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'उद्योगों की चिंता समझती है सरकार'

बीएस संवाददाता / नई दिल्ली September 17, 2019

भारतीय उद्योग जगत की चिंताओं को दूर करते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को कहा कि सरकार उद्योगों के समक्ष पैदा हुई चुनौतियों पर विचार कर रही है और कई विश्लेषकों ने सुस्त अर्थव्यवस्था में और रकम डालने का सुझाव दिया है। उन्होंने कुछ चुनौतियों के लिए वैश्विक आर्थिक मंदी को भी जिम्मेदार ठहराया। सरकार की ओर से सुधार की दिशा में उठाए गए कदमों का उल्लेख करते हुए शाह ने कहा कि वस्तु एवं सेवाक र जैसी शुरुआती व्यवस्थागत कठिनाइयों को जल्द दूर कर लिया जाएगा। उन्होंने कहा, 'शुरुआत में आपको थोड़ी कठिनाई उठानी पड़ सकती है, लेकिन सुधार के कदम व्यापक बेहतरी लेकर आएंगे।'
 
कारोबारी दिग्गजों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, 'भारत 2024 तक 5 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था वाला देश बनेगा और ऐसा निश्चित रूप से होगा।'  इस अवसर पर विशेषज्ञों ने ऐसे समय में राजकोषीय विस्तार नीति की जरूरत पर भी विचार किया जब जीडीपी वृद्घि दर घटकर 6 वर्ष के निचले स्तर 5.5 प्रतिशत पर रह गई है।  भारत में केपीएमजी के उप मुख्य कार्याधिकारी अखिल बंसल ने इस अवसर पर सुझाव देते हुए कहा, 'बैंकों के पास कोष की कमी नहीं है, लेकिन एनबीएफसी इस समस्या से जूझ रही हैं। उपभोक्ता उधारी बढ़ाने के लिए व्यवस्था में नकदी डाली जानी चाहिए, भले ही इससे राजकोषीय घाटे में इजाफा हो।' आदित्य बिड़ला गु्रप के समूह कार्यकारी अध्यक्ष एवं मुख्य अर्थशास्त्री अजीत रानाडे ने कहा कि वह राजकोषीय विस्तार के समर्थन में हैं क्योंकि अर्थव्यवस्था को कमजोर मांग से जूझना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि क्या राजकोषीय घाटा चालू वित्त वर्ष के लिए 3.3 प्रतिशत के बजटीय अनुमान से बढ़कर 3.5 प्रतिशत पर पहुंच जाएगा, यह चर्चा का विषय है। उन्होंने कहा कि केंद्र को आरबीआई से 1.67 लाख करोड़ रुपये मिलेंगे।
 
ब्रूकिंग्स इंडिया के चेयरमैन एवं ब्रूकिंग्स इंस्टीट्यूशन में वरिष्ठï फेलो विक्रम सिंह मेहता ने कहा कि मांग और निवेश बढ़ाने के लिए राजकोषीय दायरे का विस्तार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार को इस साल के बजट में पीएम-किसान के लिए निर्धारित पूरी रकम (75,000 करोड़ रुपये) वितरित करनी चाहिए। इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने अपने संबोधन में कहा कि भारत में हाइटेक मैन्युफैक्चरिंग और नवोन्मेश का केंद्र बनने की क्षमता है। उन्होंने कहा कि मोबाइल फोन और उसके पुर्जों की फैक्टरियों की संख्या 2014 के 2 से बढ़कर अब 268 हो गई है, जिनमें से 93 फैक्टरियां सिर्फ नोएडा में हैं। उन्होंने कहा कि ऐपल भी व्यापक पैमाने पर भारत में उतरने जा रही है। प्रसाद ने कहा, 'मेरी महत्त्वाकांक्षा है कि भारत दुनिया की डेटा रिफाइनरी बने।' भारत में डेटा कानूनों पर बात करते हुए प्रसाद ने कहा कि सरकार डेटा उपलब्धता, डेटा उपयोग और डेटा को गोपनीय रखने के मामले में संतुलन चाहती है। 
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