बिजनेस स्टैंडर्ड - कॉरपोरेट आय को 13.2 फीसदी दम
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Wednesday, October 23, 2019 12:44 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम अर्थव्यवस्था खबर

कॉरपोरेट आय को 13.2 फीसदी दम

कृष्णकांत / मुंबई September 20, 2019

कॉरपोरेट कर में कटौती से बीएसई500, बीएसई मिडकैप और बीएसई स्मॉलकैप सूचकांकों में शामिल कंपनियों की प्रति शेयर आय एवं शुद्ध लाभ में वित्त वर्ष 2019 के मुकाबले एकमुश्त 13.2 फीसदी का इजाफा होगा। नई कर व्यवस्था के तहत कंपनियों की संयुक्त कर देनदारी में वित्त वर्ष 19 के मुकाबले करीब 45,000 करोड़ रुपये ही कम होने के आसार हैं। इसमें स्थगित कर और रिफंड शामिल नहीं है, केवल मौजूदा कर ही शामिल हैं। यह कंपनी जगत की 490 कंपनियों की संयुक्त बचत है जिनकी प्रभावी कर दर पिछले वित्त वर्ष 25.2 प्रतिशत से अधिक थी। 

 
उम्मीद है कि इस कर कटौती से निफ्टी 50 सूचकांक कंपनियों के संयुक्त शुद्ध लाभ या आय में प्रति शेयर करीब 12.6 प्रतिशत तक या वित्त वर्ष 19 के लाभ-हानि खाते के आधार पर लगभग 26,000 करोड़ रुपये की वृद्धि होगी। इन सूचकांक कंपनियों ने वित्त वर्ष 19 में लगभग 3.56 लाख करोड़ रुपये का संयुक्त शुद्ध लाभ दर्ज किया था। इन कंपनियों ने पिछले वित्त वर्ष में कॉरपोरेट आय कर के रूप में कर पूर्व लाभ का लगभग 30.3 प्रतिशत का भुगतान किया था। बिजनेस स्टैंडर्ड के इस उदाहरण में इन 490 कंपनियों ने वित्त वर्ष 19 में 5.16 लाख करोड़ रुपये के कर पूर्व लाभ पर 1.75 लाख करोड़ रुपये मूल्य का कॉरपोरेट कर भुगतान किया था यानी पिछले वित्त वर्ष में प्रभावी कर दर 33.9 प्रतिशत रही। यह मानते हुए कि हर कंपनी पर अब 25.17 प्रतिशत की नई दर से कर लगाया जाता है, ऐसे में पिछले वित्त वर्ष में कर पूर्व आधार पर लाभांवित होने वाली कंपनियों के लिए कुल कर बचत 44,828 करोड़ रुपये बैठती है।
 
इसमें से लगभग 28,500 करोड़ रुपये गैर-वित्तीय कंपनियों को प्राप्त होंगे, जबकि शेष भाग बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों में जाएगा जिसमें से सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को केवल 160 करोड़ रुपये की बचत होने की संभावना है क्योंकि पिछले वित्त वर्ष में 25.2 प्रतिशत से अधिक प्रभावी कर दर के साथ लाभ में रहने वाले बैंक केवल दो ही थे। विश्लेषकों का कहना है कि कंपनियों के नकदी प्रवाह में सुधार के अलावा कॉरपोरेट और निवेशक धारणा में सुधार होगा जिसका उपयोग वे या तो ताजा निवेश में कर सकते हैं या फिर देनदारियों को कम करने के लिए। 
 
कुछ लोग अर्थव्यवस्था की कुल मांग में अप्रत्यक्ष फायदा भी देख रहे हैं, जो भारतीय कंपनी जगत की प्रमुख चिंता रही है। इंडिया रेटिंग्स के मुख्य अर्थशास्त्री देवेंद्र पंत ने कहा, संभावना जताई जा रही है कि खास तौर से लाभ वाली कंपनियां अपनी कर बचत का कम से कम एक हिस्सा कर्मचारियों को बोनस या उम्मीद         से ज्यादा वेतन बढ़ोतरी के रूप में साझा कर सकती हैं। इससे उपभोग की मांग मजबूत होगी, जो अर्थव्यवस्था के लिए सही होगा। अन्य इतने आशावादन नहीं हैं। केयर रेटिंग्स के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने कहा, यह इक्विटी बाजारों व शेयरधारकों के लिए बड़ा कदम है क्योंंकि उन्हें कंपनी की आय में एकमुश्त मजबूती मिलेगी। लेकिन इससे अर्थव्यवस्था की मांग मेंं बहुत ज्यादा मजबूती के लिहाज से बहुत कारगर नहीं होगा क्योंंकि इससे व्यक्ति व परिवार की खरीद की ताकत नहीं बढ़ेगी। उन्होंंने कहा कि कर कटौती से मिलने वाला लाभ भी विभिनन्न कंपनियों पर अलग-अलग होगा। उन्होंने कहा, ज्यादातर उद्योग व कंपनियों को कुछ भी फायदा नहीं होगा या वे कर की प्रभावी दर में बढ़ोतरी देख सकते हैं, अगर वे पहले मिल रही छूट नहीं लेना पसंद करते हों। इस तर्क में कुछ गुण हैं। देश की बड़ी कंपनियों में सबसे बड़ी लाभार्थी एचडीएफसी बैंक जैसी कंपनियां होंगी, जिसकी प्रति शेयर आय 10 फीसदी बढ़ सकती है यानी 4,300 करोड़ रुपये बढ़ सकती है, जो वित्त वर्ष के इसके कर पूर्व लाभ पर आधारित है। अन्य लाभार्थी में आईसीआईसीआई बैंक होगा, जिसे 2,944 करोड़ रुपये का लाभ मिलेगा, आईटीसी को 1,372 करोड़ ररुपये, ओएनजीसी को 2,089 करोड़ रुपये, कोल इंडिया को 1,740 करोड़ रुपये, एलऐंडटी को 1,023 करोड़ रुपये, कोटक महिंद्रा बैंक को 805 करोड़ रुपये और बजाज फाइनैंंस को 531 करोड़ रुपये का फायदा होगा। इसकी तुलना में 25 फीसदी से कम प्रभावी दर वाली बड़ी कंपनियों मसलन रिलायंस इंडस्ट्रीज, टीसीएस, अल्ट्राटेक सीमेंट, एचडीएफसी, विप्रो और वेदांत को होने वाला फायदा संदिग्ध है।
Keyword: nirmala sitaraman, economy, corporate tax, BSE,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या इन्फोसिस मामले की हो गहराई से जांच?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.