बिजनेस स्टैंडर्ड - कर कटौती सकारात्मक लेकिन मांग बहाल होने में लगेगा वक्त
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कर कटौती सकारात्मक लेकिन मांग बहाल होने में लगेगा वक्त

श्रीपाद एस ऑटे / मुंबई September 20, 2019

शुक्रवार का दिन शेयर बाजारों के हिस्सेदारों के लिए बेहतर सप्ताहांत रहा। वित्त मंत्री ने कॉर्पोरेट कर की दर उल्लेखनीय रूप से कम कर दिया, जो अप्रैल 2019 से प्रभावी होगा। इससे बाजार को व्यापक बढ़ावा मिला और इसकी वजह से शुक्रवार को शेयर बाजार में एक दिन की बढ़त एक दशक के उच्च स्तर पर पहुंच गई। भारत की सुस्त अर्थव्यवस्था में तेजी लाने के लिए उठाए जा रहे कई कदमों के बाद निर्मला सीतारमण ने आज कॉर्पोरेट कर की प्रभावी दर मौजूदा 30 प्रतिशत से कम करके 25.17 प्रतिशत कर दिया। वहीं अक्टूबर 2019 से मार्च 2013 के बीच नया कारोबार शुरू करने वाले विनिर्माताओं के लिए कर की दर बहुत कम 17.01 प्रतिशत कर दिया। 

 
इसमें कोई संदेह नहीं है कि यह कदम भावनात्मक और ढांचागत रूप से सकारात्मक है। बहरहाल अब सवाल यह है कि क्या इस क दम से मांग और निवेश में तेजी आएगी, जो भारत की सुस्त अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का बड़ा विषय है? शायद हां, लेकिन ऐसा तत्काल नहीं होगा। पहली बात यह है कि अब भारत के कॉर्पोरेट कर की नई दरें वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी हो गई हैं, इससे देश में विदेशी निवेश को मध्यावधि के हिसाब से प्रोत्साहन मिलेगा। खासकर जो कंपनियां चीन का विकल्प तलाश रही हैं, वे भारत का रुख कर सकीत हैं और इस तरह से घरेलू खपत भी बढ़ेगी। 
 
निर्मल बंग में शोध प्रमुख सुनील जैन के मुताबिक, 'नई कॉर्पोरेट कर की दर से विदेशी निवेश को बढ़ावा मिलने की पूरी उम्मीद है। इससे नौकरियों की संभावना बढ़ेगी और मध्यावधि से लेकर दीर्घावधि तक के हिसाब से कुल मिलाकर खपत की मांग बढ़ेगी।' दक्षिण एशिया की तमाम अर्थव्यवस्थाओं जैसे मलेशिया, इंडोनेशिया, चीन और दक्षिण कोरिया में कॉर्पोरेट कर 24-25 प्रतिशत के बीच है। घरेलू विनिर्माताओं द्वारा नए निवेश से भी रोजगार को समर्थन मिलने की उम्मीद है क्योंकि कम दर का लाभ सभी कॉर्पोरेट्स को मिलेगा। 
 
जैन ने कहा, 'नए विनिर्माताओं के लिए कर की दर बहुत कम होने से आगे निवेश को और बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इससे कुल मिलाकर दीर्घाïवधि के हिसाब से मांग में बढ़ोतरी होगी।'  हालांकि ऐसा माना जा रहा है कि कुछ वजहें हैं, जिसकी वजह से निजी पूंजी निवेश चक्र बहाल होने में देरी हो सकती है। इनमें मौजूदा क्षमता का उपयोग कम होना शामिल है। साथ ही व्यक्तिगत आमदनी को सीधे न बढ़ाने से मांग के मोर्चे पर तत्काल लाभ सीमित रहेंगे।  एसबीआई कैप सिक्योरिटीज के अर्थशास्त्री अर्जुन नागराजन ने कहा, 'इस समय कुल क्षमता उपभोग, जो सीजन के हिसाब से समायोजित होता है, वित्त वर्ष 2019 की चौथी तिमाही में करीब 75 प्रतिशत रहा है। आज का फैसला संरचनात्मक हिसाब से सकारात्मक है। बहरहाल कंपनियोंं की क्षमता के हिसाब से देखें तो अभी निवेश चक्र तत्काल बहाल होने की संभावना नहीं नजर आती है।' 
 
एचडीएफसी सिक्योरिटीज में खुदरा शोध प्रमुख दीपक जासानी को भी उम्मीदहै कि कम कर का खपत पर सकारात्मक असर पड़ेगा, लेकिन अभी इसमें वक्त लगेगा। शुक्रवार को हुई कर की कटौती पर कॉर्पोरेट क्या प्रतिक्रिया देता है, यह भी अहम है। उदाहरण के लिए अगर कंपनियां कर में होने वाली बचत का लाभ अंतिम ग्राहकों तक पहुंचाने के लिए टाइटन की तरह कीमतें कम करती हैं तो कम अवधि के हिसाब से मदद मिलेगी। कंपनी ने कहा है कि वह दरों में कटौती से 4 प्रतिशत बचाएगी और शेष लाभ ग्राहकों को दे देगी। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या अन्य कंपनियां भी ऐसा करती हैं या नहीं। इस पर अलग ?अलग राय है। शेयर बाजार के निवेशकों के लिए यह सकारात्मक हो सकता है कि कंपनियां कर में बचत से होने वाले लाभ का फायदा अपने निवेशकों को भी देंगी। यह ज्यादा लाभांश के माध्यम से हो सकता है या बाईबैक के माध्यम से। बहरहाल इसके साथ ही मूल्यांकन मेंं सुधार होगा और कम कर दरों से कमाई बढ़ेगी। यही वजह लगती है, जिसके कारण शुक्रवार को बाजार में तेजी देखी गई। 
 
आखिर में यह देखना भी अहम होगा कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) अक्टूबर के पहले सप्ताह में होने वाली मौद्रिक नीति समिति की बैठक में क्या फैसला लेता है। खासकर कार्पोरेट कर कम किए जाने से बढ़े हुए राजकोषीय घाटे के बोझ को देखते हुए यह और महत्त्वपूर्ण हो जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि रिजर्व बैंक अगर आगे और नीतिगत ढील देता है और पहले की तरह दर में कटौती करता है तो इससे मांग बहाल होगी और कम कर दरों को देखते हुए यह रिकवरी तेज रहेगी।  इसका एक स्याह पक्ष यह भी है कि सरकार के 10 साल के बॉन्ड शुक्रवार को 15 आधार अंक बढ़े हैं, इससे संकेत मिलता है कि कर्ज पर कॉर्पोरेट की निर्भरता और ज्यादा हो सकती है।
Keyword: nirmala sitaraman, economy, corporate tax, share market,,
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