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लक्ष्य पूरा नहीं हुआ तो कटेगा वेतन

अभिषेक रक्षित, मेघा मनचंदा और श्रेया जय / कोलकाता/नई दिल्ली September 16, 2019

नकदी के संकट और लक्ष्य पूरा न होने से चिंतित सार्वजनिक क्षेत्र की कुछ इकाइयों (पीएसयू) ने मितव्ययिता के कदमों के साथ कर्मचारियों पर दबाव बनाना शुरू कर दिया है, जिससे स्थिति पर काबू पाया जा सके।  भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) ने लक्ष्य न पूरा होने पर उसी के अनुपात में जुर्माना लगाने का फैसला किया है, जिसकी भरपाई कर्मचारियों के वेतन से की जाएगी। इस कदम से दूरसंचार विभाग (डीओटी) नाराज है और उसने संकट में फंसी कंपनी से इसकी वजह बताने को कहा है कि वह अपने कर्मचारियों को धमकी भरे पत्र क्यों भेज रही है। 

 
इसके पहले ऑडिट समिति की सिफारिशों के बाद कोल इंडिया की सबसे बड़ी सहायक इकाई साउथ इंडियन कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) ने एक प्रस्ताव पारित किया था कि कंपनी का वित्तीय लक्ष्य पूरा न कर पाने और उत्पादन के मानकों को हासिल करने में असफल रहने वाले वरिष्ठ कर्मचारियों के वेतन में 25 प्रतिशत कटौती की जाएगी। एसईसीएल की कोल इंडिया के  सालाना उत्पादन में करीब 25 प्रतिशत हिस्सेदारी है।  हालांकि यह प्रस्ताव एसईसीएल बोर्ड ने यह कहते हुए खारिज कर दिया कि यह अत्यंत कठोर कदम है। लेकिन इस कदम से पता चलता है कि पीएसयू ने अब विफलता के लिए कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय करने पर विचार शुरू कर दिया है। कोल इंडिया के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि इस कदम से हालांकि यह संदेश भेजने में मदद मिली है कि चीजों को लापरवाही से नहीं लिया जा सकता और कर्मचारियों को प्रदर्शन मानकों के मुताबिक काम करना ही होगा। 
 
एसईसीएल के सूत्रों ने कहा कि यह प्रस्ताव स्वतंत्र निदेशकों की ओर से लाया गया था, जो चाहते थे कि अगर एसईसीएल उत्पादन और वित्तीय लक्ष्य पूरा करने में असफल रहती है तो जवाबदेही तय हो और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। कोल इंडिया की और किसी सहायक इकाई ने ऐसा प्रस्ताव नहीं पेश किया है।  एसईसीएल ने पिछले वित्त वर्ष में 15 करोड़ टन उत्पादन के लक्ष्य को पार कर लिया था और मूल कंपनी ने इसकी प्रशंसा की थी, लेकिन इस साल अप्रैल अगस्त के दौरान इसका उत्पादन 14.3 प्रतिशत गिरकर 5.348 करोड़ टन रह गया। वहीं इस दौरान बिक्री में 9.8 प्रतिशत की गिरावट आई है। 
 
बीएसएनएल के मामले में एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'हमने कंपनी से पूछा है कि वह अपनी इच्छा से अपने कर्मचारियों के वेतन में कटौती का फैसला कैसे कर सकती है। यह श्रम कानूनों के खिलाफ है।' कर्मचारियों को लिखे गए पत्र के बारे में बीएसएनएल की गुडग़ांव शाखा के एक कर्मचारी ने कहा, 'अगस्त 2019 की उपलब्धियों की समीक्षा के बाद यह पाया गया कि तमाम सब डिवीजन में लक्ष्य पूरा नहीं किया गया है। ऐसे में उसी अनुपात में जुर्माने के रूप में वेतन मेंं कटौती लागू की गई है, जितना लक्ष्य पूरा नहीं किया गया है।' 
 
वेतन में कटौती मौजूदा महीने में होगी और अगर संबंधित अधिकारी सितंबर में अपना लंबित लक्ष्य हासिल कर लेते हैं तो उन्हें कटौती की प्रतिपूर्ति कर दी जाएगी। जानकारी के मुताबिक इस तरह के पत्र देश भर के शाखा कार्यालयों में उन फील्ड अधिकारियों को भेजे गए हैं, जो लैंडलाइन और ब्रॉडबैंड की बिक्री का लक्ष्य हासिल करने में सफल नहीं रहे हैं।  बहरहाल भारत हैवी इलेक्ट्रिकल लिमिटेड (बीएचईएल) के कर्मचारी भाग्यशाली नहीं रहे हैं। विभिन्न 30 डिवीजन और कार्यालयों के कर्मचारियों को भेजे गए पत्र में बीएचईएल के मानव संसाधन विभाग ने कहा कि विभिन्न खातों में नकदी का प्रवाह नियमित किए जाने की जरूरत है, जिससे नकदी की कमी और इस तरह के दबाव की स्थिति से निपटा जा सके और यह फैसला किया गया है कि सभी कर्मचारियों के अर्जित अवकाश के नकदीकरण की व्यवस्था को बंद किए जाने का फैसला किया गया है। 
 
इस सिलसिले में बीएचईएल के प्रवक्ता को कई बार कॉल और मैसेज करने पर भी समाचार लिखे जाने तक कोई जवाब नहीं मिला। 6 सितंबर 2019 को लिखे पत्र में कहा गया है, 'विभिन्न खातों में नकदी के प्रवाह को नियमित किया जा रहा है, जिससे मौजूदा हालत से निपटा जा सके और कार्यशील पूंजी की जरूरतों के लिए नकदी की उपलब्धता पर प्राथमिकता दी जा रही है, जिससे कच्चे माल की खरीद, विनिर्माण का काम, और परियोजनाएं लागू करने का काम हो सके। इन विपरीत परिस्थितियों में यह फैसला किया गया है कि अर्जित अवकाश की सेवा के दौरान नकदीकरण लंबित किया जाए।' 
 
पिछले 4 वित्तीय वर्षों से बीएचईएल का ऑर्डर बुक 1 लाख करोड़ रुपये पर स्थिर बना हुआ है और पहले के साल की तुलना में 2018-19 में नए ऑर्डर में 70 प्रतिशत की कमी आई है। बिजली क्षेत्र में मंदी और देरी से विविधीकरण के फैसले के कारण बीएचईएल का राजस्व प्रभावित हुआ है, जो 2018-18 में गिरकर 34,600 करोड़ रुपये रह गया है।
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