बिजनेस स्टैंडर्ड - निर्यातकों को राहत निर्यात बढ़ाने पर जोर
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निर्यातकों को राहत निर्यात बढ़ाने पर जोर

शुभायन चक्रवर्ती / नई दिल्ली 09 16, 2019

छोटे निर्यातकों के लिए घटेगी बीमा किस्त दर

►  निर्यात ऋण आवंटन 30 फीसदी बढ़ाया जाएगा
►  जांच नियमों को बनाया जाएगा आसान
►  निर्यातकों के प्रोफाइल को किया जाएगा दुरुस्त

बिजनेस स्टैंडर्ड निर्यातकों को राहत निर्यात बढ़ाने पर जोरनिर्यात बढ़ाने के लिए कई उपायों की घोषणा के बाद सरकार अब वित्त वर्ष 2019-20 में निर्यात ऋण आवंटन को 30 फीसदी बढ़ाने की योजना पर काम कर रही है। इसके लिए निर्यातकों के वास्ते ऋण का दायरा बढ़ाया जाएगा, जांच नियमों को आसान बनाया जाएगा और निर्यातकों के प्रोफाइल को दुरुस्त किया जाएगा। अगस्त में निर्यात में छह फीसदी की गिरावट आई।

निर्यात क्रेडिट बीमा में बढ़ोतरी उद्योग जगत की अहम मांग रही है। विस्तार से इसकी जानकारी देते हुए वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने आज कहा कि छोटे कारोबारियों द्वारा दी जाने वाली किस्त में कमी आएगी जबकि निर्यातकों के लिए विदेशी और रुपया निर्यात ऋण ब्याज की दरें क्रमश: चार फीसदी और आठ फीसदी से कम होंगी। 

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2019 में सरकारी बैंकों द्वारा निर्यात ऋण के आवंटन में 45 फीसदी की कमी आई है और यह 15,600 करोड़ रुपये रह गया है। एक साल पहले यह 28,300 करोड़ रुपये था। अब सरकार ऋण की लागत को कम करना चाहती है। इसके लिए नियामकीय जरूरतों को कम किया जाएगा और दावों का त्वरित निपटान किया जाएगा।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पिछले सप्ताह कहा था कि बैंकों द्वारा जारी क्रियाशील पूंजी ऋणों पर बीमा कवर 90 फीसदी पहुंच जाएगा जो अभी 60 फीसदी है। इसके लिए सरकार भारतीय निर्यात ऋण गारंटी निगम (ईसीजीसी) के कोष में सालाना 1700 करोड़ रुपये डाले जाएंगे। ईसीजीसी निर्यातकों को ऋण देने वाले बैंकों को ऋण बीमा मुहैया कराता है। वाणिज्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि ईसीजीसी के दायरे में न केवल मूल बकाया आएगा बल्कि बकाया ब्याज भी आएगा। 

गोयल ने कहा कि ब्याज कवरेज अधिकतम दो तिमाही या गैर निष्पादित परिसंपत्तियां (एनपीए) की तिथि के लिए होगा, जो भी पहले हो जबकि ऋण कवरेज में मूलधन और ब्याज दोनों शामिल होंगे। अगर मूलधन या ब्याज का 90 दिन तक भुगतान नहीं किया गया तो यह एनपी बन जाएगा। उम्मीद की जा रही है कि इस तरह ईसीजीसी धीरे-धीरे तीन लाख करोड़ रुपये के निर्यात ऋण को अपने दायरे में ले लेगा जो अमूमन वित्त वर्ष के अंत में बीमा दायरे से बाहर रहता है।

अद्यतन निर्यात ऋण बीमा योजना (ईसीआईएस) के तहत जब तक नुकसान 10 करोड़ रुपये तक नहीं पहुंच जाता है तब तक ईसीजीसी के अधिकारी बैंक दस्तावेजों और रिकॉर्ड की जांच नहीं करेंगे। पहले यह राशि एक करोड़ रुपये थी। साथ ही 80 करोड़ रुपये से कम सीमा वाले खातों के लिए वार्षिक प्रीमियम रेट 0.60 फीसदी होगा जबकि 80 करोड़ रुपये से अधिक सीमा वाले खातों के लिए यह बढ़े हुए कवर के साथ 0.72 फीसदी पर बरकरार रहेगा।

गोयल ने कहा कि भारतीय स्टेट बैंक निर्यात ऋण के लिए बैंकों को लंदन इंटरबैंक ऑफर्ड रेट (लाइबोर) प्लस 50 आधार अंक पर विदेशी मुद्रा फंड मुहैया करेगा। लाइबोर एक बेंचमार्क ब्याज दर है जिस पर दुनिया के प्रमुख बैंक अंतरराष्ट्रीय अंतरबैंक बाजार में एकदूसरे को अल्पावधि ऋण देते हैं।दूसरी ओर ईसीआईएस के जरिये दावों के त्वरित निपटान की भी योजना है। इसके तहत 50 फीसदी तक का भुगतान 30 दिन के भीतर कर दिया जाएगा। गोयल ने कहा कि नियमों में बदलाव से निर्यातकों को बेहतर रेटिंग मिलेगी और फायदा होगा क्योंकि ईसीआईएस को निर्यात प्रोत्साहन योजना माना जा सकता है।

उन्होंने कहा कि वस्तुओं के निर्यातक अब आसानी से एए रेटिंग हासिल कर सकेंगे। इन उपायों से बैंक अब खुद ही ऋण देने में दिलचस्पी दिखाएंगे क्योंकि उन्हें कम पूंजी देनी होगी।सरकार ने साथ ही घोषणा की कि निर्यात क्षेत्र को ऋण देने के लिए बैंकों को 36,000 करोड़ रुपये से 68,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि मुहैया कराई जाएगी। आरबीआई जल्दी ही इस बारे में दिशानिर्देश जारी करेगा जिससे मौजूदा नियमों को अपडेट किया जाएगा। वाणिज्य मंत्रालय के तहत गठित एक अंतरमंत्रालयी कार्यकारी समूह निर्यात वित्त के आंकड़ों पर बराबर नजर रखेगा।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि अब कारोबारी अब सीधे विदेशी मुद्रा में निर्यात ऋण लेने में सक्षम हैं और मंत्रालय कुल निर्यात ऋण में विदेशी मुद्रा की हिस्सेदारी बढ़ाना चाहता है। अभी यह 50 फीसदी है। अधिकारी ने कहा कि मंत्रालय ने साथ ही निर्यात ऋण देने में बैंकों के लिए नियमों को आसान बनाने की संभावना पर भी चर्चा की। अभी बैंक अपने कुल ऋण वितरण का केवल दो फीसदी ही निर्यात ऋण के रूप में दे सकते हैं। निर्यात ऋण को प्रोत्साहन देने के लिए इस नियम में छूट दी जा सकती है।

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