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प्रस्ताव ठुकराए जाने से टूटा इक्विटास

समी मोडक / मुंबई September 16, 2019

इक्विटास होल्डिंग्स के शेयर में भारी गिरावट दर्ज की गई जब बाजार नियामक सेबी ने आरंभिक सार्वजनिक निर्गम के बिना स्मॉल फाइनैंस बैंकिंग इकाई को सूचीबद्ध कराने का प्रस्ताव ठुकरा दिया। कंपनी का शेयर करीब 13 फीसदी टूटकर 102 रुपये पर बंद हुआ क्योंकि विश्लेषकों ने तथाकथित होल्डिंग कंपनी की छूट का हवाला देते हुए इसके शेयर की लक्षित कीमत घटा दी। भारतीय रिजर्व बैंक के दिशानिर्देशों का अनुपालन करने के लिए कंपनी को इक्विटास स्मॉल फाइनैंंस बैंक को अगले साल मार्च तक सूचीबद्ध कराना है। इक्विटास होल्डिंग्स ने स्मॉल फाइनैंस बैंक को सूचीबद्ध कराने के लिए एक प्रस्ताव के साथ नियामक से संपर्क किया था, जो उसकी पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी है। इस प्रस्ताव को सेबी ने ठुकरा दिया क्योंकि वह स्कीम ऑफ अरेंजमेंट पर जारी परिपत्र के मुताबिक नहीं था। स्कीम ऑफ अरेंजमेंट को दोबारा तैयार करने के बजाय इक्विटास होल्डिंग्स ने कहा कि वह जल्द ही आईपीओ की प्रक्रिया शुरू करेगी और अगले वित्त वर्ष के आखिर से पहले सूचीबद्ध कराएगी।

 
इन्वेस्को सिक्योरिटीज ने इस शेयर की लक्षित कीमत 190 रुपये से घटाकर 140 रुपये कर दी और कहा कि होल्डिंग कंपनी की छूट काफी ज्यादा हिस्सेदारी पर लागू होगी। अगर सेबी ने आईपीओ प्रस्ताव के बिना सूचीबद्धता को मंजूरी दिया होता तो इक्विटास होल्डिंग की हिस्सेदारी इक्विटास एसएफबी में 53 फीसदी रह जाती। आईपीओ में इक्विटास होल्डिंग को महज 10 फीसदी हिस्सेदारी बेचनी होगी क्योंकि उसे तत्काल पूंजी की दरकार नहीं है। इसलिए होल्डिंग कंपनी की छूट 90 फीसदी हिस्सेदारी पर होगी जबकि पहले 53 फीसदी पर ऐसा होने का अनुमान लगाया गया था।
 
क्या है होल्डिंग कंपनी की छूट?
 
होल्डिंग कंपनी की छूट का मतलब यह है कि सहायक की मार्क टु मार्केट वैल्यू होल्डिंग कंपनी के मूल्यांकन पर पूरी तरह प्रतिबिंबित नहीं होगी। कई सूचीबद्ध कंपनियां होल्डिंग कंपनी के ढांचे के साथ है। उनमें ग्रासिम इंडस्ट्रीज, लार्सन ऐंड टुब्रो, महिंद्रा ऐंड महिंद्रा शामिल है। अभी ग्रासिम इंडस्ट्रीज का बाजार मूल्यांकन सिर्फ 47,115 करोड़ रुपये है जबकि अल्ट्राटेक सीमेंट में इसकी 60 फीसदी हिस्सेदारी का मूल्यांकन 66,000 करोड़ रुपये है। इसी तरह एलऐंडटी का बाजार मूल्यांकन तीन सूचीबद्ध इकाइयों एलऐंडटी इन्फोटेक, एलऐंडटी फाइनैंस होल्डिंग और एलऐंडटी टेक्नोलॉजी सर्विसेज में उसकी हिस्सेदारी को पूरी तरह प्रतिबिंबित नहीं करता।
 
ऐसे में होल्डिंग कंपनी की छूट का मामला सबसे ऊपर क्यों है। अनिवार्य रूप से बाजार इस छूट को लागू करता है क्योंकि होल्डिंग कंपनी का सहायक के नकदी प्रवाह व लाभांश पर सीधा नियंत्रण नहीं होता। साथ ही सहायक की तरफ से दिया गया लाभांश कर के चलते पूरी तरह से मूल कंपनी तक नहीं पहुंचता। 
 
इक्विटास के मामले में होल्डिंग कंपनी की छूट
 
विश्लेषकों ने कहा, बाजार इक्विटास होल्डिंग्स के लिए आईडीएफसी लिमिटेड के समान छूट दे सकता है, जो आईडीएफसी फस्र्ट बैंक के लिए होल्डिंग कंपनी है। होल्डिंग कंपनी की छूट के दो कारण हैं : लाभांश कर और पूंजी आवंटन की चिंता। इक्विटास होल्डिंग्स के मामले में इनमें से किसी का अस्तित्व नहीं है क्योंंकि उसके पास बैंक की 90 फीसदी हिस्सेदारी होगी और बैंक निकट भविष्य में शायद ही आय वितरित करेगा। फंडामेंटल कारण के अभाव में बाजार मानकर चल रहा है कि करीब 50 फीसदी होल्डिंग कंपनी छूट बेंचमार्क बन गया है, जैसा कि आईडीएफसी के मामले में था। कोटक इंस्टिट्यूशनल इक्विटीज ने एक नोट में कहा है कि इक्विटास होल्डिंग्स केमामले में होल्डिंग कंपनी की छूट पर चिंता बेबुनियाद है। नोट में कहा गया है, मेरी राय में इन मसलों के समाधान पर प्रगति उत्साहजनक है।
 
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