऐसे में नए निवेश में तेजी आएगी। कुल मिलाकर, देश के विनिर्माण क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को आकर्षित करना अब कहीं अधिक आसान होगा। व्हर्लपूल ऑफ इंडिया, जेना ग्रुप और सुपर प्लास्ट्रॉनिक्स (एसपीपीएल) जैसी इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माता कर में कटौती को फायदे के रूप में देख रही हैं। व्हर्लपूल ने अगले चार वर्षों के दौरान 590 करोड़ रुपये के निवेश की योजना बनाई है जबकि पूंजीगत व्यय के लिए एसपीपीएल का बजट 150 करोड़ रुपये है। इसके अलावा फॉक्सकॉन और विस्ट्रॉन जैसी कंपनियां भी कर में कटौती का फायदा उठा सकती हैं क्योंकि उन्हें एफडीआई के लिए सैद्धांतिक मंजूरी पहले ही मिल चुकी है। इन दोनों कंपनियों को कुल मिलाकर 7,600 करोड़ रुपये के निवेश के लिए मंजूरियां मिली हैं।

 
ग्रांट थॉर्टन इंडिया के पार्टनर एवं नैशनल लीडर (कर) विकास वासल ने कहा कि जिन कंपनियों को मंजूरी मिल चुकी है लेकिन संयंत्र की स्थापना एवं कर्मचारियों की नियुक्ति अभी बाकी है, उन्हें भी इसका फायदा मिलेगा। उन्होंने कहा, '15 फीसदी कॉरपोरेट कर के बारे में सुनने के बाद तमाम वैश्विक निवेशक दिलचस्पी दिखाने लगे हैं क्योंकि यह किसी अन्य प्रमुख देश के मुकाबले कम है। हम उम्मीद करते हैं कि अगले एक साल में एफडीआई प्रवाह में तेजी आएगी।' हालांकि इस्तेमाल न हो सकने वाली क्षमता विभिन्न क्षेत्रों के लिए चिंता बरकरार रहेगी। मौजूदा कंपनियां कोई भी ताजा निवेश करने से पहले इंतजार करेंगी। थर्मेक्स के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्याधिकारी एमएस उन्नीकृष्णन ने कहा, 'कोई भी रातोंरात निर्णय नहीं लेता है। लेकिन इससे निवेश का माहौल बनाने में काफी मदद मिलेगी। पूंजीगत वस्तु कंपनियों को थोड़ा इंतजार करना पड़ेगा क्योंकि उनके पास पहले से ही काफी क्षमता बेकार पड़ी है।'
 
उद्योग के अधिकारियों का कहना है कि पूंजीगत वस्तु क्षेत्र में क्षमता उपयोगिता 50 से 60 फीसदी के दायरे में है जो एक साल पहले 70 से 80 फीसदी के दायरे में थी। लार्सन ऐंड टुब्रो (एलऐंडटी) के पूर्णकालिक निदेशक एवं मुख्य वित्तीय अधिकारी शंकर रमण ने कहा, 'यह एक स्वागतयोग्य कदम है और इससे पता चलता है कि सरकार आर्थिक वृद्धि को पुनर्जीवित करने के लिए उद्योग की जरूरतों को पूरा करने के लिए तत्पर है।' रमण ने कहा कि डेट आधारित वित्त पोषण की उपलब्धता संबंधी चिंताओं को भी दूर करने की जरूरत है। उन्होंने कहा, 'निवेश के लिए हाथ में अधिक रकम होना इस समीकरण का एक महत्त्वपूर्ण भाग है। प्रतिस्पर्धी कीमत पर ऋण हासिल करने संबंधी उद्योग की क्षमता दूसरा महत्त्वपूर्ण है जिस पर काम करने की जरूतर है।' उन्होंने कहा कि निश्चित तौर पर मांग में सुधार लाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि एक साल की देरी के बावजूद यह एक अच्छी शुरुआत है।
 
डालमिया सीमेंट के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्याधिकारी महेंद्र सिंघी ने कहा, 'इससे एक सकारात्मक वातावरण तैयार हुआ है और निश्चित तौर पर लोग इसके बारे में सोचना शुरू करेंगे।' सिग्नेचर ग्लोबल, ओमैक्स, महागुन और पारामाउंट ग्रुप जैसी रियल एस्टेट कंपनियों ने कहा कि डेवलपर नकदी संकट से जूझ रहे हैं और ऐसे में कर मद में खर्च घटने से उनके पास नकदी की उपलब्धता बढ़ेगी। जेके पेपर ने अपनी विनिर्माण इकाई में 1,750 करोड़ रुपये के निवेश की योजना बनाई है जिसे अब कॉरपोरेट कर में कटौती का फायदा हो सकता है।
Keyword: nirmala sitaraman, economy, corporate tax,,
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