बिजनेस स्टैंडर्ड - जीएसटी में न हो कटौती
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Monday, October 21, 2019 08:30 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम विशेष खबर

जीएसटी में न हो कटौती

संपादकीय /  September 17, 2019

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के बारे में निर्णय लेने वाली जीएसटी परिषद की इस हफ्ते होने वाली बैठक में कर दरों के बारे में चर्चा होने की संभावना है। जहां मौद्रिक नीति समिति नीतिगत दरों पर फैसला अगले महीने करेगी वहीं मौजूदा आर्थिक स्थिति से परेशान उद्योग जगत ने जीएसटी परिषद से राहत मिलने की उम्मीदें लगाई हुई हैं। लेकिन अपेक्षा से अधिक तीव्र सुस्ती के दौर में जीएसटी दरों में कटौती करना इतना आसान नहीं है। सैद्धांतिक तौर पर यह कहा जा सकता है कि जीएसटी दरें कम करने से मांग बढ़ाने में मदद मिलेगी और इससे राजस्व क्षति की भी एक हद तक भरपाई की जा सकेगी। उद्योग जगत के कई क्षेत्रों, खासकर ऑटो क्षेत्र की तरफ से जीएसटी दर कम करने की मांग जोरशोर से की जा रही है। ऑटो क्षेत्र में पिछले कई महीनों से बिक्री काफी कमी  आई है। लेकिन परिषद को इस समय कई कारणों से दरें कम करने से परहेज करना चाहिए।

 
पहला, किसी क्षेत्र के लिए केंद्रित कर कटौती से यह कर प्रणाली कमजोर होगी और फिर अन्य क्षेत्रों से भी ऐसी मांगें आएंगी। ऑटो के अलावा बिस्कुट एवं सीमेंट कारोबार भी राहत की राह देख रहे हैं। अगर परिषद क्षेत्र-केंद्रित राहत देना शुरू करती है तो फिर यह सूची बढ़ती ही जाएगी। दूसरा, इस समय कर राजस्व को बनाए रखना बेहद अहम है। इस समाचारपत्र में ही प्रकाशित हो चुका है कि अगस्त तक उपकर संग्रह और राज्यों को वितरित क्षतिपूर्ति के बीच का अंतर 24,000 करोड़ रुपये हो चुका है। जीएसटी संग्रह के अनुमान से कम रहने से केंद्र सरकार भी असंगत रूप से प्रभावित होगी क्योंकि इस कमी की भरपाई उसे ही करनी होगी। किसी भी सूरत में केंद्र सरकार का राजस्व लक्ष्य से काफी पीछे रहने के आसार हैं लिहाजा उसे बजट लक्ष्य पूरा करने के लिए 18 फीसदी राजस्व वृद्धि की जरूरत है। अब तक के रुझानों से यही लगता है कि केंद्र सरकार के राजस्व में दो लाख करोड़ रुपये से भी अधिक कमी पड़ सकती है। ऐसे में जीएसटी दरों में कटौती से सरकार की मुश्किलें बढ़ेंगी ही।
 
भले ही भारतीय रिजर्व बैंक से 58,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त पूंजी मिलने से सरकार को कुछ मदद मिलेगी लेकिन वह कर राजस्व एवं क्षतिपूर्ति का अंतर पाटने के लिए नाकाफी होगा। ऐसे में सरकार को या तो व्यय कम करना होगा या फिर अपनी उधारी बढ़ानी होगी। इन दोनों ही कदमों का अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर होगा। सरकार ब्याज भुगतान और वेतन जैसे अधिकांश राजस्व व्ययों में कटौती नहीं कर सकती है लिहाजा उसे अपने पूंजीगत व्यय में ही कटौती करनी होगी। दूसरी तरफ अधिक उधारी से अर्थव्यवस्था में जमाओं पर सरकार की दावेदारी बढ़ेगी और निजी क्षेत्र की गतिविधि प्रभावित होगी। ऐसी खबरें भी आई हैं कि सरकार बजट उधारी एवं व्यय में कमी लाने की कोशिश कर रही है। इसका स्वागत किया जाना चाहिए। इससे पारदर्शिता आएगी और बजट आंकड़े भी अधिक विश्वसनीय बनेंगे। लेकिन अगर राजस्व संग्रह कम रह जाता है तो सरकार इस दिशा में बहुत आगे नहीं बढ़ सकती है। इस तरह से सरकार को दरों में कटौती की क्षेत्रवार मांगों पर ध्यान देने के बजाय लंबी अवधि में एक समझदार रणनीति अपनानी होगी। इसके तहत 28 फीसदी दायरे में आने वाली कुछ वस्तुओं एवं सेवाओं को 18 फीसदी दायरे में लाना और निचले दायरे वाली कुछ वस्तुओं एवं सेवाओं की दर बढ़ाई जा सकती है। इस तरह परिषद धीरे-धीरे कर स्लैब की दो-तीन श्रेणियां बना सकती है। ऐसा होने पर जीएसटी में सुधार लाने के साथ ही कर संग्रह की गिरावट भी कम करने में मदद मिलेगी। परिषद को जीएसटी फाइलिंग सुगम बनाने और अनुपालन बढ़ाने पर भी ध्यान देना चाहिए। बड़े पैमाने पर धांधली एवं फर्जी बिलों के मामले सामने आए हैं। परिषद को इन मसलों पर तत्काल ध्यान देने को प्राथमिकता देनी चाहिए।
Keyword: gst, input tax, credit, crisil, IGST, SGST,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या राजकोषीय घाटे के लक्ष्य से चूकेगी सरकार?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.