बिजनेस स्टैंडर्ड - तेल में उबाल मगर आपूर्ति स्थिर
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तेल में उबाल मगर आपूर्ति स्थिर

शाइन जैकब और पुनीत वाधवा /  09 16, 2019

तेल कंपनियों के मार्जिन पर असर के आसार

बिजनेस स्टैंडर्ड तेल में उबाल मगर आपूर्ति स्थिरसऊदी अरब में तेल संयंत्रों पर ड्रोन हमले के बाद भारत में कच्चे तेल की आपूर्ति पर किसी तरह का असर पड़ने की आशंका नहीं है लेकिन ईरान से आयात घटने और सऊदी अरब पर तेल आयात के लिए ज्यादा निर्भरता चिंता का सबब जरूर है।  2018-19 में सऊदी अरब भारत का दूसरा और ईरान तीसरा सबसे बड़ा क्रूड ऑयल आपूर्तिकर्ता था जबकि इराक से सबसे अधिक 4.66 करोड़ टन तेल का आयात किया जाता था। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (आईओसी) के पूर्व निदेशक (वित्त) एके शर्मा ने कहा, 'हमने ईरान से आयात पहले ही बंद कर दिया है। ऐसे में अगर लंबे समय तक आपूर्ति बाधित हुई या वैश्विक क्रूड ऑयल की कीमतों में ज्यादा इजाफा हुआ तो हमारे सकल रिफाइनिंग मार्जिन पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। हालांकि सब्सिडी पर इसका असर मामूली पड़ेगा क्योंकि अब केवल एलपीजी और केरोसिन ही सब्सिडी के दायरे में है।' 

जेफरीज के विश्लेषकों का भी कहना है कि तेल की कीमतों में तेजी से मुश्किलें बढ़ सकती हैं। जेफरीज में भारत के प्रबंध निदेशक और इक्विटी अनुसंधान प्रमुख सोमशंकर सिन्हा ने कहा, 'पिछले कुछ वर्षों से सऊदी से 20 फीसदी  तेल आयात किया जा रहा है, जिसकी जगह अन्य कोई आपूर्तिकर्ता देश ढूंढना चुनौती होगी। ब्रेंट क्रूड ऑयल में 10 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी से सालाना आयात बिल 15 अरब डॉलर या सकल घरेलू उत्पाद का 50 आधार अंक बढ़ जाएगा।' इससे तेल विपणन कंपनियों - आईओसी, भारत पेट्रोलियम (बीपीसीएल) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (एचपीसीएल) की आया और रिफाइनिंग मार्जिन पर दबाव पड़ सकता है।

एचपीसीएल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'आपूर्ति को लेकर कोई समस्या नहीं है लेकिन कीमतें अगर 70 डॉलर प्रति बैरल के पार जाती हैं तो इससे बाजार की धारणा पर असर पड़ेगा।' अगर सऊदी अरब से लंबे समय तक आपूर्ति बाधित रही तो भारत पर व्यापक असर पड़ सकता है क्योंकि संयुक्त राष्ट्र की पाबंदी की वजह से ईरान से आयात पहले ही बंद किया जा चुका है।

रियाद में भारतीय दूतावास के अधिकारियों के साथ बैठक में सऊदी के तेल मंत्रालय ने निर्बाध आपूर्ति का आश्वासन दिया। उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि अगर तीन महीने तक सऊदी से आपूर्ति बाधित हुई तो आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (ओईसीडी) के देशों के भंडार से इस अंतर को पाटा जा सकता है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के अनुमान के मुताबिक ओईसीडी देशों के पास 2.93 अरब बैरल व्यावसायिक पेट्रोलियम का भंडार है जिनमें 1.09 अरब बैरल क्रूड का स्टॉक है। अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने अमेरिका एसपीआर से तेल जारी करने की घोषणा की, जिससे सुबह 20 फीसदी चढऩे वाला क्रूड कुछ नरम हुआ।

इसके अलावा सऊदी अरब के पास भी स्टॉक है, जिससे उत्पादन में कमी की भरपाई की जा सकती है। रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार से अधिक तेल की आपूर्ति होने से कच्चे तेल की कीमतों को काबू में रखा जा सकता है। ब्रेंट क्रूड के दाम सोमवार को कारोबार के दौरान 20 फीसदी चढ़कर करीब 71 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। 1991 के बाद एक दिन में आई यह सबसे बड़ी उछाल है। सऊदी अरामको के संयंत्रों पर हमले की वजह से प्रतिदिन 57 लाख बैरल कच्चे तेल का उत्पादन ठप है। यह सऊदी से प्रतिदिन होने वाले निर्यात का आधे से भी अधिक है और दुनिया के कुल उत्पादन का करीब 5 फीसदी है।

कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज की रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक क्रूड ऑयल के दाम में तेजी भले ही अस्थायी हो लेकिन तेल विपणन कंपनियों पर इसका प्रतिकूल असर पड़ेगा। इसमें कहा गया है, 'तेल विपणन मार्जिन कम होने की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता। वैश्विक कच्चे तेल के दाम में 10 डॉलर प्रति बैरल का इजाफा होने से पेट्रोल और डीजल के दाम 5 से 6 रुपये प्रति लीटर बढ़ सकते हैं। 'रिलायंस कमोडिटीज में कमोडिटीज के प्रमुख प्रीतम कुमार पटनायक ने कहा कि एनवाईएमईएक्स और ब्रेंट क्रूड के दामों पर इसका असर दिखने लगा है, जिसमें 10 फीसदी से ज्यादा की तेजी आई है। 

सऊदी हमले के लिए अमेरिका ईरान पर आरोप लगा रहा है, वहीं ईरान युद्घ की चेतावनी दे रहा है। इस चिंता से दुनिया भर में कच्चे तेल के दाम बढ़ सकते हैं। एसऐंडपी ग्लोबल प्लैट्स में वैश्विक विश्लेषण प्रमुख क्रिस मिडग्ले ने कहा, 'भूराजनीतिक जोखिम में अचानक बदलाव से न केवल कमजोर रुझान के कारण दी जा रही 5 से 10 डॉलर की छूट समाप्त होगी बल्कि पश्चिम एशिया में आपूर्ति के वर्तमान जोखिमों और अतिरिक्त क्षमता के अचानक समाप्त हो जाने से कच्चा तेल 5 से 10 डॉलर बढ़ सकता है। अगर सऊदी अरब में अधिक समय तक उत्पादन कम रहा तो कीमतें और चढ़ सकती हैं। हालांकि शायद लंबे समय तक उत्पादन में कटौती न रहे।' हालांकि अभी यह साफ नहीं है कि सऊदी अरामको को कितना नुकसान पहुंचा है और उसे उत्पादन को सामान्य स्तर पर बहाल करने में कितना समय लगेगा। लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि पहले का स्टॉक कंपनी को इस झटके से उबरने में मदद कर सकता है।
Keyword: saudi arabia, crude oil, attack, Aramco,
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