बिजनेस स्टैंडर्ड - कंपनियों को मिली पुनर्खरीद कर में राहत
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Wednesday, December 11, 2019 05:17 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम अर्थव्यवस्था खबर

कंपनियों को मिली पुनर्खरीद कर में राहत

समी मोडक / मुंबई September 20, 2019

आम बजट से पहले शेयर पुनर्खरीद की घोषणा कर चुकी कंपनियों पर नया पुनर्खरीद वितरण कर नहीं लगाने के सरकार के फैसले से भारतीय कंपनी जगत को बड़ी राहत मिली है। आम बजट में 20 फीसदी कर लगाने का ऐलान किया गया था, लेकिन यह पिछली तारीख यानी नए वित्त वर्ष की शुरुआत 1 अप्रैल से लागू था। विप्रो और अदाणी पोट्र्स ऐंड एसईजेड समेत करीब 20 कंपनियों ने 15,000 करोड़ रुपये की पुनर्खरीद की घोषणा की थी और सरकार के अप्रत्याशित कदम से उन्हें झटका लगा था।

 
शुक्रवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि 5 जुलाई से पहले पुनर्खरीद का ऐलान कर चुकी कंपनियों को इससे छूट दी जाएगी। विशेषज्ञों ने कहा कि यह कदम पुनर्खरीद के मामले में बहुप्रतीक्षित स्पष्टीकरण मुहैया करा रहा है। बीडीओ इंडिया के पार्टनर (टैक्स ऐंड रेग्युलेटरी सर्विसेज) निरंजन गोविंदेकर ने कहा, 5 जुलाई से पहले घोषित पुनर्खरीद योजना पर कर नहीं लगाने का फैसला स्वागतयोग्य है। यह उन कंपनियों की पुनर्खरीद योजना पर कर लागू होने के मामले में स्पष्टीकरण दे रहा है जिन्होंने इसकी घोषणा बजट प्रस्ताव से पहले की थी।
 
पीडब्ल्यूसी के पार्टनर व लीडर (कॉरपोरेट व इंटरनैशनल टैक्स) फ्रैंक डिसूजा ने कहा कि पुनर्खरीद कर पर राहत से विगत की चिंता दूर करने में मदद मिलेगी। बजट प्रस्ताव और राहत की घोषणा के बीच की अवधि में हालांकि कई कंपनियां असमंजस में थीं। केपीआर मिल समेत कुछ छोटी कंपनियों को अपनी पुनर्खरीद योनजा वापस लेनी पड़ी थी जबकि कानूनी विशेषत्रों े इस कदम की वैधता पर सवाल उठाए थे। उधर, ग्रीव्स कॉटन और एसकेपी सिक्योरिटीज जैसी कंपनियों ने बाजार नियामक सेबी को पत्र लिखकर स्पष्टीकरण चाहा था कि क्या वे इसे रद्द कर सकते हैं या फिर पुनर्खरीद की शर्तों को संशोधित कर सकते हैं।
 
सूत्रों ने कहा कि सेबी पिछली तारीख से पुनर्खरीद कर लागू होने के मामला वित्त मंत्रालय के सामने उठाया था। कानूनी विशेषज्ञ ने कहा, कई कंपनियों ने सेबी के सामने पुनर्खरीद कर पर वैध मसले उठाए थे, जिसका समाधान आसान नहीं था। सेबी ने सभी पूछताछ सरकार के पास भेज दी थी। एक ओर जहां कंपनियां इसे रद्द करने के लिहाज से सही थीं, वहीं दूसरी ओर इससे आम शेयरधारकों पर असर पड़ता, जिन्होंने इस घोषणा के बाद कंपनी के शेयर खरीदे थे। उन्होंने कहा कि हालिया कदम से सभी हितधारकों को राहत मिली है। 
 
विशेषज्ञों ने कहा कि कंपनियां एक बार फिर अपनी पुनर्खरीद योजना को आगे बढ़ाने में सक्षम होंगी। साथ ही आगे पुनर्खरीद की घोषणा करने वाली कंपनियां नए कर को ध्यान में रखेंगी। बजट में पुनर्खरीद कर का प्रस्ताव लाभांश व पुनर्खरीद के बीच टैक्स आर्बिट्रेज पर लगाम करने के लिए रखा गया था। 2016-17 में 10 फीसदी अतिरिक्त लाभांश वितरण कर लागू किए जाने के बाद से कई कंपनियों ने अपने शेयरधारकों को पुनर्खरीद के जरिए पुरस्कृत करना शुरू किया था। इस कर के बाद लाभांश पर कर की प्रभावी दर 20.6 फीसदी हो गई थी। कई लोगोंं का कहना है कि नया पुनर्खरीद कर एकसमान मौका उपलब्ध करा देगा।
Keyword: nirmala sitaraman, economy, corporate tax, share,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या राजकोषीय घाटे का लक्ष्य चूक जाएगी सरकार?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.