बिजनेस स्टैंडर्ड - जीएसटी कटौती की आस धूमिल
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Monday, October 21, 2019 08:36 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम अर्थव्यवस्था खबर

जीएसटी कटौती की आस धूमिल

शुरुआती पांच महीने में जीएसटी उपकर संग्रह राज्यों की कुल प्रतिपूर्ति भरपाई से कम
दिलाशा सेठ / नई दिल्ली 09 15, 2019

शुक्रवार को होगी जीएसटी परिषद की बैठक

बैठक में राजस्व संग्रह पर होगा विचार
वाहन क्षेत्र के लिए दर में कटौती की संभावना कम
होटलों, बिस्कुल और सीमेंट पर दरें घटाने की मांग
जीएसटी संग्रह का लक्ष्य हासिल करने के लिए हर माह 1.17 लाख करोड़ रु. संग्रह करने की जरूरत

बिजनेस स्टैंडर्ड जीएसटी कटौती की आस धूमिलवस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) में राज्यों के राजस्व नुकसान की भरपाई के लिए लगाए गए उपकर संग्रह में आर्थिक नरमी की वजह से कमी आई है। चालू वित्त वर्ष के पहले पांच महीनों में कुल भरपाई की जरूरतों से भी कम उपकर संग्रह हुआ है जिससे इस हफ्ते शुक्रवार को होने वाली जीएसटी परिषद की बैठक में वाहन क्षेत्र के लिए दरों में कटौती की उम्मीद धूमिल हो सकती है। इस बीच कुछ राज्यों ने पांच सितारा होटलों, बिस्कुट और सीमेंट पर दर में कटौती के लिए कहा है, जिस पर प्रस्तावित बैठक में विचार किया जा सकता है।

सरकार के एक अधिकारी ने कहा, 'दर में कटौती से ज्यादा परिषद की बैठक में राजस्व में कमी को लेकर चर्चा हो सकती है। उपकर कोष राज्यों के राजस्व नुकसान की भरपाई की जरूरत से कम रह गया है।' उन्होंने कहा, 'राज्य यह देखने को उत्सुक हैं कि राजस्व संग्रह को बढ़ावा देने के लिए केंद्र ने किस तरह के उपायों की योजना तैयार की है।' बिज़नेस स्टैंडर्ड ने जिन आंकड़ों का आकलन किया है उसके अनुसार इस साल अगस्त तक जीएसटी प्रतिपूर्ति उपकर संग्रह और राज्यों को आवंटित किए जाने वाले मुआवजे में करीब 24,000 करोड़ रुपये की कमी है। वाहन क्षेत्र में नरमी से भी उपकर संग्रह पर असर पड़ा है। राज्यों को जीएसटी लागू करने के एवज में 5 साल तक अगर किसी तरह के राजस्व का नुकसान होता है, तो उसकी भरपाई करने का वादा किया गया है। 

अगस्त तक 41,000 करोड़ रुपये का संग्रह हुआ जबकि राज्यों को 65,000 करोड़ रुपये का आवंटन किया जाना है। इस कमी की भरपाई पिछले वित्त वर्ष के अतिरेक कोष की जा रही है। अधिकारी ने कहा, 'राज्यों को प्रतिमाह 13,000 करोड़ रुपये की जरूरत है जबकि प्रतिपूर्ति उपकर मद में 8,000 करोड़ रुपये का ही संग्रह हो रहा है।' राज्यों को प्रतिपूर्ति का भुगतान हर दो माह में किया जाता है। पिछले महीने 28,000 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया था। जीएसटी परिषद पांच साल के लिए कोष हस्तांतरण की सिफारिश करने के वास्ते 15वें वित्त आयोग से भी मिलेगा। दूसरी ओर राज्य मुआवजे की अवधि तीन साल और बढ़ाने की मांग कर सकते हैं।

दिलचस्प है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण कहती रही हैं कि वाहन क्षेत्र के लिए जीएसटी में कटौती की मांग पर 20 सितंबर को जीएसटी परिषद की बैठक में विचार किया जाएगा। डेलॉयट इंडिया में पार्टनर एमएस मणि ने कहा, 'अगर वाहन क्षेत्र में दरें कम होने से प्रतिपूर्ति उपकर में किसी तरह की कमी आती है तो इससे और भी मुश्किल बढ़ सकती है क्योंकि उपकर कोष में पहले से भी कमी देखी जा रही है।' उन्होंने कहा, 'राज्य को राजस्व केंद्र से मिलने हैं और वे दरों में सीमित कटौती के पक्ष हैं, वहीं केंद्र सरकार को राज्यों के लिए जीएसटी राजस्व की प्रतिपूर्ति की खातिर संसाधन जुटाने के उपायों पर विचार करने की जरूरत है।'

अगस्त में कुल जीएसटी संग्रह 1 लाख करोड़ रुपये से कम रहा है, जिससे अर्थव्यवस्था में नरमी के संकेत दिख रहे हैं। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्घि दर भी घटकर 5 फीसदी रह गई है, जो नरमी का संकेत है। चालू वित्त वर्ष में वृद्घि अनुमान को हासिल करने के लिए हर महीने कम से कम 1.17 लाख करोड़ रुपये जीएसटी संग्रह करने की जरूरत है। पीडब्ब्ल्यूसी इंडिया में पार्टनर प्रतीक जैन ने कहा, 'प्रतिपूर्ति पाने वाले राज्य 14 फीसदी सालाना वृद्घि की उम्मीद कर रहे हैं जो मौजूदा आर्थिक हालात में आसान नहीं है। हालांकि मेरी राय में इसमें घबराने की कोई वजह नहीं है क्योंकि हम बड़े कर आधार की ओर बढ़ रहे हैं।'

वाहन उद्योग के लिए राज्य दर में कटौती के लिए राजी नहीं हैं लेकिन गोवा और राजस्थान जैसे अन्य राज्य पांच सितारा होटलों के कर को तर्कसंगत बनाने पर जोर दे रहे हैं। वर्तमान में 7,500 रुपये प्रति रात किराये वाले होटलों पर 28 फीसदी जीएसटी वसूला जाता है। इसकी न्यूनतम सीमा 7,500 रुपये से बढ़ाकर 10,000 रुपये की जा सकती है।पीडब्ल्यूसी इंडिया के जैन ने कहा, 'होटलों पर कर को 28 से घटाकर 18 फीसदी करना अच्छा विचार हो सकता है। इससे पर्याटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और कर कटौती से होने वाले नुकसान की भरपाई मांग बढऩे से की जा सकती है।'ईवाई में पार्टनर बिपिन सप्रा ने कहा कि होटलों पर 28 फीसदी कर दर से कर नहीं लगाना चाहिए। कर की दर को तर्कसंगत बनाकर कर संग्रह को बढ़ाया जा सकता है। सीमेंट और बिस्कुट कंपनियां भी दर में कटौती की मांग कर रहे हैं।

Keyword: gst, input tax, credit, crisil, IGST, SGST,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या राजकोषीय घाटे के लक्ष्य से चूकेगी सरकार?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.