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नेटवर्क से जुड़े बुनियादी ढांचे वाला भारत

विनायक चटर्जी /  September 18, 2019

बुनियादी ढांचे में सुधार का संबंध जीवन जीने की परिस्थितियों में सुधार से है। ऐसे में बुनियादी ढांचा क्षेत्र में उपयोगिता आधारित और नेटवर्किंग केंद्रित परियोजनाओं का बढऩा स्वाभाविक है। बता रहे हैं विनायक चटर्जी

 
देश में बुनियादी ढांचे की आपूर्ति का ताना बाना अत्यधिक व्यस्तता से बुना जा रहा है जिसमें एक स्थान का अत्यधिक महत्त्व है। इसमें बीते वर्षों का उतार-चढ़ाव भरा निवेश ही है। मौजूदा दशक और आगामी दशक में अधोसंरचना कंपनियां और विनिर्माण कंपनियां अप्रत्याशित कदम उठाएंगी और भारी पूंजीगत व्यय, जगह आधारित एकल परियोजनाओं  मसलन राजमार्ग, पुल, बिजली संयंत्र, बंदरगाह और हवाई अड्डों से उपयोगिता आधारित आपूर्ति का रुख करेंगी। इसमें दो राय नहीं कि अब निवेश का एक चरण संचार और उपयोगिता आपूर्ति की ओर स्थानांतरित हो चुका है। 
 
भारतमाला परियोजना की बात करें तो इससे पहले राजमार्ग निर्माण परियोजनाएं केवल सड़क निर्माण पर केंद्रित रहती थीं लेकिन भारतमाला का लक्ष्य जिला मुख्यालयों, लॉजिस्टिक और औद्योगिक केंद्रों तथा बंदरगाहों के बीच संपर्क कायम करने का है। हकीकत में इस कार्यकम के पहले चरण के अधीन 34,800 किलोमीटर सड़क बनाने की योजना थी जिसमें से केवल 10,000 किमी मार्ग ही दो शहरों को जोडऩे वाला प्रमुख मार्ग था, शेष निवेश जगहों को जोडऩे पर केंद्रित है। एक ओर जहां सड़कें देश के बुनियादी ढांचे में आ रहे इस नए नेटवर्क संबंधी बदलाव का सहज उदाहरण हैं वहीं अन्य कार्यक्रम अभी भी बिंदुओं पर केंद्रित हैं। पानी, बिजली, फाइबर संचार, गैस, क्षेत्रीय विमानपत्तन और इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन आदि इसके उदाहरण हैं। 
 
पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय का जल संसाधन, नदी विकास और गंगा पुनरुद्घार मंत्रालय में विलय करके 31 मई, 2019 को जल शक्ति मंत्रालय गठित किया गया। जल शक्ति मंत्रालय के माध्यम से सरकार ने यह वादा किया है कि सन 2024 तक सबको पाइप वाला पानी उपलब्ध कराया जाएगा। इसे 2019-20 के बजट में हर घर जल का नाम दिया गया है। पहले इसका नाम नल से जल था। यह परियोजना अत्यधिक महत्त्वाकांक्षी है। नीति आयोग की गत वर्ष आई एक रिपोर्ट में कहा गया कि देश की तीन चौथाई आबादी को उसके आवास परिसर में पेयजल नहीं मिलता। चूंकि वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार देश में करीब 23 करोड़ परिवार थे। अगर मान लिया जाए कि इस आंकड़े में अब तक कोई बदलाव नहीं आया है तो नल से जल योजना के तहत करीब 19 करोड़ परिवारों को सुविधा पहुंचानी होगी। 
 
अप्रैल 2018 के अंत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह घोषणा की थी कि देश के सभी 6.40 लाख गांवों का विद्युतीकरण पूरा हो चुका है। इसके तत्काल बाद यह घोषणा कर दी गई कि देश के सभी परिवारों का विद्युतीकरण होगा और इसी के साथ सौभाग्य योजना की शुरुआत हुई। इससे संबंधित सरकारी वेबसाइट के मुताबिक उस वक्त करीब 3.15 करोड़ घरों में बिजली पहुंचनी थी, हालांकि अब यह लक्ष्य काफी हद तक हासिल किया जा चुका है। वर्ष 2011 में शुरू की गई भारत नेट परियोजना नैशनल ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क परियोजना है जिसके माध्यम से 2.50 लाख गांवों को संचार उपलब्ध कराना है। देश के अधिकांश राज्यों में इसका क्रियान्वयन चल रहा है।
 
शहरी गैस विकास भी समान रूप में मायने रखता है और यह भी देश के लाखों लोगों के जीवन में बदलाव के लिए तैयार है। अप्रैल 2020 में शुरुआत के बाद सन 2029 तक विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों में बोली हासिल करने वालों ने करीब 20 लाख पाइप वाले गैस कनेक्शन सालाना देने का निर्णय लिया है। इसके अलावा देश भर में 3,500 सीएनजी स्टेशन, लगाने और 58,000 किमी पाइप लाइन बिछाने की योजना है। शहरी गैस के क्षेत्र में बोली का ताजा दौर इन वर्षों में आबादी के 70 प्रतिशत हिस्से को पाइप वाली गैस के दायरे में ले आएगा।
 
सरकार द्वारा इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने पर दिए जा रहे जोर और इनके लिए बुनियादी ढांचा मुहैया कराने की उसकी कोशिशों के क्रम में बिजली मंत्रालय ने दिसंबर 2018 में चार्जिंग स्टेशनों के लिए दिशानिर्देश और मानक घोषित किए। भारी उद्योग मंत्रालय ने ऐसे शहरी स्थानीय निकायों, सरकारी उपक्रमों और निजी-सार्वजनिक संस्थाओं से आवेदन मंगाए हैं जो देश के विभिन्न राज्यों और शहरों में ऐसे चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने में रुचि रखते हैं। इस दायरे में वही शहर आएंगे जो सन 2011 की जनगणना मे 10 लाख से अधिक आबादी वाले रहे हों। इसके अलावा नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अधीन क्षेत्रीय संचार की उड़ान योजना के तहत विमानपत्तन परियोजनाएं हैं। इस योजना का लक्ष्य छोटे शहरों को विमान सुविधा उपलब्ध कराना है।
 
इसके लाभ स्पष्ट हैं। कई ऐसे शोध हैं जो बता चुके हैं कि केवल संचार सुविधा बढ़ाने से आर्थिक लाभों में किस तरह बढ़ोतरी होती है। मसलन दूरदराज इलाकों को आर्थिक केंद्रों तक भौतिक और इलेक्ट्रॉनिक संचार मुहैया कराने से लाभ होता है। इससे लेनदेन की लागत में कमी आती है। खुदरा कारोबारी ग्रामीण इलाकों में अधिक अंदर तक पहुंच बना सकते हैं। इसके अलावा ऐसी कंपनियां जो बुनियादी सुविधाओं की कमी के कारण उन इलाकों में निवेश नहीं करतीं, वे भी ऐसा करती हैं जिससे रोजगार तैयार होते हैं। इलेक्ट्रॉनिक संचार से वैश्विक स्तर पर संभावनाओं के नए द्वार खुलते हैं। पाइप से जलापूर्ति सदियों पुरानी समस्या को समाप्त करती है। 
 
परंतु दूरदराज तक संपर्क कायम करने वाली इन संचार परियोजनाओं में चुनौती भी बहुत बड़ी है। नल से जल के लिए केंद्र को अप्रत्याशित स्तर पर काम करना होगा क्योंकि पानी राज्य का क्षेत्र है। इसी तरह की चुनौतियां शहरी गैस परियोजनाओं में भी आएंगी क्योंकि वहां भी नगर निगम और राज्य सरकार के तालमेल के बाद ही भूमि अधिग्रहण हो सकेगा। ऐसी परियोजनाओं के लिए मंजूरी भी बहुत अहम है। हकीकत यह है कि नए नेटवर्क आधारित बुनियादी ढांचे की राह में सबसे बड़ी बाधा तौर तरीकों की है। रोजमर्रा के कामकाज की प्रबंधकीय चुनौतियों के अलावा असंगठित और बिखरी हुई श्रम शक्ति भी एक समस्या है। फंडिंग की बात करें तो सरकारी वित्त पर फिलहाल काफी दबाव है। बुनियादी ढांचे की नेटवर्किंग के लिए संस्थागत फंडिंग को लेकर सर्वथा नए मानक अपनाने की आवश्यकता है।  ये चुनौतियां छोटी नहीं हैं लेकिन अगर देश के बुनियादी ढांचे को अंतिम व्यक्ति तक सुविधाएं पहुंचानी हैं तो यह एक ऐसी चुनौती है जिससे हमें निपटना होगा। हम सभी जानते हैं कि बुनियादी ढांचे का सीधा संबंध जीवन की गुणवत्ता में सुधार से है।
Keyword: infra, projects, road, water,,
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