बिजनेस स्टैंडर्ड - दुश्मन ड्रोन से बचने की हो रही तैयारी
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दुश्मन ड्रोन से बचने की हो रही तैयारी

युवराज मलिक, अरिंदम मजूमदार और शाइन जैकब /  September 18, 2019

पिछले सप्ताह सऊदी अरब के तेल संयंत्रों पर ड्रोन से बड़ा हमला होने के बाद भारतीय रक्षा बल और निजी क्षेत्र ड्रोन से बचाव की तैयारी का जायजा ले रहे हैं। यमन के विद्रोही संगठन हूती ने 14 सितंबर को सऊदी अरब की सरकारी तेल कंपनी अरामको के दो तेल संयंत्रों को निशाना बनाया था। हमले से सऊदी अरब का आधा तेल एवं गैस उत्पादन प्रभावित हुआ है, जिससे तेल की वैश्विक कीमतों में अचानक भारी बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली की एक ड्रोन तकनीक कंपनी के संस्थापक ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया कि हाल में भारत के सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) ने नई दिल्ली में कुछ विशेषज्ञों को ड्रोन का पता लगाने और इसे निष्क्रिय करने के समाधान सुझाने के लिए आमंत्रित किया था। माना जा रहा है कि निजी कंपनियां, विशेष रूप से तेल रिफाइनरी और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) जैसी सरकारी संस्थाएं भी तैयारी की समीक्षा कर रही हैं। नई दिल्ली में अंतर-मंत्रालय समिति का गठन किया गया है, जो ड्रोन-रोधी समाधानों का परीक्षण कर रही है। समिति जल्द ही औपचारिक निविदा जारी करेगी। नागरिक उड्डयन मंत्रालय के तहत आनने वाली समिति में नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए), नागर विमानन सुरक्षा ब्यूरो, एएआई, गृह मंत्रालय और भारतीय वायु सेना के प्रतिनिधि शामिल हैं। 

 
इस प्रक्रिया से जुड़े एक सरकारी अधिकारी ने कहा, 'नौ कंपनियों ने आसमान में दुश्मन ड्रोनों को खत्म करने के लिए अपनी तकनीक के लाइव परीक्षण दिए हैं। इसके लिए दो चरणों में परीक्षणों का आयोजन हुआ था। हम जल्द ही अनुबंध पर अंतिम फैसला लेंगे।' सूत्रों के मुताबिक शुरुआती प्रदर्शनी में शामिल होने वाली कंपनियां आइडियाफोर्ज टेक्नोलॉजी, इजरायल एरोस्पेस इंडस्ट्रीज, ट्रैक्टर्स इंडिया, फ्रांस की अंतरिक्ष क्षेत्र की दिग्गज कंपनी थालेस, इजरायल की रक्षा कंपनी रफायल एडवांस्ड डिफेंस सिस्टम्स थीं। हालांकि सऊदी अरब पर हमले ने फिर से ड्रोन रोधी उपायों पर केंद्रित कर दिया है। भारत के लिए सतर्कता बरतना इसलिए भी जरूरी है क्योंकि उसके बड़े तेल रिफाइनिंग संयंत्र भारत-पाकिस्तान सीमा के पास हैं। इनमें रिलायंस का जामनगर में बड़ा तेल संयंत्र, बठिंडा में एचपीसीएल-मित्तल की रिफाइनरी, नयारा एनर्जी का वाडीनार  संयंत्र और इंडियन ऑयल के पानीपत, मथुरा और कोयली संयंत्र शामिल हैं। इन संयंत्रों की सुरक्षा का जिम्मा केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के पास है। 
 
ड्रोन रोधी उपाय 
 
बेंगलूरु की ड्रोन इंजीनियरिंग कंपनी जनरल एरोनोटिक्स के निदेशक और मुख्य कार्याधिकारी अभिषेक बर्मन ने कहा कि ड्रोन-रोधी तकनीक के दो हिस्से हैं- पता लगाना और निष्क्रिय करना। किसी ड्रोन का परंपरागत रडार सिस्टम या रेडियो फ्रीक्वेंसी आधारित समाधानों से पता लगाया जा सकता है। हालांकि बहुत कम ऊंचाई या बहुुत तेजी से उडऩे वाले या बहुत छोटे ड्रोन पकड़ में नहीं आने की आशंका होती है। इससे विशेष रडार सिस्टम की जरूरत पैदा होती है। उन्हें निष्क्रिय करने का सबसे आम समाधान जैमर है। आम तौर पर ड्रोन अपने पायलट के साथ संवाद 2.4 गीगाहट्र्ज बैंड पर करते हैं, लेकिन जैमर इस फ्रीक्वेंसी में अधिक फ्रीक्वेंसी का 'अवरोध' पैदा कर देते हैं। इससे ड्रोन का पायलट से संपर्क टूट जाता है और ड्रोन भटककर उड़ता रहता है। हालांकि ऑटोनोमस ड्रोन के मामले में जैमर कारगर नहीं रहते हैं। इन ऑटोनोमस ड्रोन में किसी विशेष लक्षित जगह की पहले प्रोग्रामिंग की हुई होती है। ऐसे मामलों में ड्रोन रोधी उपाय ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (जीपीएस) स्पूफिंग होता है, जो ड्रोन के जीपीएस को नुकसान पहुंचाता है, जिससे वह लक्ष्य से भटक जाता है। 
 
बर्मन के मुताबिक पूरी तैयार सुनिश्चित करने के लिए एक साथ कई तकनीकों जैसे हाई फ्रीक्वेंसी कैमरे, विभिन्न रेंज के कई रडार सिस्टम और निष्क्रय प्रणाली को अपनाने की जरूरत है। उन्होंने कहा, 'अगर ड्रोन को बनाने में एक तकनीक की जरूरत है तो ड्रोन रोधी प्रणाली के लिए तीन गुनी तकनीक की जरूरत होती है।' उन्होंने कहा कि यह तकनीक महंगी है और इसमें बड़ी मात्रा में ऊर्जा की जरूरत होती है। 
 
ड्रोन नीति 
 
दिसंबर 2018 में डीजीसीए ने वाणिज्यिक और निजी इस्तेमाल की खातिर ड्रोन उड़ाने के लिए एक एकीकृत ड्रोन नीति जारी की थी। नए नियमों के तहत 250 ग्राम से अधिक वजन वाले हर मानव रहित हवाई उपकरण को डिजिटल स्काई प्लेटफॉर्म पर पंजीकृत कराना होगा और प्रत्येक उड़ान से पहले मंजूरी लेनी होगी। विमानन मंत्रालय ने पूरे भारतीय हवाई क्षेत्र को उड़ान और गैर-उड़ान क्षेत्रों में बांटा है। डीजीसीए के नियमों का पालन करने वाले ड्रोन की प्रोग्रामिंग इस तरह की जाती है कि यह गैर-उड़ान क्षेत्र में नहीं उड़ सकता है। हालांकि नियमों के दायरे में न आने वाले ड्रोन पर यह लागू नहीं होता है। व्यावसायिक ड्रोन प्रबंधक स्टार्टअप स्काईलार्क ड्रोन्स के सह-संस्थापक मुगहीलान थिरू रामासामी ने कहा, 'यह उद्योग विभिन्न तरीकों के जरिये कई समाधानों का परीक्षण कर रहा है।'
Keyword: saudi arabia, crude oil, attack, Aramco, drone,,
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