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'कटौती अर्थव्यवस्था के लिए अच्छी'

सुब्रत पांडा / मुंबई September 20, 2019

कॉरपोरेट कर दरों में कटौती करने के सरकार के फैसले को अच्छा बताते हुए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि यह कदम बहुत साहसिक है और यह अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा रहेगा। दास ने मुंबई में इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में कहा कि देश में जो प्रमुख खामियां थीं, वह थीं कॉरपोरेट कर की अधिक दरें। ये कर दरें हमें दुनिया के इस भाग में प्रचलित कर दरों के करीब लाती हैं। इसलिए कॉरपोरेट कर की दरों में कमी बहुत ही साहसिक और स्वागत योग्य उपाय है और यह अर्थव्यवस्था के लिए बहुत अच्छा रहेगा।

 
मलेशिया, इंडोनेशिया, चीन और दक्षिण कोरिया जैसी कई दक्षिण एशियाई अर्थव्यवस्थाएं 24-25 प्रतिशत कॉरपोरेट कर वसूलती हैं। वित्त मंत्री ने आज सभी घरेलू कंपनियों के लिए प्रभावी कॉरपोरेट कर दरों को मौजूदा 30 प्रतिशत से घटाकर 25.17 प्रतिशत (सभी उपकरों और अधिभार को मिलाकर) कर दिया। वित्त मंत्री ने कहा कि अर्थव्यवस्था में निवेश और विकास को बढ़ावा देने के लिए ऐसा किया गया है। दास ने यह भी कहा कि उन्हें उम्मीद है कि पहली तिमाही की तुलना में दूसरी तिमाही की वृद्धि के आंकड़े बेहतर होंगे क्योंकि चुनाव होने की वजह से सरकारी व्यय कम रहने के कारण पहली तिमाही को नुकसान पहुंचा है।
 
उन्होंने कहा कि पहली तिमाही में हुआ यह कि चुनाव होने के कारण सरकारी व्यय बहुत कम रहा। इसलिए इसने जीडीपी के आंकड़ों को एक सीमा तक सीमित कर दिया। दूसरी तिमाही में सरकारी व्यय में बढ़ोतरी हुई है इसलिए उम्मीद है कि दूसरी तिमाही के आंकड़े पहली तिमाही के मुकाबले बेहतर रहेंगे। पहली तिमाही का जीडीपी गिरकर पांच प्रतिशत रह गया है जो छह साल में सबसे कम है। दास ने कहा कि इस घड़ी में सरकार, केंद्रीय बैंक और निजी क्षेत्र के सभी हितधारकों को अर्थव्यवस्था के विकास को आगे बढ़ाने में अपनी भूमिका निभानी चाहिए।
 
संघर्षरत गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) क्षेत्र की परिसंपत्ति की गुणवत्ता समीक्षा को खारिज करते हुए दास ने कहा कि वित्तीय स्थिरता के लिहाज से आरबीआई देश की शीर्ष 50 एनबीएफसी की निगरानी कर रहा है। हमने किसी एनबीएफसी से परिसंपत्ति की गुणवत्ता समीक्षा के लिए नहीं कहा है लेकिन वे स्वयं ऐसा करने के लिए स्वतंत्र हैं। उन्होंने यह भी कहा कि बेहतर प्रशासन मानकों वाली अच्छी एनबीएफसी आईएलऐंडएफएस संकट से पहले की दरों पर बाजार से धन जुटा सकती हैं। इसके अलावा उन्होंने एक दिन पहले कही बात को भी दोहराया कि एनबीएफसी क्षेत्र में संकट को हल करने के लिए बाजार तंत्र को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
 
गवर्नर ने कहा कि यह समाधान प्रक्रिया बाजार आधारित होनी चाहिए और इसमें बैंकों तथा अन्य ऋणदाताओं की प्रमुख भूमिका होती है क्योंकि एनबीएफसी में बड़ी प्रशासकीय दिक्कत रहती है। दास ने कहा कि बैंकों को बहुत ही संतुलित ढंग से फैसला करना पड़ेगा।
Keyword: nirmala sitaraman, economy, corporate tax,,
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