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रियल्टी शेयर टूटे, सरकारी प्रोत्साहन नहीं कर पाया समस्या का समाधान

अर्णव दत्ता और राघवेंद्र कामत / नई दिल्ली/मुंबई September 16, 2019

उद्योग के प्रतिभागियों ने कहा है कि रियल एस्टेट बाजार को बहाल करने के इरादे से घोषित हालिया सरकारी कदम पर्याप्त नहीं हैं। मूल रूप से 60 फीसदी पूर्ण हो चुकी अफोर्डेबल और मध्यम स्तर की हाउसिंग परियोजना के लिए प्रस्तावित फंड ने ज्यादातर लंबित परियोजनाओं को छोड़ दिया है। शनिवार की घोषणा के बाद शेयर बाजार ने आज नकारात्मक प्रतिक्रिया जताई। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का रियल्टी इंडेक्स शुक्रवार के बंद स्तर के मुकाबले 0.84 फीसदी नीचे बंद हुआ। इंडेक्स में शामिल 70 फीसदी शेयर (डीएलएफ, ओमेक्स, शोभा, प्रस्टीज, ओबेरॉय रियल्टी और गोदरेज प्रॉपर्टीज आदि) लाल निशान के साथ बंद हुए।

 
एडलवाइस प्रोफेशनल इन्वेस्टर रिसर्च के मुताबिक, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली की परियोजनाओं के लिए किसी तरह की राहत की पेशकश नहीं की गई है, जहां ज्यादातर दबाव वाली परियोजनाएं हैं क्योंकि इनमें से ज्यादातर पहले ही नैशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल के दायरे में हैं। एडलवाइस ने कहा कि प्रीमियम व लक्जरी क्षेत्र की दबाव वाली परियोजनाओं को किसी तरह की राहत का ऐलान नहीं किया गया। मुंबई व दिल्ली में ऐसी सबसे ज्यादा परियोजनाएं हैं और इन पर दबाव बना रहेगा। कन्फेडरेशन ऑफ रियल एस्टेट डेवलपर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (क्रेडाई) के अध्यक्ष सतीश मागर के मुताबिक, 60 फीसदी पूरा होने के चरण से पहले फंसी परियोजनाओं की संख्या काफी ज्यादा है। प्रस्तावित फंड ऐसी परियोजनाओं को शामिल नहीं करता, ऐसे में ज्यादातर डेवलपरों की नकदी की समस्या का समाधान इससे नहीं हो पाएगा।
 
कोटक इंस्टिट्यूशनल इक्विटीज रिसर्च के अनुमान के मुताबिक, 20,000 करोड़ रुपये का फंड करीब 2.50 लाख घर को पूर्ण करने की लागत में सहूलियत दे सकता है, जो 60 फीसदी पूरे हो चुके हैं। इसमें कहा गया है, रियल एस्टेट क्षेत्र को दिया गया प्रोत्साहन सूचीबद्ध रियल एस्टेट शेयरों को सीमित तौर पर प्रभावित करेगा। सूचीबद्ध रियल एस्टेट शेयरों की परेशानी कम रही है और उनके पास ऐसे मकान नहीं है जो सरकारी प्रोत्साहन के लिए अफोर्डेबल हाउसिंग के मानक को पूरा करता हो। बाजार को उम्मीद थी कि आर्थिक पैकेज से प्रीमियम हाउसिंग क्षेत्र की खरीद लागत (कर प्रोत्साहन के जरिये) घटाने में मदद मिलेगी या दबाव वाली वैसी परियोजना की चिंता दूर करेगी, जो फंड की कमी से अटके हुए हैं।
 
प्रॉपइक्विटी के आंकड़ों से पता चलता है कि मध्यम व अफोर्डेबल हाउसिंग क्षेत्र में करीब 10 लाख इकाइयां दिसंबर 2021 तक पूरी होनी है। इसके अतिरिक्त देश भर में मध्यम व अफोर्डेबल हाउसिंग में 4.40 लाख से ज्यादा इकाइयां पूरी तरह अटकी हुई हैं। उसका अनुमान है कि कुल 7.40 लाख इकाइयां या तो अटकी हुई हैं या उनमें देर हो रही है, जिन्हें पूरा करने के लिए 90,000 करोड़ रुपये की दरकार होगी यानी सरकार की तरफ से प्रस्तावित 20,000 करोड़ रुपये के फंड से काफी ज्यादा। इसके अलावा सात अग्रणी शहरों में 1.74 लाख प्रीमियम व लक्जरी इकाइयां अटकी हुई हैं। अफोर्डेबल हाउसिंग कमेटी (क्रेडाई) के चेयरमैन मनोज गौड़ के मुताबिक, शुरुआती चरण में अटकी परियोजनाओं को सहारे की दरकार है, न कि उन्हें जो पहले ही 60 फीसदी पूरी हो चुकी है।
Keyword: real estate, property, share,,
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