बिजनेस स्टैंडर्ड - कर घटने से बढ़ेगा राजकोषीय घाटा
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कर घटने से बढ़ेगा राजकोषीय घाटा

अभिषेक वाघमारे और दिलाशा सेठ / नई दिल्ली September 20, 2019

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा कॉर्पोरेट कर में भारी राहत की घोषणा से सरकार की राजकोषीय समेकन की योजना पटरी से उतर सकती है और यह पिछले 3 साल से हासिल राजकोषीय संतुलन को उलट सकती है। हालांकि इस प्रोत्साहन से मध्यावधि के हिसाब से निवेश को बढ़ावा मिल सकता है, लेकिन इससे होने वाले राजस्व नुकसान से केंद्र के राजकोषीय घाटे की स्थिति खराब हो सकती है। चालू वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद के 3.3 प्रतिशत पर रखने का लक्ष्य रखा गया है और अब बढ़कर 3.7 प्रतिशत हो सकता है। यानी इसमें 40 आधार अंक की भारी बढ़ोतरी होने की संभावना है। राजकोषीय घाटा 2016-17 से 3.4 प्रतिशत पर स्थिर था। 
 
आशावादी अनुमान से भी कर संग्रह में 1 लाख करोड़ रुपये की कमी की संभावना है। बिजनेस स्टैंडर्ड की गणना से पता चलता है कि इस वित्त वर्ष में इस हिसाब से भी राजकोषीय घाटा 3.45 प्रतिशत पर पहुंच सकता है।  सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम और सरकारी बैंकों को भारी मुनाफा हो सकता है और वे सरकार के अनुमान की तुलना में ज्यादा लाभांश केंद्र सरकार को दे सकते हैं। भारतीय रिजर्व बैंक से मिले गैर कर राजस्व से पहले ही केंद्र को राजकोषीय राहत मिल चुकी है। ज्यादा लाभांश, सार्वजनिक उपक्रमों का बजट से इतर उधारी से वित्तपोषण, कुछ योजनाओं में कम व्यय और व्यय में कटौती या कम खर्च से केंद्र को बजट में तय लक्ष्य की तुलना मेंं राजकोषीय चूक कम करने में मदद मिलेगी। 
 
पीएम-किसान जैसे बड़ी व्यय योजना में धन का प्रवाह कम रहने से भी सरकार को राजकोषीय घाटे में चूक से बचने में मदद मिलेगी।  एक सरकारी अधिकारी ने कहा, '1.45 लाख करोड़ रुपये की राहत मिलने से कर संग्रह का लक्ष्य वास्तविक होगा।' इस वित्त वर्ष में सितंबर के मध्य तक प्रत्यक्ष कर संग्रह महज 5 प्रतिशत बढ़ा है और अगर वित्त वर्ष 2020 का तय लक्ष्य हासिल करना है तो कर संग्रह में 27 प्रतिशत की बढ़ोतरी की जरूरत होगी।  कर विभाग का कहना है कि इन घोषणाओं को देखते हुए भी चालू वित्त वर्ष में कर संग्रह का लक्ष्य हासिल करना चुनौती होगी। क्योंकि कर संग्रह की वृद्धि दर 5 प्रतिशत है और बजट अनुमान में की तुलना में पुनरीक्षित अनुमान (आरई) में भारी परिवर्तन करना होगा। 
 
सकल कर राजस्व में हानि 1.45 लाख करोड़ रुपये होगी, लेकिन केंद्र सरकार का शुद्ध नुकसान करीब 84,000 करोडड़ रुपये होगा क्योंकि 42 प्रतिशत नुकसान राज्यों को उठाना पड़ेगा। इसी तरह से जीएसटी और प्रत्यक्ष कर संग्रह मेंं 1 लाख करोड़ रुपये की कमी में केंद्र सरकार को 58,000 करोड़ रुपये नुकसान होगा।  रिजर्व बैंक से केंद्र को मिलने वाले 58,000 करोड़ रुपये लाभ को अगर समायोजित करें तो केंद्र का कुल राजकोषीय नुकसान 84,000 करोड़ रुपये के करीब होगा।  अगर सामान्य जीडीपी 209 लाख करोड़ रुपये रहने की कल्पना करें तो राजकोषीय घाटे मे 40 आधार अंक या 0.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी होगी। 
 
विशेषज्ञों व अर्थशास्त्रियों ने बिजनेस स्टैंडर्ड से कहा कि मांग में तेजी अहम है, जिससे निवेश बढ़ेगा और कर अनुपालन में भी सुधार होगा। यही वजह है कि सुधारवादी कदमों से संभवत:  इस साल प्रत्यक्ष कर संग्रह में तत्काल कोई सुधार आने की संभावना नहीं है। उन्होंने कहा कि संग्रह पर असल असर 2-3 साल में नजर आएगा।  भारत के पूर्व मुख्य सांख्यिकीविद प्रणïव सेन ने कहा कि मौजूदा कंपनियों पर कॉर्पोरेशन कर 30 प्रतिशत से घटाकर 22 प्रतिशत किया जाना पूरी तरह से आपूर्ति वाले पक्ष के लिए उठाया गया कदम है, जबकि मांग के पक्ष में समस्या जस की तस बनी हुई है। उन्होंने कहा, 'जहां तक मौजूदा कदमों का सवाल है, इनसे मांग में सुधार नहीं होगा और कंपनियों को मुनाफा कमाने में मदद मिलेगी।' बहरहाल उन्होंने कहा कि नई कंपनियों को भारी कर छूट ज्यादा प्रभावी कदम है।  उन्होंने कहा, 'आप नई कंपनियों में तमाम नए निवेश देख सकते हैं।' 
 
इक्रा में मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा, 'निवेश बहाल होने के हिसाब से देखें तो कुछ क्षेत्रों में पहले ही क्षमता जरूरत से ज्यादा है। हमें नहीं लगता है कि निवेश में कोई तेजी आएगी, जब तक कि मांग स्थिर नहींं हो जाती है।'   दूसरी तरफ राज्य राजकोषीय संकट मेंं आएंगे। रिजïर्व बैंक के बढ़े लाभांश से राज्यों के खजाने को कोई लाभ नहीं पहुंचेगा (क्योंकि यह गैर कर राजस्व है), वहीं कॉर्पोरेट कर में कटौती से केंद्र से उन्हें मिलने वाले कर में कमी आएगी।  नायर ने कहा, 'केंद्र के कर में आने वाली कमी का 42 प्रतिशत बोझ राज्यों पर पडऩे से उन्हें धन कम मिलेगा और उन्हें अपने व्यय में कटौती करनी पड़ेगी, जिससे घाटे से बचा जा सके।'  उन्होंंने कहा कि उधारी लेने की क्षमता कम होने की वजह से राज्यों को व्यय में कटौती करना होगा। 
Keyword: nirmala sitaraman, fiscal deficit, revenue, economy,,
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