बिजनेस स्टैंडर्ड - समयसीमा पर एमएफ से बातचीत कर रहा एस्सेल
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समयसीमा पर एमएफ से बातचीत कर रहा एस्सेल

जश कृपलानी / मुंबई 09 19, 2019

30 सितंबर को खत्म हो रही समयसीमा

समयसीमा बढ़ाने से पहले सेबी से दिशानिर्देश ले सकते हैं फंड हाउस
गिरवी शेयरों को नहीं बेचने का समझौता 30 सितंबर को हो रहा खत्म
एस्सेल समूह पर म्युचुअल फंडों का करीब 5 से 6 हजार करोड़ रुपये का बकाया

बिजनेस स्टैंडर्ड समयसीमा पर एमएफ  से बातचीत कर रहा एस्सेलएस्सेल समूह के प्रवर्तक गिरवी शेयर वापस लेने की समयसीमा बढ़ाने का अनुरोध म्युचुअल फंडों और अन्य ऋणदाताओं से कर रहे हैं। इसकी समयसीमा 30 सितंबर को खत्म हो रही है। सूत्रों ने इसकी जानकारी दी। ज़ी एंटरटेनमेंट में हिस्सेदारी की बिक्री से मिली रकम से प्रवर्तकों ने शेयरों के एवज में लिए गए कर्ज का कुछ हिस्सा पिछले हफ्ते चुकाया था। सूत्रों के अनुसार म्युचुअल फंड और अन्य ऋणदाता उसी स्थिति में समयसीमा बढ़ाने की अनुमति दे सकते हैं जब प्रवर्तक उन्हें संतोषजनक रूप से बताएंगे कि बकाया भुगतान जल्द ही अदा कर दिया जाएगा। फंड हाउस के एक वरिष्ठ कार्याधिकारी ने नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर बताया, 'मोहलत देने का प्रतिकूल असर भी पड़ सकता है। आगे और देरी होने पर भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) द्वारा सख्त कार्रवाई की जा सकती है।' फंड हाउस इस बारे में सेबी से दिशानिर्देश ले सकते हैं।

इस बारे में पूछे जाने पर एस्सेल समूह के प्रवक्ता ने कहा, 'एस्सेल समूह ऋणदाताओं के कंसोर्टियम से लगातार बात कर रहा है। संपत्तियों को बेचने की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है और समूह पुनर्भुगतान प्रक्रिया पर ध्यान दे रहा है। इस संबंध में अब तक सभी निर्णय ऋणदाताओं के हित में लिए गए हैं और उनकी सहमति के बाद ही उसे क्रियान्वित किया गया है।' ज़ी एंटरटेनमेंट का शेयर गुरुवार को 7.9 फीसदी की गिरावट पर बंद हुआ। हालांकि इसकी गिरावट की खास वजह पता नहीं चल पाई है लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि संभव है कि ऋणदाताओं ने बकाया वसूलने के लिए गिरवी शेयरों को भुनाया हो।

एस्सेल मसूह के चेयरमैन सुभाष चंद्रा को अपनी हिस्सेदारी बेचने पर रोक लगाए जाने की खबरों से भी ज़ी एंटरटेनमेंट की मुद्रीकरण की योजना पर असर पड़ने की आशंका है। कंपनी के प्रवक्ता ने कहा, 'समूह स्पष्ट करना चाहता है कि एस्सेल समूह और इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनैंस के बीच चल रही मध्यस्थता प्रक्रिया का ज़ी के शेयर बिक्री से कोई संबंध नहीं है क्योंकि बेचे गए शेयर म्युचुअल फंडों, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों और बैंकों के पास गिरवी हैं।'

मामले के जानकार एक शख्स ने कहा कि ज़ी के शेयर भाव में गिरावट से प्रवर्तकों को म्युचुअल फंडों के पास ज्यादा शेयर गिरवी रखने पड़ सकते हैं। जून तिमाही में एक्सचेंज को दी गई जानकारी के अनुसार ज़ी एंटरटेनमेंट में प्रवर्तकों के शेयर का 64 फीसदी हिस्सा पहले से गिरवी है। समूह की अन्य सूचीबद्ध कंपनियों के शेयर भी गिरवी है। इनमें डिश टीवी (प्रवर्तकों की 94.47 फीसदी हिस्सेदारी), सिटी नेटवक्र्स (प्रवर्तकों की 90 फीसदी हिस्सेदारी), ज़ी लर्न (82.74 फीसदी) और ज़ी मीडिया (93.54 फीसदी) शामिल हैं। पिछले हफ्ते एस्सेल समूह ने ज़ी में 8.7 फीसदी हिस्सेदारी बेचकर बकाये का एक हिस्सा चुकाया था। इससे म्युचुअल फंडों का आधा कर्ज चुका दिया गया था। एस्सेल समूह की फर्मों पर म्युचुअल फंडों का करीब  5,000 से 6,000 करोड़ रुपये का बकाया है। इससे पहले म्युचुअल फंड और अन्य ऋणदाताओं ने एस्सेल के प्रवर्तकों के साथ यथास्थिति बनाए रखने का समझौता किया था। इसके तहत 30 सितंबर तक गिरवी शेयर नहीं बेचे जाने पर सहमति जताई गई थी।

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