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विक्रम बख्शी के देश छोडऩे पर एनसीएलएटी की रोक

आशिष आर्यन / नई दिल्ली September 18, 2019

मैकडॉनल्ड्स इंडिया के पूर्व भारतीय प्रमुख विक्रम बख्शी के सामने नई समस्या खड़ी हो गई है। नैशनल कंपनी लॉ अपील ट्रिब्यूनल (एनसीएलएटी) ने बुधवार को कहा कि पंचाट या डेट रिकवरी ट्रिब्यूनल (डीआरटी) को सूचित किए बिना वह देश न छोड़ें। एनसीएलएटी ने यह भी कहा कि कनॉट प्लाजा रेस्टोरेंट्स लिमिटेड (सीपीआरएल) और मैकडॉनल्ड्स इंडिया के बीच हुआ सौदा अगले आदेश तक प्रभावी नहीं होगा। हुडको ने अपनी याचिका में कहा था कि सीपीआरएल और मैकडॉनल्ड्स के बीच सौदा डीआरटी के आदेशों का उल्लंघन है। ऐसे में सुनवाई करते हुए एनसीएलएटी पीठ ने कहा कि प्रथम दृष्टया इस सौदे पर रोक लगाने का मामला बनता है और मामले के गुण के आधार पर सुनवाई होगी।
 
एनसीएलएटी पीठ ने कहा, हमने पाया कि बख्शी और मैकडॉनल्ड्स ने समझौता किया, जो डीआरटी के अंतरिम आदेश के खिलाफ है। हमारा मानना है कि दोनों पक्षकार डीआरटी या ट्रिब्यूनल को सूचित किए बिना न तो इस करार को लागू करें या अनुमति के बिना देश छोड़ें। एनसीएलएटी अब इसकी जांच करेगा कि क्या बख्शी व मैकडॉनल्ड्स के बीच सौदा कानून के मुताबिक हुआ है। इस साल 7 मई को बख्शी व मैकडॉनल्ड्स इंडिया ने एनसीएलएटी को सूचित किया था कि दोनोंं पक्षकार अदालत से बाहर मामला निपटाने पर काम कर रहे हैं। निपटान की शर्तों के मुताबिक, मैकडॉनल्ड्स इंडिया ने बख्शी और उनकी पत्नी की सीआरपीएल की 50 फीसदी हिस्सेदारी खरीद ली है, लेकिन रकम का खुलासा नहीं किया है।
 
हालांकि सौदा प्रभावी होने से पहले हुडको ने इसकी अंतिम मंजूरी के लिए एनसीएलएटी से सुनवाई की मांग की। हुडको ने दावा किया है कि विक्रम बख्शी के स्वामित्व वाली कंपनी पर उसका 190 करोड़ रुपये बकाया है और मैकडॉनल्ड्स के साथ सौदे के जरिए मिलने वाली रकम से उनका बकाया चुकाया जाए।
Keyword: mcdonald, vikram bakshi, NCLT,,
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